फ्रांस में शुरू होने जा रहे जी7 शिखर सम्मेलन से पहले स्विट्जरलैंड का जिनेवा बड़े विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गया। रविवार को हुए जी7 शिखर सम्मेलन विरोध (G7 Summit Protest) में करीब 20 हजार लोग शामिल हुए। शुरुआत में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में कुछ जगहों पर हालात बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, कई संपत्तियों को नुकसान पहुंचा और पुलिस को आंसू गैस तथा पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा।

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इस प्रदर्शन में शामिल लोग जलवायु परिवर्तन, मानवाधिकार, वैश्विक असमानता, युद्ध और आर्थिक नीतियों जैसे मुद्दों को लेकर अपनी नाराजगी जता रहे थे। हालांकि ज्यादातर लोग शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर रहे थे, लेकिन कुछ समूहों की वजह से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
आखिर क्यों हो रहा था G7 Summit Protest?
जी7 दुनिया की सात बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। हर साल इन देशों के नेता वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए एक साथ आते हैं।

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विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि दुनिया के बड़े नेता जो फैसले लेते हैं, उनका असर आम लोगों पर पड़ता है। इसलिए जलवायु संकट, युद्ध, मानवाधिकार और आर्थिक नीतियों जैसे मुद्दों पर लोगों की आवाज भी सुनी जानी चाहिए।
कई प्रदर्शनकारी फिलिस्तीन के समर्थन में झंडे और बैनर लेकर पहुंचे थे। वहीं कुछ लोग अमेरिकी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर भी विरोध जता रहे थे।
शांतिपूर्ण मार्च के बीच कैसे बिगड़े हालात?
प्रदर्शन की शुरुआत शांत माहौल में हुई थी। हजारों लोग तय रूट पर मार्च कर रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे भीड़ शहर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंची, कुछ समूह मुख्य मार्च से अलग हो गए।

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जिनेवा पुलिस के अनुसार, भीड़ में करीब 600 ऐसे लोग भी शामिल थे जो काले कपड़ों और नकाब में थे। पुलिस ने इन्हें “ब्लैक ब्लॉक” समूह से जुड़ा बताया। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा की कई घटनाओं में इन्हीं लोगों की भूमिका रही।

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इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने शुरू कर दिए और कई जगह तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने भीड़ को हटने की चेतावनी दी, लेकिन तनाव बढ़ता गया।
टेस्ला कार में आग, बैंक की खिड़कियां भी तोड़ी गईं
हिंसा के दौरान एक टेस्ला कार को आग लगा दी गई। यह घटना शहर के एक प्रमुख बस स्टॉप के पास हुई। आग लगने के बाद दमकलकर्मियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

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इसके अलावा एक बैंक की खिड़कियां भी तोड़ दी गईं। प्रदर्शनकारियों ने बैंक की सुरक्षा के लिए लगाए गए लकड़ी के अवरोधकों को हटाकर नुकसान पहुंचाया। कुछ अन्य इमारतों को भी क्षति पहुंचने की खबर है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोगों ने सड़क से पत्थर और डामर के टुकड़े निकालकर पुलिस की ओर फेंके। वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों ने फ्लेयर भी दागे, जिससे हालात और बिगड़ गए।
पुलिस ने कैसे संभाली स्थिति?
जब झड़पें बढ़ने लगीं तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटने का आदेश दिया। लेकिन कई जगह टकराव जारी रहा। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछारें चलाईं।

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सुरक्षा एजेंसियों ने शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया। अधिकारियों का कहना है कि उनका मकसद शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा करना और हिंसा फैलाने वालों को रोकना था।

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G7 बैठक से पहले सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?
जी7 सम्मेलन सोमवार से फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में शुरू हो रहा है, जो जिनेवा झील के पास स्थित है। सम्मेलन को देखते हुए पहले से ही सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।
फ्रांस ने बैठक की सुरक्षा के लिए 13 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और सुरक्षाबल तैनात किए हैं। इसके अलावा सैकड़ों सीमा सुरक्षा अधिकारी भी सक्रिय हैं। स्विट्जरलैंड और फ्रांस के बीच कई सीमा मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
जिनेवा के कई दुकानदारों ने भी एहतियात के तौर पर अपनी दुकानों और इमारतों की खिड़कियों को लकड़ी के पैनलों से ढक दिया था। उन्हें आशंका थी कि कहीं 2003 की तरह फिर से बड़े पैमाने पर नुकसान न हो।
G7 Summit में किन मुद्दों पर रहेगी दुनिया की नजर?
जी7 समूह में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। यह दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का मंच माना जाता है, जहां वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है।
इस बार की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, ईरान से जुड़े हालात और वैश्विक आर्थिक चुनौतियां अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। भारत, यूक्रेन और केन्या समेत कई देशों के नेताओं के भी सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन में लिए गए फैसलों का असर आने वाले महीनों में वैश्विक राजनीति और आर्थिक नीतियों पर दिखाई दे सकता है।
विरोध प्रदर्शन का क्या संदेश है?
हालांकि प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं, लेकिन बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की। उनका कहना था कि दुनिया के बड़े नेताओं को केवल सरकारों की नहीं, बल्कि आम लोगों की चिंताओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
यही वजह है कि जी7 बैठक शुरू होने से पहले जिनेवा की सड़कों पर हजारों लोग अपनी आवाज बुलंद करने के लिए उतरे।
G7 Summit क्या है?
G7 Summit दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की वार्षिक बैठक है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल होते हैं। इस समूह को G7 यानी “ग्रुप ऑफ सेवन” कहा जाता है। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, युद्ध, अंतरराष्ट्रीय संबंध और अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

