Chad Withdraws from ICC: अफ्रीकी देश चाड (Chad) ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court-ICC) से बाहर निकलने का फैसला लेकर वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। सरकार ने कहा है कि ICC का कामकाज सभी क्षेत्रों के लिए समान नहीं रहा और उसकी कार्रवाई मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों तक सीमित रही है। चाड का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल के महीनों में कई देशों ने ICC की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और अमेरिका भी इस संस्था के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपना रहा है।

22 साल के रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद लिया गया फैसला
चाड सरकार ने कहा कि वर्ष 2002 में ICC के काम शुरू होने के बाद से उसके पूरे रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। इस समीक्षा में सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अदालत की प्रभावशीलता सीमित रही है और विभिन्न क्षेत्रों के प्रति उसका रवैया समान नहीं रहा। सरकार का आरोप है कि ICC की जांच और अभियोजन का सबसे बड़ा फोकस अफ्रीकी देशों पर रहा, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में गंभीर आरोपों वाले मामलों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
सरकार के अनुसार अब तक ICC द्वारा शुरू की गई 13 जांचों में से 9 अफ्रीकी देशों से जुड़ी थीं, जबकि अन्य क्षेत्रों से संबंधित मामलों में ठोस परिणाम नहीं निकल सके। चाड ने यह भी कहा कि अदालत की हिरासत में मौजूद सात आरोपियों में से छह अफ्रीकी मामलों से जुड़े हैं। सरकार का मानना है कि यह स्थिति संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) आखिर क्या है?
करीम खान को हटाए जाने के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (International Criminal Court-ICC) चर्चा में है। ICC दुनिया की पहली स्थायी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत है, जिसकी स्थापना नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रमण जैसे सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने के उद्देश्य से की गई थी।

इस अदालत का मुख्यालय नीदरलैंड्स के हेग (The Hague) में स्थित है। इसका संचालन रोम संविधि (Rome Statute) के तहत होता है, जिसे 17 जुलाई 1998 को अपनाया गया था और 1 जुलाई 2002 से यह प्रभावी हुआ। इसी दिन से ICC ने औपचारिक रूप से काम शुरू किया।
ICC राज्यों पर नहीं बल्कि व्यक्तियों पर मुकदमा चलाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी देश की न्यायिक व्यवस्था गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थ या अनिच्छुक हो, तो ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

