Bhagwant Mann Viral Video: अकाल तख्त ने CM भगवंत मान को पंथ विरोधी क्यों घोषित किया, क्या है पूरा विवाद?

Bhagwant Mann Viral Video: पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच एक बड़ा विवाद उस समय खड़ा हो गया, जब श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु विरोधी और खालसा पंथ विरोधी घोषित कर दिया। यह फैसला कथित वायरल वीडियो की जांच के बाद सुनाया गया, जिसमें भगवंत मान को सिख गुरुओं के चित्रों के सामने हाथ में शराब का गिलास लिए दिखाया गया था।

अकाल तख्त का कहना है कि फॉरेंसिक जांच में वीडियो के साथ किसी तरह की डिजिटल छेड़छाड़ या AI का इस्तेमाल नहीं मिला। वहीं भगवंत मान और आम आदमी पार्टी लगातार दावा कर रहे हैं कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं हैं और पूरे मामले का इस्तेमाल राजनीतिक बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।

यह विवाद अब सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अकाल तख्त, पंजाब सरकार, नए बेअदबी कानून और 2027 विधानसभा चुनावों तक पहुंच चुका है।

क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई, जब कनाडा में रहने वाले NRI जगमनदीप सिंह उर्फ जगमन समरा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो (Bhagwant Mann Viral Video) जारी किया। वीडियो में कथित तौर पर भगवंत मान हाथ में शराब का गिलास लिए दिखाई दिए।

विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि वीडियो में उनके पीछे सिख गुरुओं और अन्य धार्मिक हस्तियों के चित्र नजर आ रहे थे। आरोप लगाया गया कि शराब के छींटे उन चित्रों पर गिरे, जिसे सिख मर्यादा के खिलाफ और धार्मिक बेअदबी माना गया।

वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे फर्जी, AI-जनरेटेड और डीपफेक बताते हुए खारिज कर दिया। दूसरी तरफ शिरोमणि अकाली दल और कई सिख संगठनों ने इसकी जांच की मांग शुरू कर दी।

 

अकाल तख्त की एंट्री कैसे हुई?

4 जनवरी 2026 को इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सिख धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

इसके बाद 15 जनवरी 2026 को अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया। भगवंत मान नंगे पैर स्वर्ण मंदिर पहुंचे और अकाल तख्त सचिवालय में पेश हुए।

Image Source: TOI

 

मुख्यमंत्री ने वहां स्पष्ट कहा कि वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उन्हें राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल कर डीपफेक वीडियो बनाया गया है।

इसके बाद पांच सिंह साहिबानों ने मुख्यमंत्री को निर्देश दिया कि वे जांच के लिए दो प्रतिष्ठित फॉरेंसिक लैब के नाम सुझाएं। अकाल तख्त के अनुसार इस संबंध में 27 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

 

फॉरेंसिक जांच में क्या सामने आया?

सरकारी स्तर पर सहयोग नहीं मिलने के बाद अकाल तख्त सचिवालय ने खुद दो मान्यता प्राप्त फॉरेंसिक लैब से वीडियो की जांच करवाई।

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने बताया कि 27 मई और 13 जून को दोनों लैब की रिपोर्ट प्राप्त हुईं।

रिपोर्ट के अनुसार वीडियो में किसी प्रकार की डिजिटल एडिटिंग, मॉर्फिंग या AI तकनीक के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला। रिपोर्ट में वीडियो को प्राकृतिक और वास्तविक बताया गया।

इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु विरोधी और खालसा पंथ विरोधी घोषित करने का फैसला सुनाया।

 

अकाल तख्त ने क्या आदेश जारी किया?

अकाल तख्त के जत्थेदार ने अपने संबोधन में कहा कि पूरा खालसा पंथ और गुरु नामलेवा समुदाय अब मुख्यमंत्री भगवंत मान से दूरी बनाए।

इसके अलावा आम आदमी पार्टी के उन सभी सिख विधायकों को भी तलब किया गया है जिन्होंने पंजाब सरकार के नए बेअदबी कानून का समर्थन किया था।

अकाल तख्त ने 29 जून को संबंधित विधायकों और मंत्रियों को पेश होने का निर्देश दिया है। वहीं गैर-सिख मंत्रियों से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

 

अकाल तख्त साहिब क्या है?

अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1606 में गुरु हरगोबिंद साहिब ने की थी।

जहां हरमंदिर साहिब सिख धर्म की आध्यात्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है, वहीं अकाल तख्त धार्मिक, सामाजिक और पंथक मामलों में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था मानी जाती है।

सिख समुदाय से जुड़े बड़े विवादों, धार्मिक अनुशासन और पंथक मामलों में अंतिम निर्णय यहीं से जारी किए जाते हैं।

 

अकाल तख्त के फैसले का कितना असर होता है?

