India Israel Trade Agreement : भारत और इज़राइल के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ गया है। दोनों देशों ने 20 से 23 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में चार दिनों तक चली दूसरे दौर की वार्ता सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इस दौरान दोनों पक्षों ने प्रस्तावित समझौते के लगभग सभी प्रमुख अध्यायों पर विस्तार से चर्चा की और संतुलित, व्यापक तथा दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस दौर की बातचीत रचनात्मक रही और कई तकनीकी मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने तथा साझा सहमति बनाने की दिशा में प्रगति हुई। दोनों पक्षों ने जल्द से जल्द वार्ता पूरी कर मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

दूसरे दौर की बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
चार दिनों तक चली इस वार्ता में दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रस्तावित FTA के विभिन्न अध्यायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बातचीत केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापार और निवेश को प्रभावित करने वाले लगभग सभी महत्वपूर्ण विषय इसमें शामिल रहे।

इस दौरान वस्तुओं के व्यापार (Trade in Goods), सेवाओं के व्यापार (Trade in Services), वस्तुओं की उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin), स्वास्थ्य एवं पादप सुरक्षा मानक (Sanitary and Phytosanitary Measures), तकनीकी व्यापार बाधाएं (Technical Barriers to Trade), बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights), सीमा शुल्क प्रक्रियाएं (Customs Procedures), व्यापार सुविधा (Trade Facilitation) तथा आर्थिक सहयोग (Economic Cooperation) जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने इन विषयों पर तकनीकी स्तर पर गहन विचार-विमर्श किया ताकि जिन क्षेत्रों में मतभेद हैं, उन्हें कम किया जा सके और जहां सहमति संभव है, वहां आगे बढ़ा जा सके।

भारत और इज़राइल ने क्या कहा?
वार्ता के उद्घाटन सत्र में भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने कहा कि भारत ऐसा मुक्त व्यापार समझौता चाहता है जो संतुलित, व्यापक और दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी हो। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा।
वहीं इज़राइल की ओर से मुख्य वार्ताकार तथा अर्थव्यवस्था एवं उद्योग मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी यिफात अलोन पेरेल ने पहले दौर की तुलना में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को इसी गति से बातचीत आगे बढ़ानी चाहिए ताकि जल्द से जल्द महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते तक पहुंचा जा सके।
बैठक के अंत में दोनों देशों ने दोहराया कि वे जल्द से जल्द वार्ता पूरी करने और एक संतुलित तथा व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
नवंबर 2025 में बनी थी वार्ता की रूपरेखा
भारत और इज़राइल के बीच FTA पर बातचीत किसी अचानक शुरू हुई प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। इसके लिए नवंबर 2025 में दोनों देशों ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference-ToR) पर हस्ताक्षर किए थे। यही दस्तावेज पूरी वार्ता का आधार है।

इस रूपरेखा में यह तय किया गया कि किन-किन क्षेत्रों पर बातचीत होगी, वार्ता किस तरीके से आगे बढ़ेगी और किन मुद्दों पर दोनों देश आपसी सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। दूसरे दौर की पूरी बातचीत भी इसी सहमत रूपरेखा के आधार पर हुई।
लगभग चार अरब डॉलर तक पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार
भारत और इज़राइल के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.93 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
दोनों देशों का मानना है कि मौजूदा व्यापारिक संबंध मजबूत हैं, लेकिन इनमें अभी भी काफी संभावनाएं मौजूद हैं। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के जरिए व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और आर्थिक एकीकरण को और मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसी कारण वार्ता के दौरान बाजार तक बेहतर पहुंच (Market Access), व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने और निवेश को प्रोत्साहित करने जैसे मुद्दों को भी विशेष महत्व दिया गया।

