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ईरान पर अमेरिका का ‘Economic D-Day’! ट्रंप ने खोला आखिरी मोर्चा, अब तेल को लेकर तेहरान की सबसे बड़ी धमकी

अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इसे “Economic D-Day” बताते हुए ईरान की आर्थिक जीवनरेखा काटने की चेतावनी दी है।

ईरान पर अमेरिका का ‘Economic D-Day’! ट्रंप ने खोला आखिरी मोर्चा, अब तेल को लेकर तेहरान की सबसे बड़ी धमकी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सैन्य टकराव से आगे बढ़कर आर्थिक युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान की चेतावनी देते हुए कहा है कि “Bessent Economic D-Day Against Iran” अब शुरू होने वाला है। अमेरिका का लक्ष्य ईरान की उन आर्थिक गतिविधियों को निशाना बनाना है, जिनसे तेहरान को राजस्व और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समर्थन मिलता है।वहीं ईरान ने भी बेहद कड़ा जवाब दिया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर आर्थिक दबाव बढ़ाया गया तो तेल निर्यात पूरी तरह रोका जा सकता है, जिसमें Strait of Hormuz और Persian Gulf से होने वाला तेल परिवहन भी शामिल है।

Bessent Economic D-Day Against Iran का मतलब क्या है?

Bessent Economic D-Day Against Iran से आशय अमेरिका की उस प्रस्तावित आर्थिक कार्रवाई से है, जिसका उद्देश्य ईरान की वित्तीय और तेल संबंधी गतिविधियों को बड़े पैमाने पर बाधित करना है। Scott Bessent ने कहा है कि अमेरिका ईरान की आर्थिक “lifelines” को काटना चाहता है, ताकि तेहरान पर बातचीत की मेज पर लौटने का दबाव बढ़े।

Bessent ने अपने लेख में कहा कि अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी गंभीर आर्थिक परिणामों के लिए तैयार रहने की चेतावनी दे रहा है।उन्होंने खास तौर पर उन देशों और संस्थाओं पर निशाना साधा जो ईरान का पेट्रोलियम खरीदते या उसका परिवहन करते हैं, समुद्री ईंधन ट्रांसफर में मदद करते हैं या कथित तौर पर ईरान से जुड़े बैंकिंग लेनदेन को नजरअंदाज करते हैं।

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इतनी बड़ी आर्थिक कार्रवाई की बात क्यों कही?

अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसकी सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को कमजोर किया जा सकता है और उसे बातचीत के लिए मजबूर किया जा सकता है।Bessent ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है और उसके सैन्य कारखानों तथा परमाणु कार्यक्रम को भी निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अब संघर्ष “endgame” में प्रवेश कर रहा है और अगला बड़ा मोर्चा अर्थव्यवस्था होगा।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान आर्थिक कार्रवाई के जवाब में सैन्य बल का इस्तेमाल करता है, तो राष्ट्रपति Donald Trump तेजी से और निर्णायक जवाब देंगे।हालांकि, Bessent के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है।

Image: AFP

ईरान ने तेल को बनाया सबसे बड़ा हथियार

अमेरिकी आर्थिक दबाव के जवाब में ईरान ने तेल और समुद्री मार्गों को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत के तौर पर इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है।ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने अमेरिका की प्रस्तावित नई पाबंदियों को संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र सदस्य देशों पर “extraterritorial sovereignty” थोपने की कोशिश बताया।

वहीं ईरान के Supreme National Security Council के सचिव Mohsen Rezaei ने इससे भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहा तो “एक बूंद भी तेल निर्यात नहीं होगा”न Strait of Hormuz से और न ही Persian Gulf के किसी अन्य रास्ते से।उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होने या उसका समर्थन करने वाले किसी भी देश को ईरान इसे “Act of War” मानेगा।

चीन पर भी बढ़ सकता है अमेरिकी दबाव

इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चीन ईरान के समुद्री रास्ते से निर्यात होने वाले तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और 2025 के Kpler डेटा के अनुसार वह ऐसे तेल का 80 प्रतिशत से अधिक खरीदता है।

