New Vehicle Fuel Norms 2027: 2027 से कारों के लिए बदलेंगे फ्यूल और प्रदूषण के नियम, जानिए क्या होगा असर

New Vehicle Fuel Norms 2027

भारत में New Vehicle Fuel Norms 2027 को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। बिजली मंत्रालय ने नए CAFE-III (Corporate Average Fuel Economy) मानकों का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें 1 अप्रैल 2027 से यात्री वाहनों के लिए ज्यादा सख्त ईंधन दक्षता और उत्सर्जन मानक लागू करने का प्रस्ताव है। इन नियमों का मकसद वाहनों की ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन को धीरे-धीरे कम करना है। प्रस्तावित नियम 2027-28 से 2031-32 तक भारत में बिक्री के लिए बनाए या आयात किए जाने वाले M1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होंगे।

New Vehicle Fuel Norms 2027 में क्या बदलेगा?

नए CAFE-III मानकों के तहत वाहन कंपनियों को अपनी पूरी कार बिक्री के औसत ईंधन दक्षता और कार्बन उत्सर्जन को तय सीमा के भीतर रखना होगा। प्रस्ताव के अनुसार यह सीमा हर साल धीरे-धीरे और सख्त होगी। 2027-28 में लक्ष्य 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर, यानी 94.76 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर रखा गया है। 2031-32 तक इसे घटाकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर, यानी 78.90 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले वर्षों में वाहन कंपनियों को ज्यादा ईंधन-कुशल और कम प्रदूषण वाले वाहन विकसित करने होंगे।

पहली बार Ethanol, Biofuel और CBG को मिलेगा फायदा

प्रस्तावित CAFE-III नियमों की सबसे खास बात Carbon Neutrality Factors (CNFs) का शामिल होना है। पहली बार इथेनॉल, बायोफ्यूल और कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG जैसे ईंधनों की कार्बन-न्यूट्रल क्षमता को नियमों में मान्यता देने का प्रस्ताव है। मौजूदा स्तर के इथेनॉल मिश्रण के लिए 8% Carbon Neutrality Factor प्रस्तावित किया गया है। वहीं CBG और बायोफ्यूल के लिए लाभ वास्तविक और मौजूदा ब्लेंडिंग स्तर के आधार पर तय किया जाएगा। इसके तहत कंपनियों को अनुपालन की गणना करते समय घोषित टेलपाइप CO₂ उत्सर्जन में निर्धारित कटौती का लाभ मिल सकता है।

 

Hybrid और Electric Cars को भी मिलेगा Super Credit

नए नियमों में साफ-सुथरी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग वाहनों को volume derogation यानी super credits देने का प्रस्ताव है।

इसमें शामिल हैं:

  • Battery Electric Vehicles (BEVs)
  • Range-Extended Electric Vehicles (REEVs)
  • Plug-in Hybrid Electric Vehicles (PHEVs)
  • Strong Hybrid Electric Vehicles (SHEVs)
  • Flex-Fuel Vehicles (FFVs)

इसका उद्देश्य वाहन कंपनियों को इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

कंपनियों को मिलेंगे Compliance Credits

प्रस्ताव में Credit और Debit Mechanism भी रखा गया है। यदि कोई वाहन निर्माता निर्धारित उत्सर्जन लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करता है, तो उसे Compliance Credits मिलेंगे, जिन्हें संबंधित Compliance Block के भीतर आगे ले जाया जा सकता है। वहीं लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियां अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए Carry Forward, अन्य कंपनियों के साथ Voluntary Pooling या BEE से Compliance Credits खरीदने का विकल्प इस्तेमाल कर सकती हैं। एक Compliance Credit की कीमत शुरुआत में Rs.2,500 प्रस्तावित की गई है। इसमें हर साल Rs.500 की बढ़ोतरी का प्रावधान है। Compliance Block के अंत में इस्तेमाल नहीं किए गए Credits खत्म हो जाएंगे।

 

2031 तक लगातार सख्त होंगे Fuel Efficiency Standards

New Vehicle Fuel Norms 2027 को एक साथ बेहद सख्त बनाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है। CAFE-III की अवधि पांच साल की होगी और अनुपालन को दो हिस्सों में बांटा जाएगा- पहला तीन साल और दूसरा दो साल। सरकार के अनुसार, इस चरणबद्ध व्यवस्था से वाहन निर्माताओं को तकनीक विकसित करने और ज्यादा ईंधन-कुशल मॉडल तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इसके अलावा, मंजूर की गई ईंधन-बचत तकनीकों के लिए निर्माता 9 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक Compliance Benefit का दावा कर सकेंगे। हालांकि, प्रत्येक तकनीक के लिए अधिकतम लाभ 1 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक सीमित रहेगा।

 

क्या आम कार खरीदारों पर पड़ेगा असर?

