SEBI Action on Rajesh Exports के बाद कंपनी के शेयरों में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) का शेयर NSE पर 5% के लोअर सर्किट के साथ 103.92 रुपये पर खुला। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी और उसके चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए वित्तीय अनियमितताओं, फंड रूटिंग और जांच में सहयोग न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, LIC के पास कंपनी में 10.80% हिस्सेदारी है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की कुल हिस्सेदारी 14.26% है।
सेबी ने राजेश मेहता पर क्यों की कार्रवाई?
SEBI द्वारा जारी 109 पन्नों के अंतरिम आदेश में राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार के लेनदेन से रोक दिया गया है।
इसके अलावा, नियामक ने कंपनी को अपने वित्तीय विवरणों, संबंधित पक्षों के लेनदेन (Related Party Transactions) और अन्य नियामकीय खुलासों में पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया है।
सेबी का कहना है कि जांच के दौरान कंपनी से कई बार वित्तीय रिकॉर्ड, फंड फ्लो से जुड़े दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगे गए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
SEBI Action on Rajesh Exports: राजस्व में भारी हेरफेर का आरोप
सेबी की जांच में सबसे गंभीर आरोप कंपनी की आय (Revenue) से जुड़े हैं।
नियामक के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स की कुल समेकित आय (Consolidated Revenue) का लगभग 97% से 99% हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से Valcambi SA, से आया दिखाया गया। हालांकि इन सहायक कंपनियों के ऑडिटेड स्टैंडअलोन खातों में इतनी आय दिखाई नहीं गई।
सेबी का आरोप है कि कंपनी ने सोने के कारोबार में केवल प्रोसेसिंग या रिफाइनिंग आय दिखाने के बजाय पूरे लेनदेन मूल्य को राजस्व के रूप में दर्ज किया हो सकता है। इससे कंपनी की आय कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई दिखाई गई।
जांच अवधि के दौरान लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व में संभावित गलत प्रस्तुतीकरण (Misrepresentation) का अनुमान लगाया गया है।

LIC और FIIs की कितनी हिस्सेदारी है?
नियामकीय जांच के बावजूद कंपनी में बड़े संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बनी हुई है।
LIC की हिस्सेदारी
मार्च 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार:
LIC की हिस्सेदारी: 10.80%
सितंबर 2023 से हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं
मौजूदा बाजार मूल्य पर निवेश का अनुमानित मूल्य: करीब 347 करोड़ रुपये
हालांकि शेयर में आई गिरावट के कारण LIC के निवेश मूल्य में इस साल की शुरुआत की तुलना में उल्लेखनीय कमी आई है।
FII Holdings in Rajesh Exports
विदेशी निवेशकों ने पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
मार्च 2023: 17.60% हिस्सेदारी
मार्च 2026: 14.26% हिस्सेदारी
प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल हैं:
Bridge India Fund – 8.46%
Schwab Fundamental Emerging Markets Equity ETF – 2.70%
मौजूदा कीमतों पर FIIs की कुल हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 456 करोड़ रुपये आंका गया है।
ऑडिटर्स पर भी उठे सवाल
SEBI ने अपने आदेश में कंपनी के ऑडिटर्स के आचरण को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।
नियामक के अनुसार, ऑडिटर्स ने शुरुआत में ऑडिट वर्किंग पेपर्स उपलब्ध कराने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए।
सेबी का मानना है कि लगातार सहयोग न करना महत्वपूर्ण सूचनाओं को छिपाने या जांच में बाधा डालने का संकेत हो सकता है।
इसी वजह से नियामक ने मामले में नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का आदेश दिया है।

एक साल में 40% टूटा Rajesh Exports का शेयर
Rajesh Exports के शेयर पहले से ही दबाव में थे। पिछले एक वर्ष में कंपनी का शेयर लगभग 40% तक गिर चुका है।
ताजा SEBI regulatory action के बाद निवेशकों का भरोसा और कमजोर हुआ है, जिसके चलते शेयर सीधे लोअर सर्किट पर खुला।
जांच की शुरुआत मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत में कंपनी के बड़े व्यापारिक बकायों (Trade Receivables) और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों पर सवाल उठाए गए थे।
सेबी की जांच अवधि 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 तक की है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
SEBI Action on Rajesh Exports ने कंपनी की कॉरपोरेट गवर्नेंस, वित्तीय रिपोर्टिंग और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब तक जांच पूरी नहीं होती और कंपनी स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रह सकती है। शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है और निवेशकों को किसी भी निर्णय से पहले सभी जोखिमों का मूल्यांकन करना चाहिए।
निष्कर्ष
SEBI Action on Rajesh Exports ने बाजार में बड़ा असर डाला है। कंपनी के शेयर 5% लोअर सर्किट पर पहुंच गए हैं और निवेशकों की चिंता बढ़ी है। LIC और FIIs जैसे बड़े निवेशकों की मौजूदगी के बावजूद, वित्तीय अनियमितताओं और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े आरोप कंपनी के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में सेबी की जांच और कंपनी की प्रतिक्रिया पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
FAQs
Q1. Rajesh Exports के शेयर 5% लोअर सर्किट पर क्यों पहुंचे?
SEBI द्वारा कंपनी और उसके CMD राजेश मेहता के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और फंड रूटिंग से जुड़े आरोपों पर अंतरिम कार्रवाई के बाद शेयर में भारी बिकवाली हुई।
Q2. SEBI ने Rajesh Exports के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
SEBI ने राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग करने से रोक दिया है और कंपनी को वित्तीय खुलासों में पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया है।
Q3. LIC की Rajesh Exports में कितनी हिस्सेदारी है?
मार्च 2026 तिमाही के अनुसार LIC के पास कंपनी की 10.80% हिस्सेदारी है।
Q4. Rajesh Exports में FIIs की हिस्सेदारी कितनी है?
मार्च 2026 तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की कुल हिस्सेदारी 14.26% थी।
Q5. क्या निवेशकों को Rajesh Exports को लेकर चिंता करनी चाहिए?
SEBI की जांच और लगाए गए आरोपों के कारण कंपनी पर नियामकीय दबाव बढ़ा है। ऐसे में निवेशकों को सावधानी बरतते हुए सभी उपलब्ध तथ्यों का आकलन करना चाहिए।

