CBI डायरेक्टर सिलेक्शन विवाद: 69 उम्मीदवारों की अधूरी जानकारी पर राहुल गांधी का बड़ा प्रहार, चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation यानी CBI के नए डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर अब बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी असहमति दर्ज की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उम्मीदवारों से जुड़ी जरूरी जानकारी साझा नहीं की और पूरी प्रक्रिया को केवल औपचारिकता बनाकर रख दिया गया।

यह मामला मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सामने आया। बैठक में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता के बीच नए CBI डायरेक्टर के नाम पर चर्चा हुई। लेकिन बैठक खत्म होने के कुछ ही देर बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पत्र जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी।

अब सवाल सिर्फ नए CBI प्रमुख की नियुक्ति का नहीं रह गया है, बल्कि बहस इस बात पर भी शुरू हो गई है कि क्या देश की प्रमुख जांच एजेंसियों की नियुक्तियों में पारदर्शिता पर्याप्त है या नहीं।

 

पीएम आवास पर हुई अहम बैठक

नए CBI डायरेक्टर के चयन को लेकर मंगलवार शाम प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहे।

बैठक करीब एक घंटे तक चली। राहुल गांधी शाम करीब 7:15 बजे बैठक में पहुंचे और लगभग 8:40 बजे बाहर निकले। इसके तुरंत बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा किया, जिसमें चयन प्रक्रिया को लेकर कई आपत्तियां दर्ज की गईं।

 

राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए?

राहुल गांधी ने कहा कि CBI डायरेक्टर चुनने की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रही। उनके मुताबिक चयन समिति को 69 अधिकारियों की सूची दी गई, लेकिन उम्मीदवारों से जुड़ी जरूरी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गईं।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि उम्मीदवारों की “सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट” और “360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट” मांगी गई थीं, लेकिन उन्हें यह जानकारी देने से मना कर दिया गया। राहुल का कहना है कि बिना पर्याप्त जानकारी के किसी उम्मीदवार पर राय बनाना संभव नहीं था।

उन्होंने आरोप लगाया कि जानकारी रोककर पूरी प्रक्रिया को पहले से तय फैसले जैसा बना दिया गया। राहुल ने यह भी कहा कि अगर विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल किया गया है, तो उसकी भूमिका सिर्फ औपचारिक नहीं होनी चाहिए।

 

CBI को लेकर सरकार पर क्या बोले राहुल?

राहुल गांधी ने अपने पत्र में सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में CBI जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों के खिलाफ किया गया है।

उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चयन प्रक्रिया में विपक्ष की भूमिका बेहद जरूरी होती है। लेकिन इस प्रक्रिया में उनकी आपत्तियों और सुझावों को नजरअंदाज किया गया।

राहुल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इससे पहले मई और अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने के सुझाव दिए थे, लेकिन उन पत्रों का जवाब नहीं मिला।

 

CBI डायरेक्टर कैसे चुना जाता है?

भारत में CBI डायरेक्टर की नियुक्ति एक उच्चस्तरीय समिति करती है। इस समिति में तीन सदस्य शामिल होते हैं –

  • प्रधानमंत्री
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश
  • लोकसभा में विपक्ष के नेता

तीनों की बैठक में नामों पर चर्चा होती है और फिर अंतिम चयन किया जाता है। इसके बाद गृह मंत्रालय की प्रक्रिया पूरी होने पर कार्मिक विभाग यानी DOPT नियुक्ति का आदेश जारी करता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह माना जाता है कि नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार, न्यायपालिका और विपक्ष तीनों की भागीदारी बनी रहे।

CBI Director Selection Controversy

डायरेक्टर का कार्यकाल कितना होता है?

