सिर्फ बाहर से पेपर की पैकिंग हुई तो भी नियम पूरे नहीं माने जाएंगे
नए नियमों की सबसे अहम बात यही है कि पैकेजिंग को सिर्फ बाहर से देखकर प्लास्टिक-फ्री नहीं माना जाएगा।
मान लीजिए किसी पान मसाला पैकेट की बाहरी परत पेपर की है, लेकिन उसके अंदर पॉलीथीन की परत लगी है। या पेपर के साथ एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी पैकेजिंग नए तय किए गए मानकों के मुताबिक स्वीकार्य नहीं होगी।
इसका मतलब कंपनियों को पैकेजिंग के पूरे मटेरियल स्ट्रक्चर को बदलना पड़ सकता है, न कि केवल बाहरी पैकेट को।
प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के पुराने नियम भी लागू होंगे
FSSAI के नए प्रावधानों में Plastic Waste Management Rules, 2016 के कुछ प्रावधानों को भी पान मसाला की पैकेजिंग पर लागू किया गया है।
इनमें खास तौर पर यह व्यवस्था शामिल है कि प्लास्टिक सामग्री से बने सैशे (sachet) का इस्तेमाल गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को रखने, पैक करने या बेचने के लिए नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा प्लास्टिक सामग्री के किसी भी रूप को गुटखा, पान मसाला और तंबाकू की पैकेजिंग में इस्तेमाल करने पर रोक से जुड़े प्रावधान भी लागू होते हैं।
यानी FSSAI का नया नियम केवल पान मसाला के पैकेट की ऊपरी सतह तक सीमित नहीं है। पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग लेयर और प्लास्टिक सामग्री भी इसके दायरे में आती हैं।
नियम अचानक नहीं आए, पहले ड्राफ्ट पर मांगी गई थीं आपत्तियां
FSSAI ने इन नियमों को सीधे लागू नहीं किया। इसके लिए पहले 28 अप्रैल 2026 को ड्राफ्ट Food Safety and Standards (Packaging) Amendment Regulations, 2026 जारी किया गया था।
ड्राफ्ट में पान मसाला को Schedule 4 में एक नई एंट्री के तौर पर शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसी Schedule में खाद्य पदार्थों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सुझाए गए पैकेजिंग मटेरियल की सूची दी जाती है।
FSSAI ने ड्राफ्ट पर संबंधित लोगों और कंपनियों से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। इसके बाद मिले सुझावों पर विचार करते हुए अंतिम नियम जारी किए गए।
FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर अप्रैल में पान मसाला के लिए पैकेजिंग मटेरियल से जुड़ा यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन दर्ज है।
कंपनियों पर क्या बदलेगा?
नए नियमों का सीधा असर पान मसाला बनाने और पैक करने वाली कंपनियों की पैकेजिंग प्रक्रिया पर पड़ेगा।
अब कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अगर वे पेपर, पेपरबोर्ड, सेलूलोज या प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल कर रही हैं तो उसमें प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर, कॉपॉलिमर, लैमिनेट, एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर न हो।
दूसरा विकल्प टिन या ग्लास कंटेनर का है।
इससे कंपनियों को पैकेजिंग मटेरियल के सप्लायर, पैकेज डिजाइन और पैकिंग प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है। खास तौर पर उन पैकेटों के लिए बदलाव जरूरी होगा जिनमें पेपर के साथ प्लास्टिक या मेटलाइज्ड लेयर का इस्तेमाल होता है।
क्या पान मसाला पर कोई नया बैन लगा है?
नहीं। इसे पान मसाला पर प्रतिबंध के तौर पर नहीं समझना चाहिए।
FSSAI का यह बदलाव पैकेजिंग रेगुलेशन से जुड़ा है। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि पान मसाला को किस तरह की पैकेजिंग में रखा और बेचा जा सकता है।
यानी पान मसाला उत्पाद पर इस नोटिफिकेशन के जरिए कोई अलग से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। बदलाव का मुख्य केंद्र प्लास्टिक-आधारित पैकेजिंग को हटाना है।
FSSAI ने यह बदलाव क्यों किया?
नए नियम का सबसे सीधा असर प्लास्टिक पैकेजिंग को कम करने पर पड़ेगा। पान मसाला और तंबाकू उत्पादों में छोटे प्लास्टिक सैशे और मल्टी-लेयर पैकेजिंग के इस्तेमाल को लेकर पहले से ही Plastic Waste Management Rules के तहत प्रतिबंध मौजूद हैं। FSSAI ने पान मसाला को अपनी पैकेजिंग सामग्री की सूची में शामिल करते हुए इन प्रावधानों को अपने पैकेजिंग नियमों के साथ जोड़ा है।
इससे एक तरफ पैकेजिंग के लिए स्पष्ट सामग्री मानक तय होते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग से पैदा होने वाले कचरे को कम करने की दिशा में भी नियम सख्त होते हैं।
नए नियम कब से लागू होंगे?
अंतिम नियम Official Gazette में प्रकाशित होने की तारीख से लागू होने की बात दी गई है। यानी यह कोई लंबी भविष्य की समयसीमा वाला प्रस्ताव नहीं है; अधिसूचना के लागू होने के साथ ही संबंधित प्रावधान Food Safety and Standards (Packaging) Regulations, 2018 का हिस्सा बनते हैं।
FSSAI ने यह बदलाव Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए किया है।
FAQ
1. FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग में क्या बदलाव किया है?
पान मसाला की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक-फ्री पेपर, पेपरबोर्ड, सेलूलोज या अन्य प्राकृतिक सामग्री की अनुमति दी गई है। टिन और ग्लास कंटेनर भी अनुमत विकल्प हैं।
2. क्या पान मसाला की प्लास्टिक पैकेजिंग पर पूरी तरह रोक है?
नए पैकेजिंग प्रावधान पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक सामग्री के इस्तेमाल को स्वीकार्य पैकेजिंग विकल्पों से बाहर करते हैं। इसमें पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएस्टर, PVC और दूसरे सिंथेटिक पॉलिमर आदि शामिल हैं।
3. क्या पेपर पैकेजिंग में एल्युमिनियम फॉयल लगाया जा सकता है?
नहीं। जिन पेपर या प्राकृतिक सामग्री को अनुमत विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा, उनमें एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर नहीं होनी चाहिए।
4. क्या टिन और ग्लास में पान मसाला पैक किया जा सकता है?
हां। FSSAI के प्रावधानों में टिन या ग्लास कंटेनर को भी अनुमत पैकेजिंग विकल्प के रूप में शामिल किया गया है।
5. क्या इस नियम से पान मसाला पर बैन लग गया है?
नहीं। यह पैकेजिंग नियम है, पान मसाला उत्पाद पर प्रतिबंध नहीं।
6. क्या कंपनियां पेपर के अंदर प्लास्टिक की लेयर लगा सकती हैं?
नहीं। अगर पेपर या पेपरबोर्ड पैकेजिंग में प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर, कॉपॉलिमर या लैमिनेट मौजूद है, तो वह निर्धारित सामग्री की शर्त पूरी नहीं करेगी।
7. क्या FSSAI ने पहले भी इस बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया था?
हां। FSSAI ने 28 अप्रैल 2026 को ड्राफ्ट जारी कर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। इसके बाद अंतिम नियम जारी किए गए।
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