भारत में हर साल करोड़ों पेड़ लगाने के दावे सामने आते हैं। लेकिन क्या ज्यादा पेड़ लगाने का मतलब वास्तव में ज्यादा जंगल होना है? CAG Audit Green India Mission ने इस सवाल को बेहद गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक में Green India Mission के तहत जंगलों की गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य 1.4 मिलियन हेक्टेयर था, लेकिन उपलब्धि सिर्फ 0.11 मिलियन हेक्टेयर रही। यानी लक्ष्य का दसवां हिस्सा भी पूरा नहीं हुआ।इससे भी बड़ा सवाल यह है कि जब देश में हरियाली बढ़ने के आंकड़े सामने आ रहे हैं, तो प्राकृतिक जंगलों की स्थिति क्यों चिंता बढ़ा रही है?
Green India Mission आखिर है क्या?
Green India Mission पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं बल्कि भारत के जंगलों को बचाना, पुनर्स्थापित करना और उनकी गुणवत्ता बढ़ाना है। यह 2008 में शुरू किए गए National Action Plan on Climate Change के आठ प्रमुख मिशनों में शामिल है। इसका फोकस जैव विविधता, जल संरक्षण, कार्बन अवशोषण और वन्यजीवों के आवास को बेहतर बनाने पर है। भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2030 तक अतिरिक्त 2.5 से 3 अरब टन CO₂ के बराबर कार्बन सिंक तैयार करने का लक्ष्य भी रखा है।यानी मिशन की मूल भावना थी—जंगल की संख्या नहीं, जंगल की सेहत बढ़ाना। लेकिन CAG Audit Green India Mission में सामने आई तस्वीर बताती है कि जमीन पर कहानी कुछ और रही।

CAG Audit Green India Mission में क्या सामने आया?
CAG की Performance Audit ने 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मिशन के क्रियान्वयन की समीक्षा की। इसमें कई अहम कमियां सामने आईं।सबसे बड़ी बात जंगल की गुणवत्ता सुधारने से जुड़ी है। मिशन ने एक दशक में 1.4 मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र की गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य रखा था, लेकिन उपलब्धि केवल 0.11 मिलियन हेक्टेयर रही।यानी लक्ष्य के मुकाबले करीब 91.87% की कमी दर्ज हुई।वहीं वन क्षेत्र विस्तार के लक्ष्य को हासिल करने में उपलब्धि करीब 4% रही। इस मोर्चे पर करीब 97.57% का शॉर्टफॉल दर्ज किया गया।सवाल सिर्फ लक्ष्य पूरे न होने का नहीं है। असली चिंता यह है कि जिस मिशन को जंगलों की ecological restoration के लिए तैयार किया गया था, वह व्यवहार में बड़े पैमाने पर plantation activity तक सिमटता नजर आया।
पैसा भी बना बड़ी अड़चन
CAG Audit Green India Mission के मुताबिक, ऑडिट की गई पूरी अवधि में मिशन को बजटीय सहायता के तौर पर करीब ₹1,149.14 करोड़ ही मिले।मिशन की funding structure ऐसी बनाई गई थी कि इसे अकेले अपने बजट पर निर्भर नहीं रहना था। CAMPA और ग्रामीण रोजगार योजनाओं जैसी दूसरी योजनाओं से पैसा और श्रम जोड़कर बड़े स्तर पर restoration किया जाना था।लेकिन यह convergence उस तरह काम नहीं कर पाया, जैसा इसकी योजना बनाई गई थी।नतीजा यह हुआ कि मिशन के लक्ष्य बड़े रहे, लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए जरूरी संसाधन उसी अनुपात में नहीं पहुंच पाए।
पेड़ बढ़े, लेकिन क्या जंगल भी बढ़े?
यहीं पर CAG Audit Green India Mission का सबसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है-Tree Cover और Forest Cover एक चीज नहीं हैं।India State of Forest Report 2023 के अनुसार देश के green cover में 1,445 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज हुई। लेकिन इसमें केवल 156 वर्ग किलोमीटर वास्तविक forest cover था।बाकी करीब 1,289 वर्ग किलोमीटर हिस्सा recorded forests के बाहर मौजूद tree cover का था। इसका मतलब यह हुआ कि सड़क किनारे पेड़, छोटे plantation patches, orchards या अन्य स्थानों पर मौजूद पेड़ green cover बढ़ा सकते हैं, लेकिन उन्हें प्राकृतिक या बहाल हो चुका जंगल नहीं माना जा सकता।
यही अंतर इस पूरी बहस की जड़ है।
एक पेड़ लगाना एक measurable activity है। लेकिन एक degraded forest को फिर से ecological रूप से स्वस्थ बनाना वर्षों या दशकों का काम है।पेड़ लगाना आसान, जंगल बहाल करना मुश्किलएक plantation drive में यह गिनना आसान है कि कितने saplings लगाए गए। लेकिन एक restored forest को सिर्फ पेड़ों की संख्या से नहीं मापा जा सकता। देखना पड़ता है-
- क्या लगाए गए पौधे जीवित भी हैं?
