Supreme Court Hanging Death Penalty: फांसी खत्म करने की याचिका खारिज, लेकिन क्या बदल सकता है Death Penalty का तरीका?

Supreme Court Hanging Death Penalty

भारत में Supreme Court Hanging Death Penalty मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने और उसकी जगह कम पीड़ादायक तरीकों को अपनाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र को मौजूदा प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा करने की संभावना खुली रखी है। याचिका में फांसी के बजाय नसों के जरिए घातक इंजेक्शन समेत दूसरे तरीकों को अपनाने की मांग की गई थी।

Supreme Court Hanging Death Penalty पर कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फांसी के मौजूदा तरीके को खत्म करने की मांग स्वीकार नहीं की। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला केंद्र सरकार को मौजूदा निष्पादन पद्धति की व्यापक समीक्षा करने से नहीं रोकता। कोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों की एक संस्था मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर सकती है और यह देख सकती है कि क्या कोई दूसरा तरीका संविधान के उस उद्देश्य को बेहतर तरीके से पूरा कर सकता है, जिसमें अनावश्यक पीड़ा को कम करने के साथ मृत्युदंड पाए व्यक्ति की गरिमा बनाए रखने की बात शामिल है। यानी फिलहाल Hanging Punishment India में जारी रहने वाली व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक नहीं लगाई है, लेकिन भविष्य में इसके तरीके की समीक्षा की गुंजाइश बनी हुई है।

Supreme Court Hanging Death Penalty

फांसी की जगह कौन-कौन से तरीके अपनाने की मांग हुई थी?

यह मामला 2017 में वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कानून से फांसी को निष्पादन के तरीके के रूप में हटाने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता ने इसके विकल्प के तौर पर कई तरीके सुझाए थे, जिनमें शामिल थे:

  • नसों के जरिए घातक इंजेक्शन
  • गोली मारकर मृत्युदंड
  • बिजली का झटका
  • गैस चैंबर

दलील दी गई थी कि फांसी की तुलना में कुछ वैकल्पिक तरीके कम पीड़ादायक हो सकते हैं। सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी दिया गया था कि मौत की सजा पाए व्यक्ति को फांसी और घातक इंजेक्शन जैसे विकल्पों में से चुनाव करने का अधिकार दिया जा सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पहले स्पष्ट किया था कि वह विधायिका को किसी विशेष तरीके को अपनाने का निर्देश नहीं दे सकता।

Death Penalty in India में फांसी को लेकर विवाद क्यों?

भारत में Death Penalty in India को लेकर बहस केवल मौत की सजा देने तक सीमित नहीं है। इसके निष्पादन का तरीका भी लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। याचिका में 187वीं विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, जिसमें मौजूदा निष्पादन पद्धति को कानून से हटाने की सिफारिश की गई थी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने 2018 में फांसी की मौजूदा व्यवस्था का बचाव किया था। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि फांसी का तरीका तेज और सरल है और इससे कैदी को अनावश्यक पीड़ा नहीं होती। सरकार ने उस समय घातक इंजेक्शन और गोली मारने जैसे वैकल्पिक तरीकों को भी फांसी से कम पीड़ादायक मानने पर सवाल उठाया था।

 

Supreme Court Death Penalty मामले में 2023 में क्या हुआ था?

यह मामला नया नहीं है। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह फांसी से मृत्युदंड देने की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने पर विचार कर सकता है। अदालत ने उस समय केंद्र से इस बात पर बेहतर आंकड़े भी मांगे थे कि फांसी की प्रक्रिया कितनी पीड़ादायक है और क्या कोई दूसरा तरीका संवैधानिक कसौटियों पर बेहतर साबित हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने साथ ही यह भी कहा था कि वह संसद को किसी खास तरीके से मृत्युदंड देने का कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकता। अब याचिका खारिज होने के बावजूद विशेषज्ञों के जरिए व्यापक समीक्षा की संभावना पूरी तरह बंद नहीं हुई है।

 

क्या भारत में Death Penalty खत्म हो रही है?

