नेपाल में Gen-Z Protests की आग! जिस युवा लहर ने Balen Shah को सत्ता तक पहुंचाया, वही अब सरकार के खिलाफ क्यों उतर आई?

Nepal Gen-Z Protests

नेपाल में एक बार फिर सड़कों पर गुस्सा दिखाई दे रहा है। इस बार चर्चा में हैं Gen-Z Protests, जिन्होंने राजधानी काठमांडू में सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया है। जिस युवा लहर ने पिछले साल राजनीतिक बदलाव में अहम भूमिका निभाई थी और Balen Shah के नेतृत्व को समर्थन दिया था, वही अब उनकी सरकार के फैसलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। बेघर लोगों की बेदखली, एक प्रदर्शनकारी की आत्मदाह की घटना और पुलिस कार्रवाई ने इस विरोध को और तेज कर दिया है।

नेपाल में Gen-Z Protests क्यों शुरू हुए?

नेपाल में Gen-Z Protests की शुरुआत सरकार द्वारा झुग्गी-झोपड़ी और अवैध बस्तियों में रहने वाले लोगों को बिना स्थायी पुनर्वास योजना के हटाने के फैसले के विरोध में हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार गरीबों के मानवाधिकारों की अनदेखी कर रही है और बेघर परिवारों को अमानवीय परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

Gen-Z Protests ने Balen Shah सरकार के लिए क्यों बढ़ाई मुश्किलें?

यह आंदोलन प्रधानमंत्री Balen Shah सरकार के सामने पहला बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने हजारों गरीब परिवारों के घर तोड़ दिए लेकिन उनके रहने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं की। कई परिवार अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में रह रहे हैं, जहां रहने की स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। युवा प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे को लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है।

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आत्मदाह की घटना ने क्यों भड़काया गुस्सा?

आंदोलन ने तब और उग्र रूप ले लिया जब 25 वर्षीय गणेश नेपाली ने कथित तौर पर नगर पुलिस द्वारा उनकी मोटरसाइकिल पर व्हील लॉक लगाए जाने के बाद खुद को आग लगा ली।हालांकि इस घटना की जांच जारी है, लेकिन इसने सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी सरकार की आलोचना तेज हो गई।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

हाल के दिनों में कई छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं।रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित अस्थायी शिविरों का निरीक्षण करने पहुंचे कुछ युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोग घायल हुए। विपक्षी नेताओं ने भी गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग की है।काठमांडू के अलावा कोशी प्रांत में भी प्रदर्शन के समर्थन में आवाज उठाने वाले कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबरें हैं।

बेदखली अभियान का पूरा मामला क्या है?

सरकार ने अप्रैल 2026 से काठमांडू घाटी और अन्य इलाकों में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया।

  • लगभग 2,600 परिवारों के घर हटाए गए।
  • करीब 15,000 लोग इस कार्रवाई से प्रभावित हुए।
  • लगभग 325 परिवार अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में रहने को मजबूर हैं।

सरकार ने 2 जुलाई को इन लोगों को 6 जुलाई तक अस्थायी केंद्र खाली करने का निर्देश दिया।कई परिवारों ने जाने से इनकार कर दिया क्योंकि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा स्थान नहीं था।यही मुद्दा अब बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन चुका है।

 

कौन हैं Balen Shah?

Balen Shah नेपाल के युवा नेता हैं, जो पहले काठमांडू महानगर के मेयर रहे। शहर में कई सुधार अभियानों के कारण उन्हें लोकप्रियता मिली। उन्हें 2023 में Time Magazine की उभरते वैश्विक नेताओं की सूची में भी शामिल किया गया था।युवाओं के बड़े समर्थन के दम पर उनकी सरकार बनी थी, लेकिन अब वही युवा वर्ग उनकी नीतियों पर सवाल उठा रहा है।

 

नेपाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।सरकार पर पुनर्वास नीति स्पष्ट करने, गिरफ्तार लोगों के मामलों की समीक्षा करने और बेघर परिवारों के लिए स्थायी समाधान देने का दबाव बढ़ सकता है। यह मामला आने वाले समय में नेपाल की राजनीति के लिए अहम चुनौती बन सकता है।

 

निष्कर्ष

Gen-Z Protests ने नेपाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जिस युवा शक्ति ने कभी राजनीतिक बदलाव की नींव रखी थी, वही अब सरकार से जवाब मांग रही है। यदि Balen Shah Government प्रदर्शनकारियों की चिंताओं का समाधान नहीं करती, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है।

FAQs:

बिना स्थायी पुनर्वास योजना के झुग्गी बस्तियों को हटाने और बेघर लोगों की स्थिति को लेकर युवाओं ने प्रदर्शन शुरू किया।

25 वर्षीय गणेश नेपाली ने कथित तौर पर नगर पुलिस की कार्रवाई से नाराज़ होकर खुद को आग लगा ली। मामले की जांच जारी है।

सरकार पर गरीब परिवारों को बिना उचित पुनर्वास के बेदखल करने, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के आरोप लगाए जा रहे हैं।

स्थायी पुनर्वास, गिरफ्तार लोगों की रिहाई, मानवाधिकारों की रक्षा और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच।

कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण विरोध के रूप में आयोजित किए गए।