10 जून 2026 भारतीय राजनीति के लिए एक अहम तारीख बन गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम किया, जो अब तक देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम दर्ज था। मोदी ने प्रधानमंत्री पद पर लगातार 4,399 दिन पूरे कर लिए और इस तरह वे भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए।
26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी अब अपने तीसरे लगातार कार्यकाल में हैं। 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में उनकी अगुवाई में भाजपा और एनडीए ने सत्ता हासिल की। इस उपलब्धि के बाद भाजपा और एनडीए ने इसे जनता के भरोसे की जीत बताया, जबकि विपक्ष ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार की नीतियों और शासन मॉडल की आलोचना की।
लेकिन यह कहानी सिर्फ एक रिकॉर्ड की नहीं है। यह पिछले 12 वर्षों में भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, सुरक्षा रणनीति और सामाजिक बदलावों की भी कहानी है।

PM Modi 12 Years Tenure: कैसे टूटा नेहरू का रिकॉर्ड?
स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि 1952 के पहले आम चुनाव तक वे नियुक्त प्रधानमंत्री थे। 1952 के चुनाव के बाद वे लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे और 27 मई 1964 तक पद पर बने रहे।
निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू का लगातार कार्यकाल 4,398 दिनों का था। नरेंद्र मोदी ने 10 जून 2026 को 4,399 दिन पूरे कर यह रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि यह रिकॉर्ड “लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री” के रूप में है। कुल कार्यकाल की बात करें तो नेहरू का प्रधानमंत्री के रूप में कुल समय मोदी से अभी भी अधिक है।
2014 से पहले और बाद का भारत: क्या बदला?
2014 में जब नरेंद्र मोदी केंद्र की सत्ता में आए, तब देश भ्रष्टाचार, नीति-गत ठहराव और कमजोर आर्थिक माहौल जैसे मुद्दों पर बहस कर रहा था। भाजपा ने विकास, सुशासन और मजबूत नेतृत्व को अपना मुख्य चुनावी एजेंडा बनाया।
पिछले 12 वर्षों में भारत ने कई बड़े बदलाव देखे। डिजिटल भुगतान से लेकर अंतरिक्ष कार्यक्रम तक, जी-20 की मेजबानी से लेकर वैश्विक मंचों पर बढ़ती भूमिका तक, कई क्षेत्रों में देश की स्थिति बदली है।
मोदी सरकार का दावा है कि इस अवधि में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, बुनियादी ढांचे में रिकॉर्ड निवेश हुआ और करोड़ों लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा। वहीं आलोचकों का कहना है कि बेरोजगारी, सामाजिक ध्रुवीकरण और संस्थागत स्वतंत्रता जैसे सवाल भी इसी दौर में प्रमुख बने।
मोदी सरकार के सबसे बड़े फैसले जिन्होंने देश की दिशा बदली
- डिजिटल इंडिया: 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ डिजिटल इंडिया अभियान मोदी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में माना जाता है। आज यूपीआई, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवाएं और डिजिटल पहचान प्रणाली भारत की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। सरकार का दावा है कि डिजिटल इंडिया ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग और सरकारी सेवाओं से जोड़ा।
- जन धन योजना और DBT: जन धन खातों, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी को जोड़कर सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को बढ़ावा दिया। सरकार का कहना है कि इससे सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका कम हुई।
- GST लागू: 1 जुलाई 2017 को देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया। इससे पहले अलग-अलग राज्यों और केंद्र के कई टैक्स लागू होते थे। GST को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में गिना जाता है, हालांकि छोटे व्यापारियों और उद्योगों ने शुरुआती वर्षों में इसकी जटिलताओं को लेकर शिकायतें भी कीं।
- नोटबंदी: 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का फैसला मोदी सरकार के सबसे चर्चित और विवादित फैसलों में शामिल है। सरकार ने इसे काले धन, नकली नोट और आतंक वित्तपोषण के खिलाफ कदम बताया था। विपक्ष और कई अर्थशास्त्रियों ने इसके आर्थिक प्रभावों पर सवाल उठाए।
- सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट: 2016 में उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर सर्जिकल स्ट्राइक की। 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में कार्रवाई की। इन दोनों घटनाओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी सरकार की छवि को मजबूत किया।
- अनुच्छेद 370 हटाना: 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया। यह भाजपा के लंबे समय से घोषित राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा था। समर्थकों ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में कदम बताया, जबकि आलोचकों ने प्रक्रिया और उसके प्रभावों पर सवाल उठाए।
- तीन तलाक कानून: मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को एक बार में तीन तलाक देने की प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया। सरकार ने इसे महिला अधिकारों से जुड़ा सुधार बताया।