इन नियमों का तत्काल असर मौजूदा कार मालिकों पर नहीं होगा, क्योंकि प्रस्तावित CAFE-III मानक मुख्य रूप से वाहन निर्माताओं के फ्लीट औसत प्रदर्शन पर लागू होंगे। हालांकि, लंबे समय में इन नियमों का असर नई कारों की तकनीक और कीमतों पर दिखाई दे सकता है। वाहन कंपनियों को ज्यादा ईंधन-कुशल इंजन, हाइब्रिड तकनीक, इलेक्ट्रिक पावरट्रेन और वैकल्पिक ईंधन तकनीकों में निवेश करना पड़ सकता है। इससे कुछ मॉडलों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कीमतों पर भी पड़ने की संभावना है। दूसरी ओर, ज्यादा ईंधन-कुशल वाहन ग्राहकों के लिए लंबे समय में ईंधन खर्च कम कर सकते हैं।

 

छोटे वाहन निर्माताओं को मिलेगी छूट

प्रस्तावित नियमों में छोटे वाहन निर्माताओं के लिए राहत भी रखी गई है। जिन कंपनियों की सालाना यात्री वाहन बिक्री 1,000 से कम है, वे इन प्रस्तावित मानकों से फिलहाल बाहर रहेंगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन निर्माताओं पर Energy Conservation Act के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।

 

सरकार ने मांगी जनता और कंपनियों से राय

CAFE-III के ड्राफ्ट पर सरकार ने वाहन उद्योग, विशेषज्ञों और आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने की अंतिम तारीख 6 अगस्त 2026 है। इसलिए अभी ये अंतिम नियम नहीं हैं। हितधारकों से मिले सुझावों के बाद सरकार ड्राफ्ट में बदलाव कर सकती है और उसके बाद अंतिम मानकों को लागू किया जाएगा।

 

निष्कर्ष

New Vehicle Fuel Norms 2027 भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को ज्यादा ईंधन-कुशल और कम उत्सर्जन वाली तकनीकों की ओर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकते हैं। CAFE-III में पहली बार Ethanol, Biofuel और CBG के लिए Carbon Neutrality Factors तथा EV और Hybrid वाहनों के लिए Super Credits का प्रस्ताव खास महत्व रखता है। हालांकि, इन नियमों से वाहन कंपनियों की तकनीकी लागत और संभावित रूप से नई कारों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। अंतिम नियमों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार के प्रस्ताव में क्या बदलाव किए जाते हैं।

 

FAQs

  1. 2027 में नए Vehicle Fuel Norms क्या होंगे?
    CAFE-III के तहत यात्री वाहनों के लिए ईंधन दक्षता और CO₂ उत्सर्जन के मानकों को चरणबद्ध तरीके से सख्त करने का प्रस्ताव है। ये नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने हैं।
  2. नए फ्यूल नॉर्म्स किन वाहनों पर लागू होंगे?
    प्रस्तावित नियम भारत में बिक्री के लिए बनाए या आयात किए जाने वाले M1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होंगे।
  3. क्या नए नियमों से कारों की कीमत बढ़ सकती है?
    संभावना है कि ज्यादा ईंधन-कुशल और कम उत्सर्जन वाली तकनीक में निवेश के कारण कुछ वाहनों की उत्पादन लागत बढ़े, जिसका असर कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम प्रभाव वाहन और तकनीक पर निर्भर करेगा।
  4. नए Vehicle Fuel Norms लागू करने का उद्देश्य क्या है?
    इनका मुख्य उद्देश्य वाहनों की ईंधन खपत और CO₂ उत्सर्जन कम करना तथा इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, फ्लेक्स-फ्यूल, CBG और अन्य स्वच्छ तकनीकों को प्रोत्साहित करना है।
  5. क्या छोटे वाहन निर्माताओं को छूट मिलेगी?

प्रस्ताव के अनुसार, सालाना 1,000 से कम यात्री वाहन बेचने वाले निर्माताओं को इन मानकों से छूट मिलेगी।