दुनियाभर में आम की मांग लगातार बढ़ रही है और अब बांग्लादेश इस अवसर का फायदा उठाने की तैयारी में जुट गया है। देश ने 2026 के लिए अपनी आम निर्यात रणनीति को और मजबूत करते हुए मलेशिया और जापान जैसे बड़े बाजारों पर फोकस बढ़ा दिया है। खास बात यह है कि जिस समय बांग्लादेश इन नए बाजारों में प्रवेश की तैयारी कर रहा है, उसी समय भारत को जापान में आम निर्यात के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है।
बांग्लादेश के कृषि विभाग और निर्यातकों को उम्मीद है कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो देश के आम जल्द ही मलेशिया और जापान के सुपरमार्केट में दिखाई दे सकते हैं। इससे न केवल कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा बल्कि किसानों और व्यापारियों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।
मलेशिया बना बांग्लादेश का प्राथमिक लक्ष्य
बांग्लादेश इस साल मलेशिया को आम निर्यात शुरू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। निर्यातकों के अनुसार, जून की शुरुआत में मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेश का दौरा कर सकता है। इस दौरान वे आम के बागानों, पैकिंग केंद्रों, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं और निर्यात व्यवस्था का निरीक्षण करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मलेशिया बांग्लादेशी आमों के लिए एक बड़ा और स्थायी बाजार बन सकता है। इसकी एक प्रमुख वजह वहां रहने वाला बड़ा बांग्लादेशी समुदाय है।
कृषि विस्तार विभाग (DAE) के अधिकारियों का कहना है कि यदि मलेशिया में रहने वाला प्रत्येक बांग्लादेशी केवल एक किलो आम भी खरीदता है, तो निर्यात का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।
इसी संभावना को देखते हुए कई कंपनियां पहले से तैयारी में जुट गई हैं। निर्यात क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि यदि निरीक्षण और मंजूरी की प्रक्रिया सफल रहती है, तो इस वर्ष ही मलेशियाई बाजार में बांग्लादेशी आम पहुंच सकते हैं।

जापान का बाजार क्यों है खास?
मलेशिया के अलावा जापान भी बांग्लादेशी आमों में दिलचस्पी दिखा रहा है। हालांकि जापान का बाजार आसान नहीं माना जाता।
जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादों के लिए बेहद सख्त नियम लागू हैं। वहां किसी भी फल के आयात से पहले उत्पादन, कीटनाशक उपयोग, भंडारण व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण और रोग-कीट प्रबंधन की विस्तृत जांच की जाती है।
बांग्लादेश और जापान के बीच पिछले कुछ समय से आम आयात की मंजूरी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर बातचीत चल रही है। जापानी अधिकारियों ने बांग्लादेश द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद कुछ अतिरिक्त वैज्ञानिक जानकारी भी मांगी है।
जापान ने विशेष रूप से 16 ऐसे संभावित कीटों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है, जिन्हें पहले की जोखिम विश्लेषण रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया था।
वैज्ञानिक तैयारियों पर जोर
जापानी मानकों को पूरा करने के लिए बांग्लादेश वैज्ञानिक स्तर पर भी तैयारी कर रहा है। इसके लिए कृषि विभाग ने अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्था CABI से तकनीकी सहयोग मांगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जापानी बाजार में प्रवेश केवल गुणवत्ता का मामला नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई चेन की विश्वसनीयता साबित करना भी जरूरी है।
निर्यातकों के अनुसार जापानी अधिकारी खेती की प्रक्रिया, मिट्टी की गुणवत्ता, कीट नियंत्रण प्रणाली और पैकिंग व्यवस्था तक की जानकारी चाहते हैं। यही वजह है कि मंजूरी प्रक्रिया अपेक्षाकृत लंबी और जटिल मानी जा रही है।
Vapour Heat Treatment क्यों है जरूरी?
जापान में आम निर्यात के लिए Vapour Heat Treatment (VHT) सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है।
यह एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें गर्म और नम हवा की मदद से आमों के अंदर मौजूद फल मक्खी (Fruit Fly) के अंडों, लार्वा और अन्य हानिकारक कीटों को खत्म किया जाता है। इस प्रक्रिया में किसी रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
बांग्लादेश ने राजधानी ढाका के गाबतली क्षेत्र में VHT सुविधा स्थापित की है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ तकनीकी मुद्दों पर चर्चा अभी जारी है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जापान को आम निर्यात की राह जल्द खुल सकती है।
बांग्लादेश के आम निर्यात में लगातार बढ़ोतरी
बांग्लादेश ने पहली बार 2016 में आम का निर्यात शुरू किया था। तब से देश धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय फल बाजार में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।
आम निर्यात के आंकड़े
- 2023 : 3,100 टन
- 2024 : 1,321 टन
- 2025 : 2,188 टन
हालांकि 2025 में निर्यात बढ़ा, लेकिन यह अभी भी 2023 के रिकॉर्ड स्तर से नीचे है। सरकार और निर्यातक अब नए बाजारों में प्रवेश कर इस अंतर को कम करना चाहते हैं।
जापान ने भारतीय आमों पर क्यों लगाया रोक?
