Reliance Infrastructure Money Laundering Case में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने Reliance Infrastructure Limited (RIL), Sateesh Seth और अन्य के खिलाफ करीब ₹187 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Prosecution Complaint दाखिल की है। मामला चार NHAI टोल-रोड प्रोजेक्ट्स से कथित तौर पर फंड डायवर्जन, शेल कंपनियों और लेन-देन को कई स्तरों पर घुमाने से जुड़ा है। हालांकि, ये फिलहाल जांच एजेंसी के आरोप हैं और मामले का अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद होगा।
₹187 करोड़ के मामले में ED ने क्या कार्रवाई की?
ED ने 8 अगस्त 2026 को Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA के तहत दिल्ली के द्वारका स्थित Special Court (PMLA) के सामने Prosecution Complaint दाखिल की। एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई मुंबई EOW की 11 फरवरी 2026 को दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई जांच के बाद हुई।जांच में ED ने आरोप लगाया है कि करीब ₹187 करोड़ की रकम सितंबर और अक्टूबर 2010 के दौरान कथित फर्जी, बैकडेटेड या बाद में बनाए गए सब-कॉन्ट्रैक्टिंग इंतजामों के जरिए परियोजनाओं से बाहर निकाली गई।एजेंसी के अनुसार, रकम को पहले Reliance Infrastructure या उससे जुड़े Project SPVs/EPC contractors से construction contractors तक भेजा गया और इसके बाद कथित शेल कंपनियों के जरिए अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया।

Reliance Infrastructure Money Laundering Case में चार NHAI प्रोजेक्ट कौन से हैं?
ED की जांच के मुताबिक कथित फंड डायवर्जन चार NHAI-अवार्डेड टोल रोड प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है:
- Trichy-Karur – NH-67
- Trichy-Dindigul – NH-45
- Salem-Ulundurpet -NH-68
- Jaipur-Reengus -NH-11
इन परियोजनाओं को NHAI ग्रांट के अलावा बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भी फंडिंग मिली थी। ED का आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स से जुड़े फंड को वास्तविक सड़क निर्माण कार्य के बजाय कथित तौर पर फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग और अन्य लेन-देन के जरिए डायवर्ट किया गया।
शेल कंपनियों और डायमंड ट्रांजैक्शन का क्या कनेक्शन है?
जांच एजेंसी के मुताबिक कथित फंड ट्रेल केवल सड़क परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा। ED ने आरोप लगाया है कि रकम को ऐसी कंपनियों के खातों में भेजा गया जिनका सड़क निर्माण से कोई वास्तविक संबंध नहीं था।इसके बाद कथित तौर पर इन पैसों को फर्जी इनवॉइस, ओवर-वैल्यूड डायमंड इंपोर्ट और अन्य लेयर्ड ट्रांजैक्शन के जरिए घुमाया गया।ED का दावा है कि इन लेन-देन को वास्तविक प्रोजेक्ट खर्च के तौर पर दिखाने के लिए बाद में दस्तावेज तैयार किए गए। इस तरह कथित तौर पर पैसों के असली स्रोत और अंतिम इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश की गई।
₹187 करोड़ की संपत्तियां भी अटैच
इस मामले में ED ने 3 अगस्त 2026 को करीब ₹187 करोड़ की संपत्तियां प्रोविजनली अटैच की थीं। इनमें Reliance Infrastructure के पास मौजूद Reliance Power Limited के इक्विटी शेयर और Ksheeraabd Constructions Private Limited से जुड़ी जमीन जैसी संपत्तियां शामिल हैं।ED के मुताबिक, Sateesh Seth को 12 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
PMLA में Prosecution Complaint का क्या मतलब है?
Prosecution Complaint को आसान भाषा में ED की ओर से अदालत के सामने पेश किया गया औपचारिक अभियोजन मामला समझा जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपित व्यक्ति या कंपनी अदालत से दोषी साबित हो चुके हैं।अब आगे अदालत इस मामले में ED की शिकायत, उपलब्ध सबूत और आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार करेगी। अंतिम दोषसिद्धि या बरी होने का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
क्यों अहम है Reliance Infrastructure Money Laundering Case?
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित फंड डायवर्जन का संबंध NHAI की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं से बताया गया है। ED के आरोप सही साबित होने पर यह सवाल उठेगा कि सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराए गए फंड की निगरानी और इस्तेमाल किस तरह हुआ।फिलहाल Reliance Infrastructure Money Laundering Case में जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। ED की कार्रवाई और ₹187 करोड़ की संपत्तियों की अटैचमेंट के बाद मामले पर आगे अदालत में होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
FAQs:
यह करीब ₹187 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग और फंड डायवर्जन से जुड़ा मामला है। ED के मुताबिक, रकम चार NHAI टोल-रोड प्रोजेक्ट्स से कथित तौर पर शेल कंपनियों और लेयर्ड ट्रांजैक्शन के जरिए डायवर्ट की गई।
ED का आरोप है कि चार NHAI प्रोजेक्ट्स से जुड़े फंड को कथित फर्जी या बैकडेटेड सब-कॉन्ट्रैक्टिंग व्यवस्था और अन्य लेन-देन के जरिए डायवर्ट किया गया।
ED ने PMLA के तहत जांच करते हुए Prosecution Complaint दाखिल की है और मामले में करीब ₹187 करोड़ की संपत्तियां प्रोविजनली अटैच करने की कार्रवाई भी की है।
PMLA यानी Prevention of Money Laundering Act भारत का प्रमुख कानून है जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराधों और उससे जुड़े कथित Proceeds of Crime की जांच और कार्रवाई के लिए किया जाता है।
नहीं। ED ने आरोप लगाए हैं और Prosecution Complaint दाखिल की है। अंतिम दोषसिद्धि अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

