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चीनी के दाम बढ़े तो Ethanol पर क्यों उठे सवाल? Centre ने बताया असली कारण

भारत में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार ने Ethanol उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। सरकार ने कम उत्पादन, मौसम, बढ़ती मांग, जमाखोरी और वैश्विक आपूर्ति संकट को मुख्य कारण बताया है। कीमतें नियंत्रित करने के लिए Duty-Free Import और Stock Limits जैसे कदम उठाए गए हैं।

चीनी के दाम बढ़े तो Ethanol पर क्यों उठे सवाल? Centre ने बताया असली कारण

भारत में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच Ethanol Link to Sugar Price Rise को लेकर चल रही बहस पर केंद्र सरकार ने स्थिति साफ की है। सरकार ने Ethanol उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को चीनी की कीमत बढ़ने की वजह बताने वाले दावों को गलत बताया है। सरकार के मुताबिक हालिया तेजी के पीछे कम घरेलू उत्पादन, बढ़ती मांग, जमाखोरी और वैश्विक स्तर पर घटती आपूर्ति जैसे कई कारण हैं। 20 जुलाई 2026 को चीनी की कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। यानी करीब एक महीने में कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सरकार ने घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं।

Ethanol Link to Sugar Price Rise पर Centre ने क्या कहा?

सरकार ने साफ कहा है कि चीनी की मौजूदा कीमतों को Ethanol उत्पादन के लिए गन्ने के डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, Ethanol के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने की हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में घटी है। मंत्रालय के मुताबिक 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत गन्ना Ethanol उत्पादन के लिए डायवर्ट किया गया था, जबकि 2025-26 में यह हिस्सेदारी घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गई। सरकार ने यह भी बताया कि देश में बनने वाले Ethanol का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है। इसलिए मौजूदा Sugar Price Rise को केवल Ethanol Programme से जोड़ना उचित नहीं है।

आखिर चीनी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए हैं। सबसे बड़ी वजह घरेलू उत्पादन में अनुमान से कमी बताई गई है। इस सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों ने शुरुआत में लगभग 343 LMT उत्पादन का अनुमान लगाया था। उत्पादन में कमी के पीछे गन्ने में Red Rot और Top Borer जैसी बीमारियां और अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव को प्रमुख कारण बताया गया है। इसके अलावा बढ़ती मांग, बाजार में जमाखोरी और वैश्विक स्तर पर घटती चीनी आपूर्ति ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।

Global Sugar Supply ने भी बढ़ाई चिंता

चीनी की कीमतों में तेजी केवल भारत तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार 2026-27 में वैश्विक चीनी बाजार में करीब 33 LMT का घाटा रहने का अनुमान है। मौसम से जुड़ी चिंताओं ने भी वैश्विक उत्पादन के अनुमान को प्रभावित किया है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी दिखाई दिया। 30 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में वैश्विक कीमत में 16 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

सरकार ने चीनी की कीमत रोकने के लिए क्या कदम उठाए?

सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए कई उपाय किए हैं। चीनी कारोबारियों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू की गई है। वहीं 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर रही हैं, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।

Duty-Free Sugar Import से बढ़ेगी Supply

घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की भी अनुमति दी है। सरकार को उम्मीद है कि इससे घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध होगी और कीमतों पर दबाव कम होगा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। सरकार ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से पेराई शुरू करने की सलाह भी दी है। इसके चलते अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT से ज्यादा पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।

क्या Ethanol Programme से किसानों को नुकसान हुआ?

