US Birthright Citizenship: ट्रम्प को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, अमेरिका में जन्म लेने वाले हर बच्चे की नागरिकता बरकरार – भारतीयों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

US Birthright Citizenship

US Birthright Citizenship: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस कार्यकारी आदेश (Executive Order) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया, जिसमें अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों और अस्थायी वीजा पर अमेरिका आए लोगों के बच्चों को जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता देने से इनकार किया गया था। इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता की इमिग्रेशन स्थिति कुछ भी हो।

यह फैसला सिर्फ अमेरिका की इमिग्रेशन नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वहां रह रहे लाखों भारतीय परिवारों, H-1B वीजा धारकों, विदेशी छात्रों और अन्य अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों पर भी पड़ेगा। यही वजह है कि इस फैसले को ट्रम्प प्रशासन के लिए बड़ा संवैधानिक झटका माना जा रहा है।

क्या था ट्रम्प का आदेश और विवाद कैसे शुरू हुआ?

डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 जनवरी 2025 को दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही एक कार्यकारी आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया था कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं या फिर केवल अस्थायी वीजा जैसे H-1B, स्टूडेंट, रिसर्च या टूरिस्ट वीजा पर मौजूद हैं, तो ऐसे बच्चे को केवल अमेरिका में जन्म लेने के आधार पर नागरिकता नहीं मिलेगी।

ट्रम्प का तर्क था कि अमेरिका की मौजूदा व्यवस्था का दुरुपयोग हो रहा है। उनके अनुसार कई लोग केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं, जिसे आलोचक “बर्थ टूरिज्म” (Birth Tourism) कहते हैं। ट्रम्प लंबे समय से इस व्यवस्था को खत्म करने की वकालत करते रहे थे और चुनाव प्रचार के दौरान भी इसे बदलने का वादा किया था।

हालांकि, आदेश जारी होने के कुछ ही दिनों बाद कई संघीय जिला अदालतों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए इस पर रोक लगा दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने अब अंतिम फैसला सुनाते हुए ट्रम्प के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया।

US Birthright Citizenship: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखते हुए कहा कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन (14th Amendment) अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग हर व्यक्ति को जन्म के साथ नागरिकता प्रदान करता है। अदालत ने कहा कि यह अधिकार किसी राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश से समाप्त नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था बदलनी है तो उसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा। केवल कांग्रेस कोई सामान्य कानून बनाकर या राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश जारी करके इस अधिकार को खत्म नहीं कर सकते।

हालांकि इस फैसले में सभी न्यायाधीश एकमत नहीं थे। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने नागरिकता के अधिकार को संघीय कानून के आधार पर सही माना, जबकि जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल एलिटो और नील गोरसच ने ट्रम्प के पक्ष में असहमति जताई। इसके बावजूद बहुमत का फैसला लागू होगा और जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

14वें संशोधन की शुरुआत कैसे हुई?

अमेरिका में जन्म से नागरिकता मिलने की व्यवस्था लगभग 158 साल पुरानी है। 1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध समाप्त होने के बाद 1868 में संविधान में 14वां संशोधन जोड़ा गया। इसका मूल उद्देश्य गुलामी झेल चुके अश्वेत लोगों को अमेरिकी नागरिकता और समान अधिकार देना था।

संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला और वहां के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) के अधीन आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होगा। बाद में 1898 के प्रसिद्ध Wong Kim Ark मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सिद्धांत की पुष्टि की थी और कहा था कि अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा नागरिक होगा, भले ही उसके माता-पिता विदेशी नागरिक क्यों न हों।

मौजूदा फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी ऐतिहासिक निर्णय और 14वें संशोधन की मूल भावना को आधार बनाया

ट्रम्प के आदेश का कितना बड़ा असर पड़ सकता था?

अगर ट्रम्प का कार्यकारी आदेश लागू हो जाता तो हर साल अमेरिका में जन्म लेने वाले करीब 2.5 लाख बच्चों की नागरिकता प्रभावित होती। ऐसे परिवारों को अपने नवजात बच्चे की नागरिकता तय कराने के लिए माता-पिता की नागरिकता और इमिग्रेशन स्टेटस से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते।

ट्रम्प का आदेश केवल अवैध प्रवासियों तक सीमित नहीं था। इसका असर उन लोगों पर भी पड़ता जो पूरी तरह कानूनी तरीके से H-1B वीजा, स्टूडेंट वीजा, रिसर्च वीजा या ग्रीन कार्ड के आवेदन की प्रक्रिया में अमेरिका में रह रहे थे। इसलिए इस मामले को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में गिना जा रहा था।

