नीदरलैंड से भारत आ रही हैं 1000 साल पुरानी चोलकालीन ताम्रपट्टियां – आखिर विदेश कैसे पहुंचीं ये ऐतिहासिक धरोहर?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत को अपनी ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी एक बड़ी खुशखबरी मिली। भारत और नीदरलैंड के बीच हुए एक अहम समझौते के तहत 11वीं सदी की चोलकालीन ताम्रपट्टियां अब वापस भारत लाई जाएंगी। करीब एक हजार साल पुरानी इन ताम्रपट्टियों में चोल साम्राज्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं, जिन्हें भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर माना जाता है।

इन ताम्रपट्टियों का संबंध दक्षिण भारत के शक्तिशाली चोल राजवंश से है। इनमें मुख्य रूप से महान शासक राजेंद्र चोल I और उनके पिता राजाराज चोल I के शासनकाल से जुड़ी सूचनाएं दर्ज हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये ताम्रपट्टियां भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनके वापस आने से आने वाली पीढ़ियों को देश के समृद्ध इतिहास को समझने में मदद मिलेगी।

 

आखिर क्या होती हैं ताम्रपट्टियां?

प्राचीन भारत में महत्वपूर्ण सूचनाओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए तांबे की प्लेटों पर लेख लिखे जाते थे। इन्हें ताम्रपत्र या ताम्रपट्टियां कहा जाता है। राजा-महाराजा इन पर भूमि दान, प्रशासनिक आदेश, धार्मिक घोषणाएं, युद्ध विजय और शाही वंश से जुड़ी जानकारी अंकित करवाते थे। इतिहासकारों के अनुसार, ये दस्तावेज किसी भी कालखंड को समझने का सबसे भरोसेमंद स्रोत माने जाते हैं।

नीदरलैंड से वापस लाई जा रही इस ऐतिहासिक धरोहर में कुल 24 ताम्रपट्टियां शामिल हैं। इनमें 21 बड़ी और 3 छोटी ताम्रपट्टियां हैं। ज्यादातर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं। माना जा रहा है कि इनमें चोल शासन की प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक परंपराएं और उस समय के सामाजिक ढांचे से जुड़ी अहम जानकारियां मौजूद हैं।

1000-year-old Chola copper plates coming to India

विदेश कैसे पहुंचीं ये ऐतिहासिक धरोहर?

विशेषज्ञों का मानना है कि 19वीं सदी के दौरान जब यूरोपीय देश भारत और एशिया के अन्य हिस्सों में व्यापार और शोध गतिविधियां बढ़ा रहे थे, उसी दौरान कई ऐतिहासिक वस्तुएं विदेश पहुंच गईं। इन्हीं में चोलकालीन ताम्रपट्टियां भी शामिल थीं। लंबे समय से भारत ऐसी सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने की कोशिश कर रहा है।

हाल के वर्षों में भारत सरकार ने दुनिया के अलग-अलग देशों से कई प्राचीन मूर्तियां और ऐतिहासिक वस्तुएं वापस हासिल की हैं। अब चोल ताम्रपट्टियों की वापसी को भी इसी दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

 

मोदी की नीदरलैंड यात्रा में तकनीक पर भी बड़ा समझौता

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा सिर्फ सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रही। नीदरलैंड के शहर The Hague में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय कंपनी Tata Electronics और डच कंपनी ASML के बीच भी अहम समझौता हुआ।

यह समझौता सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है। ASML दुनिया की प्रमुख चिप मशीन निर्माण कंपनियों में गिनी जाती है। वहीं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि इस साझेदारी से भारत की चिप निर्माण क्षमता को मजबूती मिलेगी और देश इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।

 

नीदरलैंड के राजा और रानी से भी मिले प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी Máxima से भी मुलाकात की। यह बैठक शाही महल हुइस टेन बॉश नीदरलैंड में हुई।

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक, डिजिटल क्षेत्र, जल प्रबंधन, हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। नीदरलैंड के राजा और रानी ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में भोज का आयोजन भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान वर्ष 2019 में नीदरलैंड के शाही परिवार की भारत यात्रा को याद करते हुए कहा कि उस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती मिली थी। उन्होंने नीदरलैंड सरकार का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए धन्यवाद भी दिया।

 

“भारत निवेश के लिए सबसे बेहतर जगह”

द हेग में आयोजित CEO राउंडटेबल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को निवेश और कारोबार के लिए दुनिया की सबसे बेहतर जगहों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि टैक्स व्यवस्था, श्रम कानूनों और सरकारी प्रक्रियाओं में हुए सुधारों की वजह से अब भारत में मैन्युफैक्चरिंग करना पहले से आसान और सस्ता हो गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर कभी भारत के लिए बड़ा आयात क्षेत्र था, वही अब तेजी से निर्यात क्षेत्र में बदल रहा है। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भारत और नीदरलैंड के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

 

भारत में बढ़ रही डच कंपनियों की मौजूदगी

प्रधानमंत्री मोदी ने डच कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि इस समय 300 से ज्यादा डच कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां कारोबार करने वालों के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों पक्षों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। इससे व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा।

 

सांस्कृतिक विरासत और तकनीक, दोनों पर फोकस

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा एक तरफ जहां भारत की ऐतिहासिक धरोहर को वापस लाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई, वहीं दूसरी ओर तकनीक और निवेश के क्षेत्र में भी नए रास्ते खोलती नजर आई। चोल ताम्रपट्टियों की वापसी को भारतीय संस्कृति और इतिहास के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हुए समझौते को भारत की आर्थिक और तकनीकी ताकत बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि भारत लौटने के बाद इन ऐतिहासिक ताम्रपट्टियों को किस तरह संरक्षित किया जाएगा और उनसे इतिहास के कौन-कौन से नए तथ्य सामने आएंगे।