भारत और अमेरिका के रिश्ते एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के भारत दौरे ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई चर्चा में ला दिया है। इस दौरे के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन बातचीत हुई। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब रूबियो ने अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी और कहा कि कुछ लोगों की गलत सोच पूरे अमेरिकी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना “महान दोस्त” बताते हुए भारत के प्रति भरोसे और समर्थन का संदेश दिया। इससे साफ संकेत मिला कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली दोनों अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं।
नस्लवाद के सवाल पर रूबियो का जवाब
नई दिल्ली में विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रूबियो से अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नस्लीय टिप्पणियों को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि दुनिया के हर देश में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर आपत्तिजनक बातें करते हैं, लेकिन इससे पूरे देश की पहचान तय नहीं होती।
रूबियो ने कहा कि अमेरिका आज भी दुनिया के सबसे स्वागत करने वाले देशों में शामिल है। उनके मुताबिक अमेरिका की ताकत ही यह रही है कि अलग-अलग देशों से आए लोगों ने वहां की अर्थव्यवस्था और समाज को मजबूत बनाया है।
उन्होंने भारतीय समुदाय की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने टेक्नोलॉजी, चिकित्सा, कारोबार और सार्वजनिक सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान दिया है और भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जयशंकर हल्की मुस्कान के साथ रूबियो की बात सुनते नजर आए। हालांकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की तरफ से इस मुद्दे पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की गई।
भारत–अमेरिका रिश्तों में रणनीतिक सहयोग पर जोर
रूबियो का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर लगातार बातचीत चल रही है। भारत और अमेरिका अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
दोनों देशों के बीच बातचीत में रक्षा सहयोग, नई टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे विषय प्रमुख रहे। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई।
रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और दोनों देशों का रिश्ता केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व रखता है। वहीं जयशंकर ने भी कहा कि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत-अमेरिका साझेदारी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

QUAD बैठक पर भी दुनिया की नजर
रूबियो भारत दौरे के दौरान QUAD देशों की बैठक में भी हिस्सा लेने वाले हैं। इस समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। QUAD को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन के रूप में देखा जाता है।
बैठक में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, नई तकनीक, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में QUAD की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा बना सबसे अहम मुद्दा
इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा भी प्रमुख विषय रही। भारत फिलहाल रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है। वहीं अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी तेल और LNG गैस का आयात भी बढ़ाए।
मिडिल ईस्ट में लगातार तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण भारत अब कई देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी मजबूत करना चाहता है। अमेरिका भी इस मौके को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान रहा है।
रूबियो पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका भारत की जरूरतों के मुताबिक तेल और गैस की सप्लाई बढ़ाने को तैयार है। माना जा रहा है कि इस दौरे में इसी दिशा में आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
ट्रेड डील और टैरिफ विवाद पर नरमी के संकेत
पिछले कुछ समय में भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर मतभेद बढ़े थे। अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर ज्यादा शुल्क लगाया था। हालांकि अब दोनों देश व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
रूबियो ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच जल्द नई ट्रेड डील हो सकती है। उनका कहना था कि रिश्तों की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है और दोनों देश निवेश, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन सहयोग को बढ़ाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण, AI और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में भारत आने वाले समय में अमेरिका का बड़ा साझेदार बन सकता है।
ट्रम्प ने मोदी की खुलकर तारीफ की
भारत-अमेरिका रिश्तों की चर्चा उस समय और तेज हो गई जब ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “महान दोस्त” और खुद को उनका “बहुत बड़ा फैन” बताया।
अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें भारत से प्यार है और भारत अमेरिका पर “100% भरोसा” कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को कभी मदद की जरूरत पड़े तो अमेरिका हमेशा साथ खड़ा रहेगा।
ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। इसे कूटनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
पहले भी मोदी की तारीफ कर चुके हैं ट्रम्प
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने मोदी की खुलकर तारीफ की हो। इससे पहले भी वे कई मंचों पर मोदी को मजबूत नेता और करीबी दोस्त बता चुके हैं।
- 2019 में ह्यूस्टन के “Howdy Modi” कार्यक्रम में ट्रम्प ने मोदी को भारत के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक बताया था।
- 2020 में अहमदाबाद के “Namaste Trump” कार्यक्रम में उन्होंने मोदी को शानदार नेता कहा था।
- 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रम्प ने कहा था कि उनके कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत हुए।
रक्षा साझेदारी तेजी से बढ़ रही
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। भारतीय सेना और वायुसेना पहले से ही अमेरिका के कई आधुनिक रक्षा उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं।
इनमें P-8 पोसाइडन विमान, MQ-9B ड्रोन, M-777 हॉवित्जर तोप और C-17 ग्लोबमास्टर जैसे सिस्टम शामिल हैं। अब दोनों देश रक्षा उत्पादन और नई सैन्य तकनीकों पर भी साथ काम करना चाहते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन के बढ़ते प्रभाव और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए यह साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।
मोदी–ट्रम्प के बीच लगातार संपर्क
पिछले दो वर्षों में मोदी और ट्रम्प के बीच कई बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। इन चर्चाओं में व्यापार, आतंकवाद, रक्षा, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे मुद्दे शामिल रहे।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद ट्रम्प ने मोदी को फोन कर संवेदना जताई थी। वहीं दोनों नेताओं ने भारत-पाकिस्तान तनाव, G-7 बैठक, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार समझौतों पर भी चर्चा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंध भी भारत-अमेरिका रिश्तों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भारत–अमेरिका रिश्तों का नया दौर
रूबियो के भारत दौरे और ट्रम्प के बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश आने वाले समय में अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। चाहे वह रक्षा क्षेत्र हो, ऊर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, AI या वैश्विक राजनीति – भारत और अमेरिका अब कई मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि व्यापार और टैरिफ जैसे कुछ मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं, लेकिन दोनों देशों की कोशिश यही है कि रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया जाए।
दुनिया में तेजी से बदलते राजनीतिक हालात के बीच भारत और अमेरिका की यह नजदीकी आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

