IAF 60 Transport Aircraft Tender: ₹1 लाख करोड़ की डील, Tata-Mahindra-HAL में किसकी बाजी?

IAF 60 Transport Aircraft Tender

भारतीय वायुसेना के पुराने ट्रांसपोर्ट बेड़े को बदलने की तैयारी तेज हो गई है। IAF 60 Transport Aircraft Tender के तहत रक्षा मंत्रालय ने करीब Rs.1 लाख करोड़ की अनुमानित लागत से 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए वैश्विक RFP जारी किया है। इस बड़ी डिफेंस डील में Tata, Mahindra और HAL जैसी भारतीय कंपनियां विदेशी विमान निर्माताओं के साथ मिलकर दौड़ में हैं। नए विमान भारतीय वायुसेना की लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील इलाकों में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही में अहम भूमिका निभाएंगे।

पुराने An-32 बेड़े की जगह लेगा नया विमान

भारतीय वायुसेना लंबे समय से सोवियत दौर के Antonov An-32 परिवहन विमानों का इस्तेमाल करती रही है। अब इन पुराने विमानों को धीरे-धीरे हटाकर आधुनिक मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल करने की योजना है। प्रस्तावित विमान 18 से 30 टन तक का पेलोड ले जाने में सक्षम होना चाहिए। इसका उद्देश्य हल्के C-295 और भारी C-17 तथा Il-76 जैसे विमानों के बीच की जरूरत को पूरा करना है। नए विमान को ऐसे इलाकों में भी संचालन के योग्य बनाया जाएगा, जहां ऊंचाई अधिक हो और रनवे छोटे या पूरी तरह तैयार न हों। इनमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के Advanced Landing Grounds भी शामिल हैं।

IAF 60 Transport Aircraft Tender में कौन-कौन दौड़ में?

इस बड़े प्रोजेक्ट में भारतीय कंपनियों को प्रमुख भूमिका दी गई है। Tata, Mahindra और Hindustan Aeronautics Limited (HAL) विदेशी विमान निर्माताओं के साथ साझेदारी कर रहे हैं।

  • Mahindra Defence + Embraer: C-390 Millennium
  • Tata Advanced Systems + Lockheed Martin: C-130J Super Hercules
  • HAL: विमान के निर्माण और एकीकरण में भूमिका की संभावना
  • Airbus: A400M संभावित दावेदार

C-130J करीब 19 टन पेलोड ले जा सकता है, जबकि C-390 की क्षमता लगभग 26 टन है। Airbus A400M की करीब 37 टन पेलोड क्षमता है, जो IAF की तय 18-30 टन श्रेणी से अधिक है।

60 विमानों में कितना बनेगा भारत में?

इस परियोजना का एक बड़ा लक्ष्य भारत में रक्षा निर्माण को बढ़ावा देना है। प्रस्ताव के अनुसार करीब 20% विमान सीधे तैयार स्थिति में भारत को मिल सकते हैं, जबकि बाकी विमानों का निर्माण देश में किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर बनने वाले विमानों में 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री रखने का लक्ष्य है। विदेशी कंपनियां भारतीय साझेदारों को तकनीक और जरूरी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएंगी। इसके अलावा भारत में Final Assembly और Maintenance, Repair and Overhaul (MRO) सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे विमान बनने के बाद उनके रखरखाव और लंबे समय तक संचालन के लिए भी देश की क्षमता बढ़ेगी।

 

नए Transport Aircraft से क्या-क्या कर सकेगी IAF?

प्रस्तावित विमान सिर्फ सैनिकों और सामान की ढुलाई तक सीमित नहीं होंगे। इनका इस्तेमाल कई रणनीतिक और मानवीय अभियानों में किया जा सकता है।

इन विमानों से संभावित तौर पर:

  • सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही
  • हल्के बख्तरबंद वाहनों का परिवहन
  • 25 टन के Zorawar Light Tank की ढुलाई
  • M777 Ultra-Light Howitzer का परिवहन
  • BrahMos missile canisters की आवाजाही
  • Akash air-defence launcher units की ढुलाई
  • मानवीय सहायता और राहत अभियान
  • कठिन इलाकों में लॉजिस्टिक सपोर्ट

जैसे मिशनों को समर्थन मिल सकता है। विमान को भविष्य में aerial refuelling tanker के रूप में इस्तेमाल करने की क्षमता भी रखी जा सकती है। यानी जरूरत पड़ने पर यही प्लेटफॉर्म हवा में दूसरे विमानों में ईंधन भरने का काम भी कर सकता है।

 

भारत की Defence Manufacturing को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

IAF 60 Transport Aircraft Tender सिर्फ विमान खरीदने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में विदेशी Original Equipment Manufacturers (OEMs) और भारतीय कंपनियों की साझेदारी से देश में नई तकनीक, उत्पादन क्षमता और MRO इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है। यह पहल सरकार के Make in India और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के लक्ष्य के अनुरूप भी है। स्थानीय निर्माण बढ़ने से भविष्य में भारत की सैन्य जरूरतों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

 

निष्कर्ष

करीब Rs.1 लाख करोड़ का IAF 60 Transport Aircraft Tender भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट बेड़े के आधुनिकीकरण के साथ-साथ देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। Tata, Mahindra और HAL जैसी भारतीय कंपनियों की भागीदारी से यह डील भारत में विमान निर्माण, तकनीक हस्तांतरण और MRO क्षमता को नई दिशा दे सकती है। खासतौर पर लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेज सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिए इन विमानों की भूमिका बेहद अहम हो सकती है।

 

FAQ

  1. भारत ने 60 Transport Aircraft के लिए Rs.1 लाख करोड़ का Tender क्यों जारी किया है?
    IAF के पुराने An-32 बेड़े को बदलने और सैनिकों व सैन्य उपकरणों की रणनीतिक आवाजाही के लिए आधुनिक मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल करने के लिए यह टेंडर जारी किया गया है।
  2. IAF को नए Transport Aircraft की जरूरत क्यों पड़ी?
    पुराने An-32 विमानों को धीरे-धीरे बदलने के साथ IAF को ऐसे विमानों की जरूरत है जो अधिक आधुनिक हों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी काम कर सकें।
  3. इस Defence Tender में कौन-कौन सी कंपनियां शामिल हैं?
    Tata Advanced Systems, Mahindra Defence और HAL प्रमुख भारतीय कंपनियां हैं। इनके साथ Lockheed Martin और Embraer जैसी विदेशी कंपनियां साझेदारी कर रही हैं।
  4. नए Transport Aircraft का इस्तेमाल कहां किया जाएगा?
    इनका इस्तेमाल लद्दाख, पूर्वोत्तर और अन्य रणनीतिक इलाकों में सैनिकों, हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही के साथ राहत एवं मानवीय अभियानों में भी किया जा सकता है।
  5. क्या इन विमानों का निर्माण भारत में होगा?
    हां। प्रस्ताव के अनुसार अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में किया जाना है और स्थानीय रूप से निर्मित विमानों में 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री रखने का लक्ष्य है।
  6. Tata और Mahindra की इस डील में क्या भूमिका है?
    Mahindra Defence ने Embraer के C-390 Millennium के लिए साझेदारी की है, जबकि Tata Advanced Systems ने Lockheed Martin के साथ C-130J Super Hercules के लिए गठजोड़ किया है।