अकाल तख्त के पास कोई कानूनी या सरकारी शक्ति नहीं होती, लेकिन धार्मिक स्तर पर उसके फैसलों का बड़ा महत्व माना जाता है।

यदि किसी व्यक्ति को सिख मर्यादा का उल्लंघन करने वाला माना जाता है, तो अकाल तख्त उसे तलब कर सकता है, स्पष्टीकरण मांग सकता है और धार्मिक दंड भी सुना सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अकाल तख्त के आदेशों का पालन नहीं करता या माफी नहीं मांगता, तो सामाजिक और धार्मिक स्तर पर उससे दूरी बनाई जा सकती है।

 

विवाद में बेअदबी कानून की भूमिका

इस पूरे विवाद का दूसरा बड़ा पहलू पंजाब सरकार द्वारा पारित नया बेअदबी कानून है। 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा ने ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ पास किया था।

इस कानून के तहत गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, कुरान और बाइबिल जैसे पवित्र ग्रंथों की बेअदबी करने पर कम से कम 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। साथ ही 5 लाख से 25 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव भी है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पंजाब के इतिहास के सबसे सख्त कानूनों में से एक बताया था।

हालांकि अकाल तख्त ने इस कानून का विरोध किया। अकाल तख्त का कहना है कि सरकार को सिख धार्मिक संस्थाओं और गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया।

 

भगवंत मान पर पहले भी लग चुके हैं शराब से जुड़े आरोप

भगवंत मान के राजनीतिक करियर में शराब को लेकर विवाद पहले भी कई बार सामने आए हैं।

2015 में जब वे लोकसभा सांसद थे, तब आम आदमी पार्टी के ही तत्कालीन निलंबित सांसद हरिंदर सिंह खालसा ने लोकसभा स्पीकर से शिकायत की थी कि उनके पास बैठने पर शराब की गंध आती है।

जनवरी 2019 में बरनाला की एक रैली में भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से अपनी मां की कसम खाकर शराब छोड़ने का दावा किया था।

सितंबर 2022 में भी विपक्ष ने आरोप लगाया था कि जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर उन्हें कथित रूप से नशे की हालत में विमान से उतारा गया था। हालांकि इन आरोपों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

हाल ही में उनके अस्पताल में भर्ती होने पर भी विपक्ष ने शराब से जुड़ी बीमारी के आरोप लगाए थे, लेकिन अस्पताल ने स्पष्ट किया था कि उन्हें लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण हुआ था।

 

आम आदमी पार्टी का बचाव

आम आदमी पार्टी ने अकाल तख्त के फैसले को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी नेता बलतेज पन्नू का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल यह बताती है कि वीडियो AI से नहीं बना है। रिपोर्ट यह साबित नहीं करती कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में भगवंत मान ही हैं।

AAP ने यह भी सवाल उठाया कि रिपोर्ट में वीडियो की लोकेशन, व्यक्ति की पहचान और अन्य तकनीकी पहलुओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।

पार्टी ने अकाल तख्त के जत्थेदार पर शिरोमणि अकाली दल के प्रभाव में काम करने का आरोप भी लगाया है।

 

भगवंत मान ने क्या कहा?

अकाल तख्त के फैसले के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिर दोहराया कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को वीडियो में दिखाया गया है, उसकी कद-काठी और शारीरिक बनावट उनसे मेल नहीं खाती।

मान ने यह भी आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक विरोधी उनके कामकाज से परेशान होकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के समर्थन में बयान जारी किया।

 

राजनीतिक असर कितना बड़ा हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि सिख समुदाय में अकाल तख्त के फैसलों को गंभीरता से लिया जाता है, इसलिए इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

सिख मामलों के जानकार खुशजीत सिंह के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को पंथ विरोधी घोषित किया जाता है और वह धार्मिक प्रक्रिया का पालन नहीं करता, तो उसके प्रति सामाजिक दूरी बढ़ सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भूपिंदर सिंह का मानना है कि इससे आम आदमी पार्टी को भी राजनीतिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि सिख समुदाय धार्मिक मुद्दों को गंभीरता से लेता है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि चुनावी असर पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में भगवंत मान और अकाल तख्त के बीच यह विवाद किस दिशा में जाता है।

 

निष्कर्ष

विवाद (Bhagwant Mann Viral Video) अब केवल एक वायरल वीडियो का मामला नहीं रह गया है। इसमें अकाल तख्त की धार्मिक साख, पंजाब सरकार का नया बेअदबी कानून, आम आदमी पार्टी और अकाली दल के बीच राजनीतिक टकराव, तथा 2027 विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि भी जुड़ चुकी है।

एक तरफ अकाल तख्त फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर वीडियो को वास्तविक मान रहा है, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार कह रहे हैं कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं। ऐसे में यह विवाद आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच संबंधों पर बड़ा असर डाल सकता है।

 

FAQs

1. Why is Bhagwant Mann’s video going viral?

यह वीडियो इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान सिख गुरुओं के चित्रों के सामने हाथ में शराब का गिलास लिए दिखाई दे रहे हैं। इसी वीडियो को लेकर धार्मिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है।

 

2. What happened at Sri Akal Takht Sahib?

अकाल तख्त साहिब ने फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर भगवंत मान को गुरु विरोधी और खालसा पंथ विरोधी घोषित किया तथा सिख समुदाय से उनसे दूरी बनाने की अपील की।

 

3. Has Bhagwant Mann responded to the controversy?

हां। भगवंत मान ने कहा है कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं और उन्हें बदनाम करने के लिए यह विवाद खड़ा किया गया है।

 

4. What is the significance of Sri Akal Takht Sahib?

अकाल तख्त सिख धर्म की सर्वोच्च धार्मिक संस्थाओं में से एक है। यह धार्मिक, सामाजिक और पंथक मामलों में महत्वपूर्ण फैसले लेने वाली संस्था मानी जाती है।

 

5. What are the political reactions to the incident?

आम आदमी पार्टी ने फैसले को राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि विपक्षी दल और कई सिख संगठन अकाल तख्त की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं। यह मुद्दा अब पंजाब की राजनीति का बड़ा विषय बन चुका है।