भारतीय परिवारों के लिए यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वहां लगभग 54 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो अमेरिका की कुल आबादी का लगभग 1.6 प्रतिशत हैं। इनमें बड़ी संख्या H-1B वीजा पर काम करने वाले आईटी इंजीनियरों, डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अन्य पेशेवरों की है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन परिवारों के लिए कोई बदलाव नहीं होगा। यदि H-1B या किसी अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे भारतीय दंपति के यहां अमेरिका में बच्चे का जन्म होता है, तो उसे पहले की तरह जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिलेगी। अमेरिका के इमिग्रेशन कानून में गर्भावस्था या बच्चे के जन्म पर कोई रोक नहीं है और यह फैसला उसी व्यवस्था को बरकरार रखता है।

 

क्या बच्चे की नागरिकता मिलने से माता-पिता भी नागरिक बन जाएंगे?

इस सवाल को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चे को जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसके माता-पिता को भी नागरिकता या ग्रीन कार्ड मिल जाएगा।

यदि माता-पिता H-1B या किसी अन्य अस्थायी वीजा पर हैं तो उन्हें पहले की तरह अपने वीजा और इमिग्रेशन नियमों का पालन करना होगा। अमेरिकी कानून के अनुसार अमेरिकी नागरिक बना बच्चा अपने माता-पिता के लिए ग्रीन कार्ड की सिफारिश तभी कर सकता है जब उसकी आयु 21 वर्ष पूरी हो जाए।

 

भारतीय बच्चों के लिए OCI का क्या नियम है?

भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता। इसलिए यदि भारतीय माता-पिता के यहां अमेरिका में बच्चा पैदा होता है तो उसे जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, लेकिन वह पूर्ण भारतीय नागरिकता एक साथ नहीं रख सकता।

ऐसी स्थिति में माता-पिता बच्चे के लिए ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड बनवा सकते हैं। OCI कार्ड धारकों को भारत आने के लिए अलग से वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होती और उन्हें भारत में लंबे समय तक रहने सहित कई सुविधाएं मिलती हैं।

ट्रम्प के लिए यह फैसला बड़ा झटका क्यों माना जा रहा है?

जन्मजात नागरिकता को समाप्त करना ट्रम्प के चुनावी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने अपने समर्थकों से वादा किया था कि राष्ट्रपति बनने के बाद इस व्यवस्था को बदल देंगे। इसी कारण उन्होंने शपथ लेने के पहले दिन ही कार्यकारी आदेश जारी किया था।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि राष्ट्रपति अपनी कार्यकारी शक्तियों का उपयोग करके संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकते। यदि अमेरिका में जन्म से नागरिकता की व्यवस्था बदलनी है तो उसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा, जो बेहद कठिन और लंबी प्रक्रिया है।

यही कारण है कि इस फैसले को ट्रम्प प्रशासन के लिए बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

 

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अमेरिकी संविधान की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में से एक को फिर से मजबूत करता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक रहेगा और इस अधिकार को राष्ट्रपति के आदेश से खत्म नहीं किया जा सकता। इस फैसले से न केवल अमेरिका में रह रहे लाखों अप्रवासी परिवारों बल्कि H-1B वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय परिवारों को भी बड़ी राहत मिली है। साथ ही यह फैसला अमेरिकी संविधान, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों के संतुलन का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

FAQs:

US Birthright Citizenship वह संवैधानिक व्यवस्था है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा जन्म के साथ अमेरिकी नागरिक बन जाता है, चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन जन्म से नागरिकता का अधिकार देता है। राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश (Executive Order) के जरिए इस संवैधानिक अधिकार को समाप्त नहीं कर सकते।

हाँ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद H-1B, स्टूडेंट या अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों के अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को पहले की तरह जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिलेगी।

नहीं। बच्चे को जन्म से अमेरिकी नागरिकता मिलती है, लेकिन उसके माता-पिता को इससे स्वतः नागरिकता या ग्रीन कार्ड नहीं मिलता। वे अपने मौजूदा इमिग्रेशन नियमों के तहत ही अमेरिका में रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार केवल साधारण कानून बनाकर यह व्यवस्था नहीं बदली जा सकती। यदि Birthright Citizenship समाप्त करनी है, तो इसके लिए अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में बदलाव करना होगा, जो एक लंबी और कठिन प्रक्रिया है।