केंद्र सरकार ने Ethanol Programme का बचाव करते हुए कहा है कि इससे किसानों को लाभ मिला है और चीनी मिलों की स्थिति मजबूत हुई है। सरकार का कहना है कि Ethanol Programme ने गन्ने के अलावा मक्का जैसे अनाजों से उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है। इससे देश के Ethanol मिश्रण कार्यक्रम को समर्थन मिला है और चीनी उद्योग को अतिरिक्त आय का अवसर मिला है। इसलिए सरकार के अनुसार मौजूदा चीनी कीमतों की पूरी जिम्मेदारी Ethanol उत्पादन पर डालना सही नहीं होगा। वास्तविक स्थिति को समझने के लिए घरेलू उत्पादन, मौसम, मांग, स्टॉक और वैश्विक बाजार- सभी कारकों को एक साथ देखना जरूरी है।

आगे चीनी की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों में असामान्य तेजी को रोकना है। Duty-Free Import से अतिरिक्त आपूर्ति आने की उम्मीद है, जबकि अक्टूबर से नई पेराई शुरू होने के बाद घरेलू उत्पादन भी बढ़ सकता है। हालांकि, कीमतों पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आयातित चीनी कितनी जल्दी बाजार में पहुंचती है, घरेलू उत्पादन कितना रहता है और वैश्विक कीमतों की दिशा क्या रहती है।

निष्कर्ष

हालिया Ethanol Link to Sugar Price Rise को लेकर केंद्र सरकार ने साफ किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण Ethanol उत्पादन के लिए गन्ने का इस्तेमाल नहीं है। सरकार के अनुसार कम घरेलू उत्पादन, फसल की बीमारियां, अत्यधिक बारिश, बढ़ती मांग, जमाखोरी और वैश्विक आपूर्ति में कमी ने कीमतों को ऊपर धकेला है। अब Duty-Free Import, स्टॉक लिमिट और नई पेराई शुरू होने जैसे कदमों से बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

FAQ:

सरकार ने Sugar Price Rise को Ethanol Production से जोड़ने की बात को गलत क्यों बताया?

सरकार के अनुसार Ethanol के लिए डायवर्ट किए जाने वाले गन्ने की हिस्सेदारी 2022-23 के करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गई है। साथ ही देश के करीब तीन-चौथाई Ethanol का उत्पादन अब अनाज, खासकर मक्का, से हो रहा है।

भारत में Sugar Prices क्यों बढ़ रही हैं?

सरकार के अनुसार कम घरेलू उत्पादन, गन्ने की फसल में बीमारियां, अत्यधिक बारिश से जलभराव, बढ़ती मांग, जमाखोरी और वैश्विक चीनी आपूर्ति में कमी कीमत बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।

क्या Sugarcane को Ethanol Production में भेजने से Sugar Supply प्रभावित हुई है?

सरकार ने मौजूदा कीमत वृद्धि को गन्ने के Ethanol डायवर्जन से जोड़ने से इनकार किया है। उसके अनुसार Ethanol के लिए गन्ने के इस्तेमाल की हिस्सेदारी पहले की तुलना में कम हुई है।

सरकार के अनुसार Sugar Price Rise का मुख्य कारण क्या है?

सरकार ने किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। उसके अनुसार घरेलू उत्पादन में कमी, फसल संबंधी समस्याएं, बढ़ती मांग, जमाखोरी और वैश्विक आपूर्ति में कमी मिलकर कीमतों पर दबाव डाल रही हैं।

भारत में Sugar Production इस साल क्यों कम हुई?

इस सीजन में उत्पादन करीब 306 LMT रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान करीब 343 LMT था। Red Rot और Top Borer जैसी बीमारियों के साथ अत्यधिक बारिश और जलभराव ने उत्पादन को प्रभावित किया है।

Ethanol के लिए Sugar Diversion का हिस्सा कितना है?

सरकार के मुताबिक 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत गन्ना Ethanol उत्पादन के लिए डायवर्ट किया गया था। 2025-26 में यह हिस्सा घटकर करीब 9 प्रतिशत रह गया।

भारत के Ethanol Production में Maize की क्या भूमिका है?

सरकार के अनुसार देश के Ethanol उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज से आता है, जिसमें मक्का प्रमुख स्रोत है। इससे Ethanol उत्पादन के लिए गन्ने पर निर्भरता कम हुई है।

सरकार ने Sugar Hoarding रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट लगाई है। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इसके अलावा चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है।

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