नहीं। इस फैसले का मतलब भारत में Death Penalty Abolition India नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल फांसी के मौजूदा तरीके को हटाने की मांग वाली याचिका को खारिज किया है। भारत में मृत्युदंड अभी भी कानून में मौजूद है और बेहद गंभीर अपराधों के मामलों में अदालतें इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ सिद्धांत के तहत दे सकती हैं। इसलिए इस फैसले को मृत्युदंड खत्म करने के फैसले के रूप में देखना सही नहीं होगा। मौजूदा फैसला मुख्य रूप से Death Sentence India के निष्पादन के तरीके से संबंधित है।

 

अब आगे क्या हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र के सामने मौजूदा निष्पादन पद्धति की समीक्षा का विकल्प खुला है। यदि केंद्र विशेषज्ञ संस्था के जरिए समीक्षा करता है, तो उसमें फांसी की प्रक्रिया, संभावित पीड़ा, कैदी की गरिमा और वैकल्पिक तरीकों की व्यवहारिकता जैसे पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, किसी वैकल्पिक तरीके को लागू करने के लिए केवल विशेषज्ञ समीक्षा पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए फिलहाल भारत में मृत्युदंड पाने वाले दोषियों के लिए फांसी ही कानूनी तौर पर निर्धारित निष्पादन पद्धति बनी हुई है।

 

निष्कर्ष

Supreme Court Hanging Death Penalty मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी खत्म करने की याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन बहस पूरी तरह खत्म नहीं हुई। कोर्ट ने केंद्र को विशेषज्ञों के जरिए मौजूदा निष्पादन पद्धति की व्यापक समीक्षा करने की गुंजाइश दी है। इसका मतलब यह है कि Death Penalty in India फिलहाल खत्म नहीं हुई है और न ही फांसी की मौजूदा व्यवस्था पर रोक लगी है। लेकिन आने वाले समय में यह जरूर जांचा जा सकता है कि मृत्युदंड को लागू करने का कोई दूसरा तरीका कम पीड़ादायक और अधिक मानवीय हो सकता है या नहीं।

 

FAQs

1. Supreme Court ने Hanging को लेकर क्या फैसला सुनाया?

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। हालांकि, केंद्र को मौजूदा तरीके की विशेषज्ञों के जरिए समीक्षा करने की छूट दी गई है।

 

2. Supreme Court ने Death Penalty में Hanging खत्म करने की Plea क्यों खारिज की?

कोर्ट ने मौजूदा फांसी की व्यवस्था को हटाने का आदेश देने से इनकार किया। साथ ही उसने स्पष्ट किया कि केंद्र विशेषज्ञ संस्था के जरिए इस तरीके की समीक्षा कर सकता है और वैकल्पिक तरीकों पर विचार कर सकता है।

 

3. क्या India में Death Penalty के लिए Hanging अभी भी जारी है?

हां। इस फैसले के बाद भारत में फांसी मृत्युदंड को लागू करने की मौजूदा कानूनी पद्धति बनी हुई है।

 

4. India में Death Penalty किन मामलों में दी जाती है?

मृत्युदंड बेहद गंभीर अपराधों में दिया जा सकता है और सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों तक सीमित रखा जाना चाहिए।

 

5. Death Penalty Abolition की मांग Supreme Court तक क्यों पहुंची?

याचिका में फांसी को हटाकर ऐसे विकल्पों को अपनाने की मांग की गई थी जिन्हें याचिकाकर्ता कम पीड़ादायक मानते थे, जैसे घातक इंजेक्शन, गोली मारना, बिजली का झटका या गैस चैंबर।

 

6. क्या Supreme Court भविष्य में Hanging की जगह कोई दूसरी सजा लागू कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह विधायिका को किसी विशेष तरीके को अपनाने का निर्देश नहीं दे सकता। हालांकि, केंद्र विशेषज्ञ समीक्षा के जरिए वैकल्पिक निष्पादन तरीकों पर विचार कर सकता है।

 

7. Death Penalty और Capital Punishment में क्या अंतर है?

दोनों शब्द आमतौर पर एक ही अवधारणा के लिए इस्तेमाल होते हैं। Capital Punishment का अर्थ राज्य द्वारा अपराधी को दी जाने वाली मृत्युदंड की सजा है।

 

8. Supreme Court का Death Penalty पर क्या रुख रहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों तक सीमित रखने पर जोर दिया है और इसके इस्तेमाल में न्यायिक सावधानी की आवश्यकता बताई है।