अफ्रीकी देशों की पुरानी नाराजगी फिर सामने आई
चाड अकेला ऐसा देश नहीं है जिसने ICC पर पक्षपात का आरोप लगाया है। इससे पहले सितंबर 2025 में बुर्किना फासो, माली और नाइजर ने भी संयुक्त रूप से ICC से हटने का फैसला किया था। इन तीनों देशों ने अदालत को “नव-औपनिवेशिक दमन का औजार” बताते हुए आरोप लगाया था कि इसका इस्तेमाल अफ्रीकी देशों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
इन देशों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था तभी विश्वसनीय मानी जाएगी जब सभी देशों और क्षेत्रों के मामलों में समान मानदंड अपनाए जाएं।
अमेरिका के दबाव का भी आया जिक्र
चाड के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार ICC से हटने का फैसला ऐसे समय लिया गया, जब अमेरिका ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई थी। मंत्रालय के मुताबिक अमेरिकी उप विदेश मंत्री (अफ्रीकी मामलों) ने हाल ही में चाड सरकार से फोन पर बातचीत के दौरान रोम संविधि (Rome Statute) की सदस्यता पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।
बयान में कहा गया कि अमेरिकी पक्ष ने ICC के कामकाज पर चिंता व्यक्त की और चाड से संस्था में बने रहने के फैसले की समीक्षा करने को कहा। हालांकि चाड सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसका अंतिम निर्णय पूरी तरह अमेरिकी आग्रह के कारण लिया गया या यह केवल कई कारणों में से एक था।
इजरायल मामले के बाद अमेरिका और ICC के रिश्ते और बिगड़े
ICC और अमेरिका के बीच तनाव पहले से मौजूद था, लेकिन नवंबर 2024 में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद यह टकराव और बढ़ गया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका ICC की कार्यक्षमता को व्यवस्थित तरीके से कमजोर करने के लिए अभियान चलाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि इसी माहौल में चाड और उसके बाद कुछ अन्य देशों के फैसलों ने ICC पर दबाव और बढ़ा दिया है।
करीम खान विवाद ने भी बढ़ाई मुश्किलें
ICC हाल के महीनों में अपने पूर्व मुख्य अभियोजक करीम खान से जुड़े विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहा। गंभीर कदाचार के आरोपों के बाद उन्हें पद से हटाया गया। हालांकि उनकी कानूनी टीम का कहना है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब करीम खान कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच कर रहे थे। इससे भी ICC की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई।
पड़ोसी सूडान संघर्ष के बीच आया फैसला
चाड का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पड़ोसी देश सूडान में जारी संघर्ष को लेकर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चाड की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि चाड सरकार ने ICC से हटने के फैसले को सीधे इन आरोपों से नहीं जोड़ा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों घटनाओं को एक साथ देखा जा रहा है।
ICC से बाहर निकलने की प्रक्रिया
ICC की सदस्यता छोड़ने के लिए किसी देश को संयुक्त राष्ट्र महासचिव को औपचारिक सूचना देनी होती है। यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू नहीं होता। रोम संविधि के अनुसार सूचना देने के एक वर्ष बाद सदस्यता समाप्त होती है। हालांकि सदस्यता समाप्त होने के बाद भी उस अवधि के दौरान शुरू हुई कानूनी प्रक्रियाओं या दायित्वों से संबंधित मामलों में देश की जिम्मेदारियां बनी रह सकती हैं।
ICC के सामने बढ़ती चुनौती
हाल के वर्षों में बुरुंडी, फिलीपींस, हंगरी, वेनेजुएला और अब चाड जैसे देशों के फैसलों ने ICC की वैश्विक स्वीकार्यता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दूसरी ओर अदालत का कहना है कि वह केवल उपलब्ध कानूनी साक्ष्यों और रोम संविधि के प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई करती है तथा उसका उद्देश्य किसी क्षेत्र विशेष को निशाना बनाना नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देशों का भरोसा लगातार कम होता रहा तो अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता भी प्रभावित हो सकती है।
ICC और ICJ में क्या अंतर है?
अक्सर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) को एक ही संस्था समझ लिया जाता है, जबकि दोनों की भूमिका पूरी तरह अलग है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की स्थापना 1945 में हुई थी और यह संयुक्त राष्ट्र (UN) का सर्वोच्च न्यायिक अंग है। यह देशों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करता है और कानूनी प्रश्नों पर सलाहकारी राय देता है। इसके अधिकार क्षेत्र में केवल देश आते हैं, व्यक्ति नहीं।
दूसरी ओर, ICC की स्थापना 2002 में हुई थी और यह संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा नहीं है। इसका गठन रोम संविधि के तहत हुआ है। यह अदालत केवल व्यक्तियों पर मुकदमा चलाती है और नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध तथा आक्रमण जैसे मामलों की सुनवाई करती है।
ICJ के फैसलों को लागू कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जबकि ICC अपने आदेशों के क्रियान्वयन के लिए सदस्य देशों के सहयोग पर निर्भर करता है। ICJ में अपील की व्यवस्था नहीं है, जबकि ICC में अपील का प्रावधान मौजूद है।

FAQs
1. चाड ने ICC से हटने का फैसला क्यों लिया?
चाड का कहना है कि ICC की कार्यप्रणाली संतुलित नहीं रही और उसकी अधिकांश कार्रवाई अफ्रीकी देशों पर केंद्रित रही, इसलिए उसने रोम संविधि से बाहर निकलने का फैसला किया।
2. अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) क्या है?
ICC एक अंतरराष्ट्रीय अदालत है, जिसकी स्थापना 2002 में युद्ध अपराध, नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और आक्रमण के अपराध जैसे गंभीर मामलों की सुनवाई के लिए की गई थी।
3. चाड ने ICC पर क्या आरोप लगाए हैं?
चाड ने आरोप लगाया है कि ICC की जांच और अभियोजन मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों तक सीमित रहे हैं और अन्य क्षेत्रों के मामलों में समान स्तर की कार्रवाई नहीं हुई।
4. क्या अन्य अफ्रीकी देशों ने भी ICC की आलोचना की है?
हां। बुर्किना फासो, माली और नाइजर जैसे देशों ने भी ICC पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उससे बाहर निकलने का फैसला किया है।
5. ICC से बाहर होने की प्रक्रिया क्या है?
किसी देश को संयुक्त राष्ट्र महासचिव को औपचारिक सूचना देनी होती है। इसके एक वर्ष बाद सदस्यता समाप्त होती है, हालांकि पहले से चल रहे मामलों से जुड़े कानूनी दायित्व समाप्त नहीं होते।