- क्या वे स्थानीय और native species हैं?
- क्या अलग-अलग प्रजातियों का natural mix तैयार हो रहा है?
- क्या canopy density बढ़ रही है?
- क्या मिट्टी की गुणवत्ता सुधर रही है?
- क्या groundwater recharge हो रहा है?
- क्या wildlife के लिए habitat वापस आ रहा है?
- क्या ecosystem अपनी प्राकृतिक functions फिर से निभा रहा है?
यही वजह है कि CAG Audit Green India Mission के आंकड़े केवल plantation numbers से आगे जाकर forest quality पर सवाल खड़े करते हैं।अगर किसी जगह हजारों पौधे लगा दिए जाएं लेकिन कुछ वर्षों बाद वहां प्राकृतिक canopy, biodiversity और ecosystem functions विकसित न हों, तो उसे जंगल की बहाली कहना मुश्किल होगा।
‘Ek Ped Maa Ke Naam’ से अलग है Green India Mission
2024 में शुरू हुआ ‘Ek Ped Maa Ke Naam’ अभियान बड़े पैमाने पर plantation को बढ़ावा देता है। सरकार के अनुसार अब तक इसके तहत करीब 140 करोड़ saplings लगाए जा चुके हैं।यह एक बड़ा plantation effort है, लेकिन plantation और ecological restoration को एक ही पैमाने से देखना समस्या पैदा कर सकता है। CAG Audit Green India Mission की चिंता भी इसी अंतर से जुड़ी है। अगर सफलता का सबसे प्रमुख पैमाना केवल “कितने पौधे लगाए गए” बन जाए, तो यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि उन पौधों से वास्तव में कितने स्वस्थ जंगल तैयार हुए।एक plantation का आंकड़ा एक साल में दिख सकता है। जंगल की गुणवत्ता का परिणाम वर्षों बाद सामने आता है।और यहीं policy measurement का फर्क बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
Aravalli Green Wall भी क्यों आसान समाधान नहीं?
Aravalli क्षेत्र इसका एक बड़ा उदाहरण है। लंबे समय से mining, land degradation और invasive species जैसी समस्याओं ने इस landscape को नुकसान पहुंचाया है।ऐसे क्षेत्र में सिर्फ नए पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं होगा।मसलन, Prosopis juliflora यानी विलायती कीकर जैसी invasive species native vegetation की natural regeneration को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में पहले invasive growth को नियंत्रित करना, degraded land को recover करना और स्थानीय ecosystem को फिर से स्थापित करना जरूरी है।इसी तरह जहां mining से पहाड़ या landscape ही बदल चुका हो, वहां केवल plantation उस ecological damage को वापस नहीं ला सकता।Restoration का मतलब जमीन पर पेड़ खड़े करना नहीं, बल्कि ecosystem को फिर से काम करने लायक बनाना है।
Green India Mission की सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
CAG Audit Green India Mission के निष्कर्षों के साथ कई जमीनी चुनौतियां भी जुड़ी हैं।
- पहली चुनौती-sapling survival: सिर्फ यह बताना कि कितने पौधे लगाए गए, पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि तीन साल बाद कितने पौधे जीवित हैं।
- दूसरी-monoculture: तेजी से बढ़ने वाली या व्यावसायिक रूप से उपयोगी कुछ प्रजातियों की बड़ी संख्या में plantation biodiversity के लिहाज से प्राकृतिक mixed forest का विकल्प नहीं बन सकती।
- तीसरी-भूमि की उपलब्धता: degraded forest land पर grazing, खेती, settlement और अन्य उपयोगों से जुड़े दावे restoration को मुश्किल बनाते हैं।
- चौथी-Forest Rights: जहां आदिवासी और अन्य पारंपरिक forest dwellers के अधिकारों का निपटारा नहीं हुआ है, वहां restoration projects सामाजिक विवाद पैदा कर सकते हैं।
- पांचवीं-Invasive Species: पहले से मौजूद invasive plants को हटाए बिना restoration करना मुश्किल और महंगा हो सकता है।
- छठी-Forest Department की क्षमता: जंगल बहाली के लिए लगातार monitoring और field-level supervision चाहिए, जिसके लिए पर्याप्त staff और संसाधन जरूरी हैं।
- सातवीं-Forest Diversion: एक तरफ restoration की कोशिश और दूसरी तरफ infrastructure projects के लिए forest डायवर्जन-दोनों को साथ देखकर ही वास्तविक ecological picture समझी जा सकती है।
भारत के लिए आगे का रास्ता क्या होना चाहिए?
