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Mangaluru Murder Case 2014: हादसा नहीं, सोची-समझी हत्या थी, 12 साल बाद अदालत ने सुनाई उम्रकैद... जानिए मंगलुरु हत्याकांड का पूरा सच

Mangaluru Murder Case 2014: करीब 12 साल पहले कर्नाटक के मंगलुरु में हुई एक मौत को शुरुआत में सामान्य सड़क हादसा माना गया था, लेकिन पुलिस जांच ने धीरे-धीरे इस मामले की पूरी तस्वीर बदल दी। जांच में सामने आया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि पहले से रची गई हत्या की साजिश थी। अब इस मामले में मंगलुरु की द्

Mangaluru Murder Case 2014: हादसा नहीं, सोची-समझी हत्या थी, 12 साल बाद अदालत ने सुनाई उम्रकैद... जानिए मंगलुरु हत्याकांड का पूरा सच

Mangaluru Murder Case 2014: करीब 12 साल पहले कर्नाटक के मंगलुरु में हुई एक मौत को शुरुआत में सामान्य सड़क हादसा माना गया था, लेकिन पुलिस जांच ने धीरे-धीरे इस मामले की पूरी तस्वीर बदल दी। जांच में सामने आया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि पहले से रची गई हत्या की साजिश थी। अब इस मामले में मंगलुरु की द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने चार लोगों को हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया, पीड़ित की बेटी को मुआवजा देने का आदेश दिया और अपराध में इस्तेमाल किए गए वाहनों को जब्त करने का निर्देश दिया।

महासभा के विवाद से शुरू हुई दुश्मनी

अभियोजन पक्ष के अनुसार इस पूरे मामले की जड़ बैकमपाडी मोगावीरा महासभा का आंतरिक विवाद था। मुख्य आरोपी सतीश बैकमपाडी महासभा का अध्यक्ष रह चुका था। उस पर मंदिर के पुनर्निर्माण और एक हाई स्कूल भवन के निर्माण के लिए जुटाए गए धन के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद उसे और भास्कर बैकमपाडी को महासभा से निलंबित कर दिया गया।

अभियोजन का कहना था कि सतीश बैकमपाडी इस निलंबन और अपनी कथित बदनामी के लिए गंगाधर पांगला को जिम्मेदार मानता था। इसी रंजिश के चलते उसने हरीश बैकमपाडी, भास्कर बैकमपाडी और पुष्पराज के साथ मिलकर उनकी हत्या की साजिश रची।

 

पहला प्रयास नाकाम, अगले दिन वारदात को दिया अंजाम

अदालत में पेश अभियोजन के अनुसार 13 मई 2014 को आरोपियों ने गंगाधर पांगला की गतिविधियों पर नजर रखी और हत्या की पहली योजना बनाई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।

अगले दिन पांगला एक 'तांबिला' धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद घर लौट रहे थे। वह कार से उतरकर अपने स्कूटर से घर की ओर जा रहे थे। तभी आरोपियों ने पहले से तय योजना के तहत उनका पीछा किया और पीछे से एक बोलेरो/एसयूवी से उनके स्कूटर में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि पांगला की मौके पर ही मौत हो गई। अभियोजन के अनुसार आरोपी यह सुनिश्चित करने के बाद वहां से भाग निकले कि उनकी मौत हो चुकी है, ताकि घटना सड़क दुर्घटना जैसी लगे।

 

सड़क हादसा नहीं, हत्या की साजिश निकली

घटना के तुरंत बाद मामला सड़क दुर्घटना के रूप में दर्ज किया गया था, लेकिन जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले, जिनसे संदेह गहरा गया। आगे की जांच में पता चला कि वाहन जानबूझकर स्कूटर से टकराया गया था और पूरी घटना पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी।

पुलिस के अनुसार अपराध में इस्तेमाल हुई एसयूवी को बाद में शहर के एक निजी गैराज में छिपाने की कोशिश की गई, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें। इसके बाद मामला दुर्घटना से बदलकर हत्या और आपराधिक साजिश में दर्ज किया गया। पनाम्बूर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120-बी, 201, 109 और 34 के तहत आरोप दर्ज किए।

 

12 साल की जांच और अदालत में लंबी सुनवाई

इस मामले की जांच अलग-अलग चरणों में कई पुलिस अधिकारियों ने की। बाद में निरीक्षक लोकेश ए.सी. ने जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।

पिछले वर्ष ट्रायल शुरू हुआ, जिसमें अभियोजन पक्ष ने 43 गवाहों के बयान दर्ज कराए। विशेष लोक अभियोजक ज्योति प्रमोद नायक ने अदालत के सामने यह साबित करने की कोशिश की कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि पूर्व नियोजित हत्या थी। अदालत ने गवाहों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी माना।

 

चारों दोषियों को उम्रकैद, जुर्माना और अतिरिक्त सजा

द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र (विशेष) न्यायालय के न्यायाधीश वी.एन. जगदीश ने सतीश बैकमपाडी, हरीश बैकमपाडी, भास्कर बैकमपाडी और पुष्पराज को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

प्रत्येक दोषी पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सबूत मिटाने के अपराध में सभी को दो वर्ष के साधारण कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

 

पीड़ित परिवार को मुआवजा और वाहनों की जब्ती

अदालत ने कुल जुर्माने की राशि में से 50,000 रुपये गंगाधर पांगला की बेटी को मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया। शेष राशि सरकारी खजाने में जमा होगी।

इसके अलावा अपराध में इस्तेमाल हुई बोलेरो/एसयूवी और अन्य वाहनों को जब्त कर सरकार के पक्ष में अधिग्रहित करने का आदेश भी दिया गया।

 

FAQs

1. मंगलुरु हत्या मामले में अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

अदालत ने चारों आरोपियों को हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

 

2. यह मामला सड़क दुर्घटना जैसा क्यों दिखाया गया था?

आरोपियों ने जानबूझकर एसयूवी से स्कूटर को टक्कर मारकर हत्या को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की थी।

 

3. दोषियों को किस सजा से दंडित किया गया?

चारों को उम्रकैद, जुर्माना और सबूत मिटाने के लिए अतिरिक्त दो वर्ष की सजा सुनाई गई।

 

4. यह घटना कब हुई थी?

यह घटना मई 2014 में मंगलुरु के पनाम्बूर थाना क्षेत्र में हुई थी।

 

5. पुलिस ने मामले का खुलासा कैसे किया?

जांच में पता चला कि वाहन की टक्कर जानबूझकर मारी गई थी और पूरी घटना पहले से बनाई गई साजिश का हिस्सा थी।

 

6. अदालत ने किन सबूतों के आधार पर फैसला दिया?

अदालत ने 43 गवाहों की गवाही, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पुलिस जांच के निष्कर्षों को आधार बनाकर फैसला सुनाया।

 

7. इस मामले में कितने लोग दोषी पाए गए?

इस मामले में चार लोगों को दोषी ठहराया गया और सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

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