ऐसे में यदि अमेरिका ईरान के तेल कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाता है, तो उसका असर सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों पर भी अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है।यही वजह है कि Iran Sanctions 2026 और अमेरिकी Secondary Sanctions आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।

Strait of Hormuz पर नजर, तेल बाजार में बढ़ सकती है चिंता

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। ईरान की ओर से यहां तेल परिवहन रोकने की धमकी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में तनाव पहले से काफी ज्यादा है।

अगर इस रास्ते से तेल की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है।हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान अपनी धमकी को किस हद तक लागू करता है और अमेरिका तथा उसके सहयोगी देश उसका जवाब कैसे देते हैं।

ईरान में भी आर्थिक दबाव की चिंता

ईरान के भीतर भी आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता सामने आई है। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने माना कि सिर्फ सैन्य ताकत पर्याप्त नहीं है और देश को आर्थिक गतिविधियों, उत्पादन और वित्तीय प्रवाह की भी जरूरत है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोग भूखे हैं और अर्थव्यवस्था में पैसा नहीं घूम रहा है, तो केवल सैन्य शक्ति के सहारे देश लंबे समय तक नहीं चल सकता।ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी कूटनीतिक समाधान की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने युद्ध को समाप्त करने की बात कही और बातचीत के रास्ते की ओर संकेत किया।

क्या अमेरिका और ईरान फिर बातचीत की मेज पर आएंगे?

फिलहाल दोनों पक्षों की बयानबाजी बेहद आक्रामक है। एक ओर अमेरिका ईरान की आर्थिक जीवनरेखा काटने की बात कर रहा है, वहीं तेहरान तेल निर्यात रोकने और अमेरिकी अभियान का समर्थन करने वाले देशों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहा है।

इसके बावजूद कूटनीति की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। चीन ने भी बातचीत और कूटनीतिक समाधान की अपील की है।आने वाले दिनों में असली सवाल यही होगा कि Bessent Economic D-Day Against Iran केवल प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव तक सीमित रहता है या इसके बाद ईरान की ओर से Strait of Hormuz और तेल निर्यात को लेकर उठाए गए कदम तनाव को एक नए स्तर पर ले जाते हैं।

निष्कर्ष

Bessent Economic D-Day Against Iran ने अमेरिका-ईरान संघर्ष का फोकस सैन्य मोर्चे से आर्थिक मोर्चे पर ला दिया है। अमेरिका ईरान की तेल, वित्तीय और व्यापारिक गतिविधियों को निशाना बनाने की तैयारी में है, जबकि तेहरान ने तेल निर्यात रोकने और समर्थक देशों को “Act of War” मानने की चेतावनी दी है। अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिकी ऐलान, ईरान के जवाब और Strait of Hormuz की स्थिति पर है।

FAQ:

Bessent Economic D-Day Against Iran का क्या मतलब है?

इसका मतलब ईरान के खिलाफ अमेरिका की प्रस्तावित बड़े पैमाने की आर्थिक कार्रवाई से है, जिसका उद्देश्य उसकी आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है।

Scott Bessent ने Iran को लेकर कौन-सी चेतावनी दी?

उन्होंने ईरान की आर्थिक “lifelines” काटने और उसके साथ कारोबार करने वाले देशों को भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।

ईरान ने अमेरिका को क्या जवाब दिया?

ईरान ने चेतावनी दी कि आर्थिक युद्ध जारी रहने पर वह तेल निर्यात रोक सकता है और अमेरिकी अभियान का समर्थन करने वाले देशों की भागीदारी को “Act of War” मान सकता है।

Iran Sanctions 2026 का चीन पर क्या असर पड़ सकता है?

चीन ईरानी समुद्री तेल का प्रमुख खरीदार है। इसलिए ईरान के तेल कारोबार पर अमेरिकी कार्रवाई चीन से जुड़े व्यापार और ऊर्जा लेनदेन को भी प्रभावित कर सकती है।

Strait of Hormuz क्यों महत्वपूर्ण है?

यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां तेल परिवहन में बड़ा व्यवधान वैश्विक तेल बाजार और कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

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