CBI डायरेक्टर का न्यूनतम कार्यकाल दो साल का तय किया गया है। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सेंट्रल विजिलेंस कमीशन एक्ट के तहत लागू की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि किसी भी अधिकारी को CBI प्रमुख तभी बनाया जा सकता है जब उसके रिटायरमेंट में कम से कम छह महीने का समय बचा हो। अदालत का मानना था कि छोटी अवधि वाले कार्यकाल से एजेंसी की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि विशेष परिस्थितियों में सरकार कार्यकाल को एक-एक साल बढ़ाकर कुल पांच साल तक कर सकती है।

 

मौजूदा CBI डायरेक्टर का कार्यकाल खत्म होने वाला

वर्तमान CBI प्रमुख Praveen Sood का कार्यकाल 24 मई को समाप्त होने जा रहा है। उन्होंने 25 मई 2023 को पद संभाला था। पिछले वर्ष उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था।

प्रवीण सूद 1986 बैच के IPS अधिकारी हैं और कर्नाटक कैडर से आते हैं। वे मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हुई थी।

उन्होंने Indian Institute of Technology Delhi से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech किया और बाद में Indian Institute of Management Bangalore से पब्लिक पुलिस मैनेजमेंट में MBA भी किया।

22 साल की उम्र में IPS बनने वाले प्रवीण सूद ने कर्नाटक पुलिस में कई अहम पदों पर काम किया। वे बेल्लारी और रायचूर के एसपी रहे, जबकि बेंगलुरु और मैसूरु में DCP की जिम्मेदारी भी संभाली। बाद में वे कर्नाटक के DGP भी बने।

उन्हें पुलिस सेवा के दौरान कई सम्मान भी मिल चुके हैं, जिनमें मुख्यमंत्री गोल्ड मेडल और राष्ट्रपति पुलिस पदक शामिल हैं।

 

नए CBI डायरेक्टर की दौड़ में कौन-कौन?

नए CBI प्रमुख की नियुक्ति को लेकर तीन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बताए जा रहे हैं।

 

  1. Parag Jain

पराग जैन 1989 बैच के पंजाब कैडर के IPS अधिकारी हैं। वर्तमान में वे RAW प्रमुख के रूप में काम कर रहे हैं। उन्हें खुफिया और सुरक्षा मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।

उन्होंने एविएशन रिसर्च सेंटर का नेतृत्व भी किया है। सुरक्षा मामलों और रणनीतिक ऑपरेशंस में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती रही है।

 

  1. Shatrujeet Kapoor

शत्रुजीत कपूर 1990 बैच के हरियाणा कैडर के IPS अधिकारी हैं। वे फिलहाल ITBP के महानिदेशक हैं। पंजाब के फगवाड़ा से संबंध रखने वाले कपूर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि से आते हैं।

उन्होंने हरियाणा पुलिस में कई अहम पद संभाले हैं और फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं। अगस्त 2023 में उन्हें हरियाणा का DGP बनाया गया था।

 

  1. G P Singh

जीपी सिंह 1994 बैच के IPS अधिकारी हैं और छत्तीसगढ़ कैडर से आते हैं। उन्हें नक्सल विरोधी अभियानों और इंटेलिजेंस नेटवर्किंग का अच्छा अनुभव माना जाता है।

वे छत्तीसगढ़ पुलिस में IG, ADG और EOW/ACB प्रमुख जैसे पदों पर रह चुके हैं। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ का DGP बनाया गया और फिलहाल वे CRPF के महानिदेशक पद पर तैनात हैं।

 

विपक्ष सवाल क्यों उठा रहा है?

विपक्ष का कहना है कि CBI जैसी संस्था लोकतंत्र में बेहद अहम भूमिका निभाती है। इसलिए उसके प्रमुख की नियुक्ति पूरी तरह निष्पक्ष और भरोसेमंद दिखनी चाहिए।

राहुल गांधी की आपत्ति सिर्फ किसी एक नाम को लेकर नहीं है, बल्कि प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि अगर चयन समिति के सदस्यों को पूरी जानकारी ही नहीं दी जाएगी, तो पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?

दूसरी तरफ सरकार की ओर से अब तक राहुल के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

CBI की स्वतंत्रता पर बहस फिर तेज

CBI को अक्सर देश की सबसे ताकतवर जांच एजेंसी कहा जाता है। एजेंसी भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध और बड़े आपराधिक मामलों की जांच करती है। लेकिन पिछले कई वर्षों में अलग-अलग राजनीतिक दल समय-समय पर इस एजेंसी के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

कई विपक्षी दल आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। वहीं सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि एजेंसियां कानून के अनुसार काम करती हैं।