दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और कैमिकल! महाराष्ट्र सरकार का बड़ा एक्शन, अब मिलावट करने वालों की खैर नहीं

Milk Adulteration

Maharashtra Milk Adulteration को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में सख्त अनुपालन (Compliance) आदेश जारी किया है। अब दूध की खरीद से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि दूध में मिलावट, सिंथेटिक दूध की बिक्री और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला राज्य में लगातार सामने आ रहे Milk Adulteration के मामलों के बाद लिया गया है। 

महाराष्ट्र सरकार ने दूध मिलावट पर नया आदेश क्यों जारी किया?

महाराष्ट्र सरकार ने दूध में मिलावट, सिंथेटिक दूध के निर्माण और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के बढ़ते मामलों को देखते हुए नया आदेश जारी किया है। इसका उद्देश्य पूरी डेयरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं को सुरक्षित दूध उपलब्ध कराना और मिलावट करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है. 

Maharashtra Milk Adulteration: क्या है सरकार का नया आदेश?

महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने राज्यभर के सभी डेयरी कारोबारियों के लिए एक समान नियम लागू किए हैं। इनमें शामिल हैं

  • दूध संग्रह केंद्र (Milk Collection Centres)
  • Bulk Milk Coolers
  • Chilling Centres
  • डेयरियां
  • प्रोसेसिंग यूनिट्स
  • ट्रांसपोर्टर
  • डिस्ट्रीब्यूटर
  • रिटेलर

सरकार का कहना है कि अब सप्लाई चेन का हर हिस्सा Food Safety Standards का पालन करेगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी।

जांच में क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं?

हालिया निरीक्षणों में अधिकारियों को कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं। इनमें शामिल हैं

  • पानी मिलाकर दूध बेचना
  • बिना लाइसेंस दूध की बिक्री
  • Fat और SNF मानकों का उल्लंघन
  • यूरिया मिलाना
  • डिटर्जेंट मिलाना
  • कॉस्टिक सोडा का इस्तेमाल
  • स्टार्च और ग्लूकोज मिलाना
  • हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और फॉर्मेलिन का उपयोग
  • नकली और सिंथेटिक दूध को असली बताकर बेचना
  • एक्सपायर दूध को ताजा दूध में मिलाना
  • कोल्ड चेन का पालन नहीं करना
  • अस्वच्छ परिस्थितियों में डेयरी उत्पाद तैयार करना

सरकार ने इसे Public Health के लिए गंभीर खतरा बताया है।

अब दूध बेचने वालों को किन नियमों का पालन करना होगा?

  • नए आदेश के तहत कई नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं। कच्चे दूध के लिए कंटेनर पर स्पष्ट रूप से Raw Milk लिखा होना चाहिए।
  • ग्राहकों को बताया जाएगा कि दूध उबालकर ही पीना है। पैकेज्ड दूध के लिए केवल सीलबंद और लेबल वाले पैक की बिक्री होगी।
  • पैक छेड़छाड़-रोधी (Tamper Evident) होना चाहिए। पूरी सप्लाई चेन के लिए केवल Food Grade उपकरणों का उपयोग होगा।
  • Cold Chain हर स्तर पर बनाए रखना होगा। तापमान का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। दूध का पूरा ट्रेस रिकॉर्ड रखना होगा। कर्मचारियों के पास स्वास्थ्य प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा।
  • FSMS, HACCP और FoSTaC जैसे Food Safety मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। 

त्योहारों पर होगी सबसे ज्यादा सख्ती

महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि दिवाली, होली, गणेशोत्सव, नवरात्रि और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के दौरान डेयरी उत्पादों की विशेष जांच होगी।

विशेष रूप से इन उत्पादों के सैंपल लिए जाएंगे

  • खोया
  • पनीर
  • घी
  • मिठाइयां
  • अन्य Dairy Products

लैब टेस्ट और जोखिम आधारित निरीक्षण के जरिए मिलावट पकड़ने की कोशिश की जाएगी। उपभोक्ताओं के लिए सरकार की सलाह

FDA और FSSAI ने लोगों से अपील की है कि

  • केवल सीलबंद और लेबल वाले दूध खरीदें।
  • संदिग्ध दूध या डेयरी उत्पाद मिलने पर शिकायत करें।

मिलावट, गलत लेबलिंग या गुणवत्ता संबंधी शिकायतें FSSAI शिकायत प्रणाली के माध्यम से दर्ज करें। 

 

नियम तोड़ने वालों पर क्या होगी कार्रवाई?

यदि कोई व्यक्ति या संस्था Food Safety and Standards Act, 2006 का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ

  • प्रशासनिक कार्रवाई
  • सिविल कार्रवाई
  • आपराधिक मुकदमा

तीनों स्तरों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि दूध में मिलावट के मामलों में अब किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। 

 

निष्कर्ष

Maharashtra Milk Adulteration के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार का यह अभियान देश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। नए नियमों से Milk Quality, Consumer Safety और Food Safety को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यदि इन नियमों का सख्ती से पालन हुआ, तो मिलावटी दूध के कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

FAQs:

राज्य में लगातार मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद सरकार ने यह आदेश जारी किया है। 

पूरी डेयरी सप्लाई चेन पर निगरानी, अनिवार्य रिकॉर्ड, कोल्ड चेन, लेबलिंग और नियमित लैब टेस्ट की व्यवस्था की गई है। 

सिर्फ विश्वसनीय ब्रांड का सीलबंद दूध खरीदें। स्वाद, गंध या रंग में असामान्यता दिखने पर संबंधित अधिकारियों या FSSAI में शिकायत करें।

डेयरी उद्योग को अब अधिक पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और फूड सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा।

ऐसे लोगों पर Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत प्रशासनिक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।