देशभर में बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच FCRA Bill JPC Referral 2026 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में एक प्रस्ताव लाकर Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को Joint Parliamentary Committee (JPC) के पास भेजने की तैयारी में है। यह कदम तमिलनाडु विधानसभा के विरोध और मिजोरम में हुए बड़े प्रदर्शन के बाद सामने आया है।
FCRA Bill JPC Referral 2026 क्यों आया चर्चा में?
FCRA Bill JPC Referral 2026 का फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब बिल के कई प्रावधानों को लेकर विपक्ष, कुछ राज्य सरकारों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से बिल को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने की मांग की। राज्य सरकार ने कहा कि बिल के कुछ प्रावधान चैरिटेबल संस्थाओं की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण संस्थानों को। वहीं, मिजोरम की राजधानी आइजोल में भी सैकड़ों ईसाइयों ने बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि FCRA पंजीकरण रद्द होने या उसका नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में चर्च और NGO की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।

FCRA Amendment Bill 2026 में ऐसा क्या है जिस पर विवाद?
FCRA Amendment Bill 2026 का उद्देश्य देश में विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले NGOs और अन्य संस्थाओं पर सरकारी निगरानी को और मजबूत करना है। बिल के प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी संस्था का FCRA Registration रद्द हो जाता है, समाप्त हो जाता है या संस्था अपना पंजीकरण सरेंडर करती है, तो विदेशी योगदान से हासिल की गई संपत्तियां और उस योगदान से बनाई गई अन्य परिसंपत्तियां एक नामित सरकारी प्राधिकरण के नियंत्रण में जा सकती हैं। यदि निर्धारित अवधि में संस्था को नया FCRA प्रमाणपत्र नहीं मिलता है, तो इन संपत्तियों को सरकारी विभाग को हस्तांतरित या बेचा जा सकता है। बिक्री से मिली रकम Consolidated Fund of India में जमा करने का प्रस्ताव है। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि दोबारा पंजीकरण होने पर संस्था को अपनी संपत्ति वापस हासिल करने का मौजूदा अधिकार खत्म हो सकता है।
विपक्ष और राज्यों ने क्यों जताई आपत्ति?
विपक्षी दलों का आरोप है कि बिल के कुछ प्रावधानों का असर अल्पसंख्यक संस्थानों और खास तौर पर ईसाई NGOs पर ज्यादा पड़ सकता है। तमिलनाडु विधानसभा ने कहा कि विदेशी योगदान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए भी कानून में प्राकृतिक न्याय, समानुपातिकता, संपत्ति के अधिकार और संघीय ढांचे के सिद्धांतों की रक्षा होनी चाहिए। मिजोरम में प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने भी कहा कि किसी संस्था की FCRA Registration समाप्त होने पर उसकी जमीन, इमारत, फंड और दूसरी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण को लेकर पर्याप्त न्यायिक सुरक्षा होनी चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य देश में Foreign Contributions के नियमन को मजबूत करना और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
JPC में जाने के बाद FCRA Bill का क्या होगा?
अगर लोकसभा में प्रस्ताव पारित होता है, तो FCRA Bill JPC के पास जाएगा। Joint Parliamentary Committee में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद शामिल होते हैं। समिति बिल के प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा कर सकती है, संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों की राय ले सकती है और अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट संसद को सौंप सकती है। इसके बाद बिल में बदलाव किए जाने की संभावना भी बनी रहती है।हालांकि, DMK नेता Tiruchi Siva ने कहा है कि बिल को केवल JPC भेजना पर्याप्त नहीं होगा और पार्टी मौजूदा स्वरूप में बिल को स्वीकार नहीं करती।
FCRA Bill JPC Referral 2026 पर अब आगे क्या?
सरकार द्वारा बिल को JPC भेजने की तैयारी के बाद अब निगाह लोकसभा में पेश होने वाले प्रस्ताव पर है। इसके बाद समिति बिल के विवादित प्रावधानों की जांच कर सकती है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि JPC की समीक्षा के बाद NGO Regulation, FCRA Licence और NGO Assets से जुड़े विवादित प्रावधानों में क्या बदलाव किए जाते हैं।
निष्कर्ष
FCRA Bill JPC Referral 2026 सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से उठ रहे विरोध के बाद बिल को JPC में भेजने से सरकार को इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा और समीक्षा का रास्ता मिलेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति की सिफारिशों के बाद FCRA Amendment Bill 2026 अपने मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ता है या इसमें बड़े बदलाव किए जाते हैं।
FAQs
1. FCRA Bill को JPC के पास भेजने का फैसला क्यों लिया गया?
बिल के कई प्रावधानों को लेकर विपक्ष, कुछ राज्य सरकारों और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। इसी बीच सरकार ने इसे JPC को भेजने की तैयारी की है।
2. FCRA Bill 2026 क्या है?
यह एक प्रस्तावित संशोधन कानून है, जिसका उद्देश्य विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले NGOs और अन्य संस्थाओं पर नियमन और सरकारी निगरानी को मजबूत करना है।
3. JPC यानी Joint Parliamentary Committee क्या होती है?
JPC लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों की संयुक्त समिति होती है, जो किसी बिल या विशेष मुद्दे की विस्तृत जांच कर संसद को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें देती है।
4. FCRA Amendment Bill को लेकर विपक्ष क्यों विरोध कर रहा है?
विपक्ष का कहना है कि कुछ प्रावधान NGO और अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता तथा उनकी संपत्तियों के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।
5. FCRA Bill को JPC में भेजने से अब क्या होगा?
JPC बिल के प्रावधानों की समीक्षा कर सकती है, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की राय ले सकती है और बदलावों की सिफारिश कर सकती है।
6. क्या FCRA Bill को JPC में भेजने के बाद इसमें बदलाव हो सकते हैं?
हां। JPC अपनी रिपोर्ट में बिल के प्रावधानों में बदलाव की सिफारिश कर सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय संसद की प्रक्रिया के तहत होगा।

