Champat Rai SIT Clean Chit: अयोध्या के राम मंदिर में दान की रकम में कथित चोरी और गड़बड़ी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की पहली जांच में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय को राहत मिली है। SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय का नाम आरोपियों के तौर पर नहीं है। पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का नाम भी रिपोर्ट में नहीं है। उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने SIT की रिपोर्ट की जांच के बाद इसे आगे की कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि राम मंदिर दान चोरी का पूरा मामला खत्म हो गया है। इस मामले में एक दूसरी SIT भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कर रही है। इसलिए चंपत राय को मिली यह क्लीन चिट पहली SIT की रिपोर्ट के आधार पर है, जबकि पूरे मामले की न्यायिक निगरानी वाली जांच अभी जारी है।
चंपत राय पर क्या आरोप लगे थे?
राम मंदिर में दान की रकम और दूसरी कीमती वस्तुओं की गिनती के दौरान कथित चोरी का मामला 7 जून 2026 को सामने आया था। समाजवादी पार्टी नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडे ने आरोप लगाया था कि मंदिर में आने वाले दान में करीब 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है।
विवाद बढ़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT गठित की। इसकी अगुवाई लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत कर रहे थे। इसमें लखनऊ रेंज के IG किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार भी शामिल थे।
SIT ने 15 से 20 जून के बीच अयोध्या में शुरुआती जांच की। इसमें दान पेटियों से लेकर कैश की गिनती, रकम रखने, बैंक तक पहुंचाने, अकाउंटिंग, CCTV और सुरक्षा व्यवस्था तक पूरी प्रक्रिया की जांच की गई।
CCTV में 70 बार कैश छिपाते दिखे कर्मचारी
SIT की शुरुआती जांच में मंदिर के कैश काउंटिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आई थीं। उपलब्ध करीब 45 दिनों की CCTV रिकॉर्डिंग की जांच में 70 ऐसे मामले मिले, जिनमें काउंटिंग से जुड़े कर्मचारी नोटों की गड्डियां या खुले पैसे अपने कपड़ों, जेब और जूतों में छिपाते हुए दिखाई दिए।
जांच में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच तय Standard Operating Procedure यानी SOP का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा था। काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले कर्मचारियों की पर्याप्त तलाशी नहीं होती थी और सुरक्षा व्यवस्था में दूसरी कमियां भी थीं।
SIT की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 25 जून को FIR दर्ज की। इसमें आठ लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। ये सभी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और जेल में हैं।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने 27 जून को इस्तीफा दिया था
दान चोरी का मामला सामने आने और पुलिस केस दर्ज होने के बाद चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने 27 जून को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी।
दोनों से SIT ने पूछताछ भी की थी। 3 जुलाई को जांच टीम ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और मंदिर के प्रशासक गोपाल राव से करीब सात घंटे तक अलग-अलग पूछताछ की थी।
उस समय चंपत राय ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे व्यक्तिगत आरोपों को निराधार बताया था और कहा था कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह पूरे मामले पर बिंदुवार जवाब देंगे।

SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय का नाम नहीं
अब सामने आई अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को दान चोरी के मामले में आरोपी नहीं ठहराया गया है। रिपोर्ट में दोनों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी नहीं की गई है। इसी आधार पर दोनों को SIT की जांच में राहत मिली है।
यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIT की शुरुआती जांच में ट्रस्ट की दान प्रबंधन व्यवस्था में प्रशासनिक और निगरानी संबंधी कमियां सामने आई थीं। बाद की रिपोर्ट में भी सिस्टम में सुधार की जरूरत बताई गई है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दान की रकम सीधे चोरी करने की जिम्मेदारी निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित पाई गई।
इसलिए Champat Rai SIT Clean Chit का मतलब यह है कि इस SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय को कथित दान चोरी के लिए दोषी या आरोपी नहीं माना गया है। यह किसी अदालत का अंतिम फैसला नहीं है।
दूसरी SIT की जांच अभी बाकी है
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चंपत राय को मिली राहत के बावजूद जांच पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक दूसरी SIT इस मामले की जांच कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस जांच में SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने पर जोर दिया है। इसलिए आगे की कार्रवाई दूसरी SIT की जांच और उसके निष्कर्षों पर भी निर्भर करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी SIT क्यों बनाई?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। इनमें जांच CBI को सौंपने की मांग के साथ-साथ मंदिर में आने वाले दान के प्रबंधन की व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग भी की गई थी।
मामले में पहले से उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर एक SIT जांच कर रही थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सामने मामला आने के बाद कोर्ट ने जांच की निगरानी अपने हाथ में रखी और दूसरी SIT के जरिए जांच को आगे बढ़ाने का फैसला किया। नई SIT को अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में समय-समय पर दाखिल करनी है। यानी अब इस जांच की प्रगति की निगरानी सीधे सुप्रीम कोर्ट कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि चोरी और दूसरी आपराधिक गतिविधियों की जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका ज्यादा प्रभावी होती है। इसी वजह से नई SIT में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया और जांच का जिम्मा सीधे पुलिस महकमे के अधिकारियों को दिया गया।
इसका मतलब यह है कि पहली SIT की जांच राज्य सरकार के स्तर पर हुई, जबकि दूसरी SIT की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है। इसलिए पहली SIT की रिपोर्ट में चंपत राय को राहत मिलने के बावजूद पूरे मामले का अंतिम निष्कर्ष दूसरी SIT की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
राम मंदिर ट्रस्ट में कितने पैसे का दान आया?
राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े कार्यों के लिए ट्रस्ट को बड़ी मात्रा में दान प्राप्त हुआ है। ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच 82.78 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ था।
इसी बड़े स्तर पर आने वाले दान और उसकी गिनती व प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर सुरक्षा और पारदर्शिता का सवाल इस मामले में महत्वपूर्ण बन गया है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन 2019 के सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर फैसले के बाद केंद्र सरकार ने किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2020 में संसद में ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 12 सदस्यों की नियुक्ति सरकार की ओर से की गई थी और बाकी तीन सदस्यों का चयन ट्रस्ट की पहली बैठक में हुआ था।
चंपत राय को राहत, लेकिन राम मंदिर दान चोरी की जांच अभी खत्म नहीं
राम मंदिर Donation Theft Case में SIT की अंतिम रिपोर्ट से पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा को बड़ी राहत मिली है। रिपोर्ट में दोनों का नाम कथित चोरी के आरोपियों के तौर पर नहीं है। दूसरी तरफ जांच में काउंटिंग स्टाफ की ओर से कैश छिपाने के कई मामले और दान प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आई हैं।
इस मामले में आठ लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और एक दूसरी SIT सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कर रही है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे Donation Case का अंतिम निष्कर्ष सामने आ चुका है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय के खिलाफ दान चोरी का आरोप साबित नहीं हुआ है।
FAQs
1. Champat Rai Clean Chit Ram Temple Donation Case क्या है?
राम मंदिर में कथित दान चोरी की जांच कर रही SIT की अंतिम रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय का नाम आरोपी के तौर पर नहीं है। रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का नाम भी नहीं है।
2. चंपत राय को Ram Temple Donation Case में क्लीन चिट क्यों मिली?
SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय को कथित दान चोरी से जोड़ने वाला निष्कर्ष नहीं दिया गया। इसलिए रिपोर्ट में उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है।
3. Ram Temple Donation Theft Case में क्या आरोप लगाए गए थे?
मंदिर में भक्तों से मिले कैश और दूसरी कीमती वस्तुओं की गिनती के दौरान कथित चोरी और हेराफेरी के आरोप लगे थे। SIT की शुरुआती जांच में काउंटिंग स्टाफ द्वारा पैसे छिपाने के कई मामले CCTV में सामने आए थे।
4. चंपत राय का Ram Temple Trust में क्या पद था?
चंपत राय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे। उन्होंने 27 जून 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
5. चंपत राय के खिलाफ SIT Investigation क्यों शुरू हुई थी?
दान चोरी की जांच के दौरान ट्रस्ट की दान प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी पूछताछ की गई थी। इसी क्रम में SIT ने चंपत राय से भी पूछताछ की थी। हालांकि अंतिम रिपोर्ट में उनका नाम आरोपी के तौर पर नहीं रखा गया।
6. SIT Report में Champat Rai के बारे में क्या कहा गया?
अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय का नाम कथित दान चोरी के आरोपी के रूप में नहीं है और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है।
7. Ram Mandir Donation Case में और किन लोगों को राहत मिली?
पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का नाम भी अंतिम SIT रिपोर्ट में आरोपी के तौर पर नहीं है। हालांकि दूसरी SIT की जांच अभी जारी है।
8. Ram Temple Trust Investigation किस एजेंसी ने की?
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित पहली SIT ने मामले की जांच की। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दूसरी SIT भी मामले की जांच कर रही है।