- CAA: 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पारित किया गया। इस कानून को लेकर देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और यह मोदी सरकार के सबसे विवादित फैसलों में शामिल रहा।
- कोविड-19 महामारी: 2020 से 2022 के बीच कोविड महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। भारत में लॉकडाउन लागू किया गया और बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया। सरकार का दावा है कि दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
- G20 की मेजबानी: 2023 में भारत ने पहली बार G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। नई दिल्ली घोषणा पत्र को भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा गया।
- राम मंदिर: 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। यह भाजपा और व्यापक हिंदू समाज के लिए दशकों पुराने आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।
12. ऑपरेशन सिंदूर: 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। सरकार के अनुसार इस अभियान में बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए।

PM Modi Achievements: विदेश नीति में भारत की नई पहचान
मोदी सरकार के दौरान विदेश नीति भारत की सबसे चर्चित उपलब्धियों में शामिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से 2026 के बीच 100 से अधिक विदेश यात्राएं कीं। अमेरिका, जापान, फ्रांस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और अन्य प्रमुख देशों के साथ भारत के संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ।
भारत क्वाड (QUAD), जी-20, ब्रिक्स और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे मंचों पर अधिक सक्रिय भूमिका में दिखाई दिया। 2023 में भारत ने सफलतापूर्वक जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इसी अवधि में प्रधानमंत्री मोदी को 30 से अधिक देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी मिले।
अर्थव्यवस्था: उपलब्धियां और बहस
मोदी सरकार का सबसे बड़ा दावा भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर है। सरकार के अनुसार भारत 2025 में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, रेलवे आधुनिकीकरण, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के विकास में बड़े निवेश किए गए।
मेक इन इंडिया, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI), सेमीकंडक्टर मिशन और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं को उद्योग क्षेत्र में परिवर्तनकारी पहल बताया गया। हालांकि विपक्ष लगातार बेरोजगारी, आय असमानता, कृषि संकट और छोटे उद्योगों की चुनौतियों को लेकर सरकार को घेरता रहा है।
कोरोना महामारी: मोदी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा
2020 में कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। भारत में भी व्यापक लॉकडाउन लागू किया गया। सरकार ने मुफ्त राशन योजना, वैक्सीनेशन अभियान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। भारत में 220 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगाए गए। दूसरी ओर, महामारी की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य ढांचे पर भारी दबाव और ऑक्सीजन संकट को लेकर सरकार की आलोचना भी हुई।
वे फैसले जिन्हें वापस लेना पड़ा
मोदी सरकार को कई मौकों पर अपने फैसलों पर पुनर्विचार भी करना पड़ा। सबसे प्रमुख मामला तीन कृषि कानूनों का रहा। किसानों के लंबे आंदोलन के बाद नवंबर 2021 में सरकार ने इन कानूनों को वापस लेने का फैसला किया। इसी तरह भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को भी राजनीतिक विरोध के कारण आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इन घटनाओं ने दिखाया कि मजबूत बहुमत वाली सरकार को भी जन दबाव और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार फैसले बदलने पड़ सकते हैं।
विपक्ष की आलोचना क्या है?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मोदी सरकार पर कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि पिछले वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर हुई है, विपक्षी नेताओं पर जांच एजेंसियों का इस्तेमाल बढ़ा है और संसद में बहस की परंपरा कमजोर हुई है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी के रिकॉर्ड पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी और उनकी विरासत को कमतर नहीं आंका जा सकता।
विपक्ष यह भी कहता है कि 2024 में भाजपा अपने दम पर बहुमत नहीं ला सकी और उसे एनडीए सहयोगियों के समर्थन से सरकार बनानी पड़ी।
मोदी की लोकप्रियता का रहस्य क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मोदी की लोकप्रियता के पीछे कई कारण हैं। उनकी व्यक्तिगत ब्रांडिंग, सीधे जनता से संवाद, कल्याणकारी योजनाएं, राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा और मजबूत नेतृत्व की छवि प्रमुख कारण माने जाते हैं। “मन की बात” और “परीक्षा पे चर्चा” जैसे कार्यक्रमों ने भी जनता से सीधे संवाद स्थापित करने में भूमिका निभाई। सोशल मीडिया पर भी मोदी दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेताओं में शामिल हैं।
2029 और उसके बाद भाजपा के सामने क्या चुनौतियां हैं?
मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल भविष्य का नेतृत्व है। पार्टी ने अभी तक किसी उत्तराधिकारी को सामने नहीं रखा है। अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी जैसे नाम समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई संकेत नहीं दिया गया है।
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि क्या 2029 में भी मोदी फैक्टर उतना ही प्रभावी रहेगा जितना पिछले तीन लोकसभा चुनावों में रहा है। इसके अलावा रोजगार, आर्थिक विकास, सामाजिक संतुलन और वैश्विक चुनौतियों से निपटना भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
PM Modi 12 Years Tenure केवल एक राजनीतिक रिकॉर्ड की कहानी नहीं है, बल्कि आधुनिक भारत के एक बड़े परिवर्तनकाल की कहानी भी है। इन 12 वर्षों में भारत ने डिजिटल क्रांति, बड़े आर्थिक सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णायक कदम, वैश्विक कूटनीति में बढ़ती भूमिका और कई सामाजिक-राजनीतिक बदलाव देखे।
साथ ही यह दौर नोटबंदी, कृषि कानूनों के विरोध, CAA विवाद, महामारी प्रबंधन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर बहसों का भी रहा।
समर्थकों के लिए यह निर्णायक नेतृत्व और विकास का काल है, जबकि आलोचकों के लिए यह लोकतांत्रिक चुनौतियों और संस्थागत सवालों का दौर। लेकिन एक तथ्य निर्विवाद है – नरेंद्र मोदी अब भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शीर्ष पर पहुंच चुके हैं, और आने वाले वर्षों में उनकी विरासत पर बहस जारी रहेगी।
FAQs
What are PM Modi’s major achievements in 12 years?
डिजिटल इंडिया, जीएसटी, अनुच्छेद 370 हटाना, जी-20 की मेजबानी, बुनियादी ढांचे का विस्तार, कोविड वैक्सीनेशन अभियान और भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने जैसे कदम प्रमुख उपलब्धियों में गिने जाते हैं।
How has India changed during PM Modi’s tenure?
भारत में डिजिटल भुगतान, सड़क और रेलवे नेटवर्क, वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव, रक्षा नीति और कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार में बड़े बदलाव देखे गए हैं।
What are the key reforms introduced by the Modi government?
जीएसटी, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, PLI योजना, तीन तलाक कानून, अनुच्छेद 370 हटाना और नई शिक्षा नीति प्रमुख सुधारों में शामिल हैं।
What are the major milestones of PM Modi’s leadership?
तीन बार लगातार प्रधानमंत्री बनना, जी-20 की मेजबानी, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और 4,399 दिनों का लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड प्रमुख पड़ाव हैं।
How successful has PM Modi’s 12-year tenure been?
इस पर राजनीतिक मतभेद हैं। समर्थक इसे विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा का दौर मानते हैं, जबकि आलोचक लोकतांत्रिक संस्थाओं, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों को लेकर सवाल उठाते हैं। इसलिए इसका आकलन व्यक्ति के राजनीतिक दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।