बांग्लादेश की कोशिशों के बीच भारत को जापान में बड़ा झटका लगा है। जापानी अधिकारियों ने 2026 सीजन के लिए भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, जापानी निरीक्षण टीम ने भारत की कुछ Vapour Heat Treatment सुविधाओं में अनियमितताएं पाई थीं। उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित एक केंद्र के निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन और संक्रमण नियंत्रण से जुड़ी कमियां सामने आईं।
इसके बाद जापानी अधिकारियों ने मार्च 2026 के बाद जारी किए गए भारतीय निरीक्षण प्रमाणपत्रों को मान्यता देने से इनकार कर दिया।
जापान के सख्त नियम बने वजह
जापान पौधों और कृषि उत्पादों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहता है। विशेष रूप से फल मक्खी जैसे कीटों को लेकर उसकी नीति लगभग शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की है।
जापानी निरीक्षकों ने जिन बिंदुओं पर चिंता जताई, उनमें शामिल हैं:
- Vapour Heat Treatment प्रक्रिया
- फ्यूमिगेशन व्यवस्था
- गुणवत्ता प्रमाणन
- दस्तावेजी प्रक्रिया
- कीट नियंत्रण उपाय
इन कमियों के कारण जापानी बाजार फिलहाल भारतीय आमों के लिए बंद हो गया है।
भारतीय आमों को कितना नुकसान?
जापान में भारतीय आमों की अच्छी मांग रही है। खासकर कुछ प्रीमियम किस्में वहां काफी लोकप्रिय हैं।
प्रभावित प्रमुख किस्में
- अल्फांसो
- केसर
- लंगड़ा
- बंगनपल्ली
- चौसा
- मलिका
इन किस्मों ने वर्षों में जापानी ग्राहकों के बीच मजबूत पहचान बनाई थी। लेकिन इस साल इनकी आपूर्ति रुक गई है।
पहले से संकट में था भारतीय आम कारोबार
जापान की रोक ऐसे समय आई है जब भारतीय आम निर्यातक पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण समुद्री परिवहन महंगा हो गया है। रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों की कमी भी महसूस की जा रही है। इससे निर्यात लागत तेजी से बढ़ी है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आम निर्यात में पहले ही 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
इसके अलावा महाराष्ट्र समेत कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी और एल नीनो से जुड़े मौसमीय प्रभावों ने उत्पादन को भी प्रभावित किया है। कुछ क्षेत्रों में फसल नुकसान का अनुमान 85 से 90 प्रतिशत तक लगाया गया है।
क्या भारत फिर से जापानी बाजार में लौट सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए जापान का बाजार हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा। इसलिए भारतीय एजेंसियां और निर्यातक संगठन जापानी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं।
भारत को दोबारा बाजार हासिल करने के लिए कई कदम उठाने पड़ सकते हैं:
- VHT केंद्रों की निगरानी मजबूत करना
- गुणवत्ता जांच को बेहतर बनाना
- कीट नियंत्रण प्रणाली को सख्त बनाना
- प्रमाणन और दस्तावेजी प्रक्रिया में सुधार करना
हालांकि व्यापार जगत का मानना है कि मौजूदा सीजन में नुकसान की भरपाई करना मुश्किल होगा क्योंकि आम निर्यात का प्रमुख समय अप्रैल से जून के बीच ही होता है।
Bangladesh Mango Exports 2026: आगे क्या?
बांग्लादेश के लिए 2026 एक महत्वपूर्ण साल साबित हो सकता है। यदि मलेशिया और जापान दोनों बाजारों में प्रवेश मिल जाता है, तो देश के कृषि निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
दूसरी तरफ भारत के सामने चुनौती है कि वह जापान के सख्त मानकों को दोबारा पूरा करे और अपने सबसे मूल्यवान निर्यात बाजारों में से एक में वापसी सुनिश्चित करे।
वैश्विक आम बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन ही भविष्य में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बनने वाला है।
FAQs-
Bangladesh mango exports 2026 का मुख्य लक्ष्य क्या है?
बांग्लादेश 2026 में मलेशिया और जापान को आम निर्यात शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है।
जापान बांग्लादेशी आमों में क्यों रुचि दिखा रहा है?
जापान नए स्रोतों से उच्च गुणवत्ता वाले आम आयात करना चाहता है, लेकिन इसके लिए सख्त खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी है।
Vapour Heat Treatment (VHT) क्या है?
यह एक प्रक्रिया है जिसमें गर्म और नम हवा की मदद से आमों में मौजूद कीटों और उनके अंडों को नष्ट किया जाता है।
जापान ने भारतीय आमों पर रोक क्यों लगाई?
जापानी निरीक्षकों को भारतीय VHT सुविधाओं में कुछ संचालन संबंधी कमियां मिलीं, जिसके बाद आयात रोक दिया गया।
बांग्लादेश ने 2025 में कितना आम निर्यात किया?
बांग्लादेश ने 2025 में लगभग 2,188 टन आम का निर्यात किया।