केवल व्यापार नहीं, रणनीतिक साझेदारी भी होगी मजबूत
भारत और इज़राइल के संबंध पिछले कुछ वर्षों में केवल रक्षा और कृषि तक सीमित नहीं रहे हैं। दोनों देश प्रौद्योगिकी, नवाचार, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्टार्टअप, कृषि अनुसंधान और उच्च तकनीक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।
ऐसे में प्रस्तावित FTA को केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे दोनों देशों के व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने वाले समझौते के रूप में देखा जा रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय का भी कहना है कि भारत और इज़राइल कई क्षेत्रों में एक-दूसरे की जरूरतों के अनुरूप क्षमता रखते हैं। यही पूरकता (Complementarity) इस समझौते को दोनों देशों के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
मुक्त व्यापार समझौता आखिर होता क्या है?
मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाला ऐसा व्यापारिक समझौता होता है, जिसके तहत दोनों देश आपसी व्यापार पर लगने वाले सीमा शुल्क (Customs Duty) और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त करने पर सहमत होते हैं। इसका उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान आसान बनाना, निवेश बढ़ाना और उद्योगों के लिए नए बाजार खोलना होता है।
हालांकि हर FTA में सभी वस्तुओं पर शुल्क पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता। कई संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर भी रखा जाता है या उन पर अलग व्यवस्था लागू होती है। इसलिए प्रत्येक FTA की शर्तें संबंधित देशों की आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुसार तय की जाती हैं।
भारत और इज़राइल के बीच व्यापारिक संबंध कितने मजबूत हैं?
भारत और इज़राइल के आर्थिक संबंध पिछले तीन दशकों में लगातार मजबूत हुए हैं। शुरुआत में दोनों देशों के बीच व्यापार मुख्य रूप से हीरे और रत्नों तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इसमें रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा उपकरण, रसायन, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवाचार जैसे कई नए क्षेत्र जुड़ गए।।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनकी अर्थव्यवस्थाएं कई क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक हैं। भारत बड़े बाजार, विनिर्माण क्षमता और कुशल मानव संसाधन के लिए जाना जाता है, जबकि इज़राइल उन्नत तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और उच्च तकनीकी समाधान में अग्रणी देशों में शामिल है।
किन क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है?
प्रस्तावित FTA का प्रभाव केवल आयात और निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा। यदि समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के उद्योगों को एक-दूसरे के बाजार तक अधिक आसान पहुंच मिल सकती है।
भारत के लिए इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, रसायन, ऑटो कंपोनेंट्स, कृषि आधारित उत्पाद, आईटी सेवाएं और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में नए अवसर खुल सकते हैं। वहीं इज़राइल की कंपनियों को कृषि तकनीक, जल संरक्षण, चिकित्सा उपकरण, साइबर सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डिजिटल समाधान और उच्च तकनीकी विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है।
दोनों देशों का मानना है कि इससे केवल व्यापार नहीं बढ़ेगा, बल्कि संयुक्त निवेश, अनुसंधान एवं विकास (R&D), तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को भी गति मिलेगी।
निवेश और आर्थिक सहयोग को भी मिलेगी नई दिशा
भारत और इज़राइल की वार्ता केवल सीमा शुल्क घटाने तक सीमित नहीं है। बातचीत में आर्थिक सहयोग, व्यापार सुविधा और निवेश बढ़ाने पर भी समान रूप से जोर दिया गया है।
यदि समझौता सफल रहता है तो दोनों देशों के उद्योगों के लिए निवेश संबंधी प्रक्रियाएं आसान हो सकती हैं। इससे संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures), तकनीकी हस्तांतरण, स्टार्टअप सहयोग और उत्पादन साझेदारी जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
भारत लंबे समय से वैश्विक निवेश आकर्षित करने की नीति पर काम कर रहा है, जबकि इज़राइल अपनी अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार क्षमता के लिए विश्वभर में जाना जाता है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किन चुनौतियों पर अभी सहमति बननी बाकी है?
हालांकि दूसरे दौर की वार्ता सकारात्मक रही, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले कई जटिल मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है।
दोनों देशों को यह तय करना होगा कि किन उत्पादों पर शुल्क कम किया जाएगा, किन संवेदनशील क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा दी जाएगी और किन नियमों के तहत किसी उत्पाद की वास्तविक उत्पत्ति (Rules of Origin) तय की जाएगी। इसी तरह स्वास्थ्य एवं पादप सुरक्षा मानकों, तकनीकी व्यापार बाधाओं, बौद्धिक संपदा अधिकारों और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों पर भी अंतिम सहमति आवश्यक होगी।
इसी कारण दोनों देशों ने तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखने और मतभेद वाले क्षेत्रों में समाधान खोजने पर सहमति व्यक्त की है।
भारत के लिए यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
भारत पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक स्तर पर कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यात बढ़ाना, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भारत की भूमिका मजबूत करना और घरेलू उद्योगों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना है।
इज़राइल के साथ प्रस्तावित FTA इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रणनीतिक संबंध हैं और अब आर्थिक साझेदारी को भी उसी स्तर तक ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता संतुलित रूप में लागू होता है तो इससे व्यापार के साथ-साथ तकनीकी सहयोग और नवाचार आधारित उद्योगों को भी नई गति मिल सकती है।
आगे क्या होगा?
दूसरे दौर की वार्ता पूरी होने के बाद दोनों देशों के अधिकारी तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी रखेंगे। जिन विषयों पर अभी पूर्ण सहमति नहीं बन सकी है, उन पर अगले दौर की बातचीत में विस्तार से विचार किया जाएगा।
भारत और इज़राइल दोनों ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य जल्द से जल्द संतुलित, व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है। हालांकि समझौते की कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।
FAQ
- भारत और इज़राइल के बीच व्यापार समझौता वार्ता किस चरण में है?
भारत और इज़राइल ने प्रस्तावित FTA पर दूसरे दौर की वार्ता 20 से 23 जुलाई 2026 के बीच नई दिल्ली में पूरी कर ली है। दोनों देश जल्द समझौता अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। - दूसरे दौर की वार्ता में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, Rules of Origin, Sanitary and Phytosanitary Measures, Technical Barriers to Trade, Intellectual Property Rights, Customs Procedures, Trade Facilitation तथा Economic Cooperation सहित कई अध्यायों पर विस्तृत चर्चा हुई। - भारत-इज़राइल FTA का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना, बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना और दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। - इस समझौते से दोनों देशों को क्या लाभ होगा?
समझौते से व्यापार और निवेश बढ़ने, तकनीकी सहयोग मजबूत होने, उद्योगों को नए बाजार मिलने और आर्थिक एकीकरण को गति मिलने की संभावना है। - भारत और इज़राइल के बीच वर्तमान व्यापार कितना है?
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.93 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। - किन क्षेत्रों को इस समझौते से सबसे अधिक लाभ मिलेगा?
फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, आईटी, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा उपकरण, स्टार्टअप, उच्च तकनीक विनिर्माण और नवाचार आधारित उद्योगों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना मानी जा रही है।