CAG Audit Green India Mission से सबसे बड़ा सबक यह है कि भारत को plantation से आगे बढ़कर restoration-based measurement अपनाने की जरूरत है।भविष्य में सिर्फ “कितने करोड़ पौधे लगाए गए” बताने के बजाय सरकारों को यह बताना चाहिए कि-
- कितने पौधे तीन साल बाद जीवित हैं।
- कितने हेक्टेयर degraded forest वास्तव में restore हुआ।
- canopy density में कितना सुधार आया।
- native species की diversity कितनी बढ़ी।
- wildlife habitat कितना बहाल हुआ।
- groundwater और soil health में क्या बदलाव आया।
- CAMPA और अन्य योजनाओं का पैसा वास्तव में कहां और कैसे इस्तेमाल हुआ।
यानी activity को achievement और achievement को ecological outcome मानने के बीच फर्क समझना होगा।
निष्कर्ष:
जंगल की गिनती पेड़ों से नहीं, उसकी सेहत से होनी चाहिए CAG Audit Green India Mission ने भारत की forest policy के सामने एक बेहद जरूरी सवाल रखा है-क्या हम जंगल बचा रहे हैं या सिर्फ हरियाली के आंकड़े बढ़ा रहे हैं?करोड़ों पौधे लगाना निश्चित रूप से अच्छी पहल हो सकती है, लेकिन इससे अपने आप प्राकृतिक जंगल वापस नहीं आते। जंगल एक जटिल ecosystem है, जिसमें पेड़, मिट्टी, पानी, वन्यजीव, स्थानीय समुदाय और biodiversity एक साथ काम करते हैं।Green India Mission का मूल लक्ष्य इसी ecosystem को मजबूत करना था। लेकिन एक दशक में forest quality सुधार और forest cover expansion के बेहद कम आंकड़े बताते हैं कि implementation, funding और monitoring में बड़ी खामियां रहीं।आखिरकार, पेड़ गिनना आसान है, जंगल बनाना नहीं। अगर भारत को अपने climate commitments और ecological goals हासिल करने हैं, तो सफलता का पैमाना saplings की संख्या नहीं, बल्कि कितने स्वस्थ और टिकाऊ जंगल वापस लौटे—यह होना चाहिए।
FAQs
- CAG Audit Green India Mission क्या है?
यह Green India Mission के प्रदर्शन और क्रियान्वयन की CAG द्वारा की गई Performance Audit है, जिसमें 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मिशन की प्रगति की समीक्षा की गई।
- CAG ने Green India Mission की Audit में क्या पाया?
ऑडिट के अनुसार, जंगल की गुणवत्ता सुधारने के 1.4 मिलियन हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 0.11 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में सुधार हुआ। वन क्षेत्र विस्तार के लक्ष्य की उपलब्धि भी करीब 4% रही।
- Green India Mission का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य भारत के forest cover को बढ़ाने के साथ-साथ मौजूदा जंगलों की गुणवत्ता सुधारना और climate change से adaptation तथा mitigation के जरिए निपटना है।
- Tree Cover और Forest Cover में क्या अंतर है?
Forest cover में निर्धारित मानकों के अनुसार बड़े भू-भाग पर मौजूद tree canopy शामिल होती है, जबकि tree cover में recorded forest के बाहर मौजूद छोटे tree patches और अन्य पेड़ भी शामिल हो सकते हैं।
- Green India Mission के लिए Funding कितनी मिली?
दिए गए CAG audit विवरण के अनुसार, ऑडिट की गई दशकभर की अवधि में मिशन को करीब ₹1,149.14 करोड़ की बजटीय सहायता मिली।

