Shivpuri Fort Cannon Theft: नरवर किले से 400 साल पुरानी तोप कहां हुई गायब? राजस्थान तक पहुंची जांच, जानिए पूरा मामला..

Shivpuri Fort Cannon Theft

Shivpuri Fort Cannon Theft : मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से करीब 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी होने का मामला अब दो राज्यों तक पहुंच चुका है। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने राजस्थान के करौली जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात में इस्तेमाल की गई महिंद्रा बोलेरो पिकअप भी जब्त कर ली है। हालांकि चोरी हुई करीब 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप अब तक बरामद नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और विशेष टीम लगातार राजस्थान में सर्च अभियान चला रही है। जांच में साइबर सेल, सीसीटीवी फुटेज और टोल प्लाजा के तकनीकी साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई।

नरवर किले से गायब हुई 400 साल पुरानी धरोहर

यह करीब 400 साल पुरानी तोप नरवर किले के कचहरी महल परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक थी। पुरातत्व विभाग के चौकीदार रमेश कोली ने नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि 15 जुलाई 2026 की शाम ड्यूटी समाप्त करने के बाद जब वह 16 जुलाई की सुबह वापस पहुंचे तो एक तोप गायब मिली। आसपास काफी तलाश की गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

दो बार बनाई योजना, दूसरी कोशिश में सफल हुए आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इस करीब 400 साल पुरानी तोप को चोरी करने की पहली कोशिश 5 जुलाई को की थी। लेकिन लगभग 3.5 टन वजन होने के कारण वे उसे वहां से नहीं ले जा सके। इसके बाद उन्होंने दोबारा योजना बनाई और 15 जुलाई को वाहन लेकर किले पहुंचे। इस बार आरोपी किले के पिछले हिस्से से अंदर पहुंचे और तोप को पिकअप वाहन में लादकर फरार हो गए।

साइबर सेल और CCTV से खुला राजस्थान कनेक्शन

घटना के बाद शिवपुरी पुलिस ने साइबर सेल की मदद से तकनीकी साक्ष्य जुटाए। किले से लेकर विभिन्न टोल प्लाजा तक लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई। इसी दौरान महिंद्रा बोलेरो पिकअप (RJ34GA2980) संदिग्ध वाहन के रूप में सामने आई। वाहन की लोकेशन और फुटेज के आधार पर जांच राजस्थान के करौली जिले तक पहुंची। इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने करौली पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई शुरू की।

टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दिया कि आरोपी तोप को पिकअप वाहन में रखकर मध्य प्रदेश से राजस्थान की ओर ले जा रहे हैं। इसी तकनीकी साक्ष्य ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में सबसे बड़ी मदद की।

 

दो आरोपी गिरफ्तार, पिकअप वाहन भी जब्त

पुलिस ने करौली जिले के हिण्डौन सदर थाना क्षेत्र के पालनपुर निवासी अमन मीणा और गांवड़ा मीणा निवासी टिम्मू राम मीणा को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई महिंद्रा बोलेरो पिकअप भी जब्त कर ली। अधिकारियों के अनुसार दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस चोरी में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

 

करौली में चला बड़ा सर्च ऑपरेशन

जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि चोरी की गई तोप करौली जिले के गांवड़ा मीणा गांव में छिपाई गई है। इसके बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। कई संदिग्ध स्थानों पर जेसीबी मशीनों से खुदाई कराई गई। तलाशी अभियान में भरतपुर से अंडरग्राउंड मेटल डिटेक्टर वाली विशेष टीम भी बुलाई गई, ताकि जमीन के भीतर छिपी धातु की वस्तुओं का पता लगाया जा सके।

हालांकि कई घंटों तक चले अभियान के बावजूद पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली और ऐतिहासिक तोप अब भी बरामद नहीं हो सकी।

 

अष्टधातु की बनी होने से करोड़ों की कीमत का अनुमान

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि चोरी हुई तोप अष्टधातु से बनी बताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय अवैध प्राचीन वस्तु बाजार में इसकी कीमत करोड़ों रुपये हो सकती है। इसी वजह से पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं इस चोरी के पीछे किसी संगठित प्राचीन धरोहर तस्करी गिरोह का हाथ तो नहीं है।

 

पंचना बांध विवाद से जुड़े एंगल की भी जांच

पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने यह दावा भी आया कि आरोपियों का संबंध करौली के पंचना बांध विवाद से जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर इस तोप का इस्तेमाल किसी साजिश के तहत करने की योजना बनाई थी। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस दावे की अभी पुष्टि नहीं हुई है और इस पहलू की अलग से जांच की जा रही है।

 

30 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवपुरी की पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने शुरुआत में फरार आरोपियों पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। बाद में ग्वालियर रेंज के आईजी ने इनाम बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया। तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस को पहली बड़ी सफलता मिली और दो आरोपी गिरफ्तार किए गए।

 

नरवर किला क्यों है खास

शिवपुरी जिले का नरवर किला मध्य प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। किले में रखी ऐतिहासिक तोपें मध्यकालीन सैन्य इतिहास, तत्कालीन युद्ध तकनीक और भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। ऐसे में इस तोप की चोरी को केवल आपराधिक घटना नहीं, बल्कि देश की पुरातात्विक धरोहर पर हमला भी माना जा रहा है।

FAQs

1. शिवपुरी किले से चोरी हुई तोप कितनी पुरानी थी?

पुलिस और प्रमुख रिपोर्टों के अनुसार नरवर किले से चोरी हुई तोप करीब 400 साल पुरानी और लगभग 3.5 टन वजनी ऐतिहासिक धरोहर थी।

 

2. इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया?

अब तक राजस्थान के करौली जिले से अमन मीणा और टिम्मू राम मीणा सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

 

3. यह ऐतिहासिक तोप कहाँ रखी गई थी?

यह नरवर किले के कचहरी महल परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक थी।

 

4. पुलिस ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?

साइबर सेल की तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और वाहन की लोकेशन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

 

5. क्या चोरी हुई तोप बरामद हो गई है?

नहीं। करौली जिले में कई स्थानों पर खुदाई और तलाशी अभियान चलाने के बावजूद तोप अभी तक बरामद नहीं हो सकी है।

 

6. शिवपुरी किले का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

नरवर किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है और यहां मौजूद ऐतिहासिक तोपें भारत की सैन्य एवं सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती हैं।

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