जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू : 6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर सर्वे – अब खुद भी भर सकते हैं जानकारी

भारत में जनगणना हमेशा से एक बहुत बड़ा और अहम राष्ट्रीय कार्य रहा है, लेकिन इस बार यह प्रक्रिया कई मायनों में अलग और आधुनिक दिखाई दे रही है। जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (HLO) की फील्ड गतिविधियां अब शुरू हो चुकी हैं। यह प्रक्रिया देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो गई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि भारत अब डेटा संग्रह के पुराने तरीकों से आगे बढ़कर डिजिटल सिस्टम की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

इस बार की जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें घरों की स्थिति, सुविधाएं, संसाधन और जीवन स्तर से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी जुटाई जाएंगी। खास बात यह है कि इसमें पहली बार ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा भी दी गई है, जिससे लोग खुद अपने घर की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर सकते हैं।

 

किन राज्यों में शुरू हुआ पहला चरण?

जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हो चुकी है। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इन क्षेत्रों में 15 दिन की सेल्फ-एन्यूमरेशन अवधि पूरी होने के बाद अब घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का काम शुरू किया गया है।

यह फील्ड ऑपरेशन 30 मई 2026 तक जारी रहेगा। इस दौरान प्रशिक्षित गणनाकर्मी (Enumerators) हर घर पर जाकर जरूरी जानकारी इकट्ठा करेंगे। जिन लोगों ने पहले ही ऑनलाइन अपनी जानकारी दे दी है, उनसे केवल पुष्टि की जाएगी, जबकि बाकी घरों से पूरी जानकारी ली जाएगी।

 

किन राज्यों में ऑनलाइन सुविधा जारी है?

कुछ राज्यों और क्षेत्रों में अभी भी ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा जारी है। इनमें दिल्ली नगर निगम क्षेत्र, राजस्थान, महाराष्ट्र, मेघालय और झारखंड शामिल हैं। यहां लोग 15 मई 2026 तक ऑनलाइन अपने घर और परिवार से जुड़ी जानकारी भर सकते हैं।

इसके बाद इन राज्यों में 16 मई से 14 जून 2026 के बीच घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह दोहरी व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अधिक से अधिक लोग डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करें और प्रक्रिया आसान बने।

 

बिहार में क्या स्थिति है?

बिहार में 15 दिन की ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन अवधि अब खत्म हो रही है। यहां 2 मई 2026 से फील्ड ऑपरेशन शुरू हो जाएंगे, जो 31 मई तक चलेंगे। इसका मतलब है कि अब यहां भी गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करेंगे।

First phase of Census 2027 begins

पहली बार आई डिजिटल सुविधा

इस बार की जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल है। पहली बार लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का विकल्प दिया गया है। यह सुविधा सुरक्षित और आसान मानी जा रही है।

अब तक करीब 82 लाख परिवार इस सुविधा का उपयोग कर चुके हैं, जो एक बड़ी संख्या है। इससे यह भी पता चलता है कि लोग डिजिटल माध्यम को तेजी से अपना रहे हैं।

जो लोग ऑनलाइन जानकारी भर चुके हैं, उन्हें एक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) दी गई है। यह आईडी उन्हें संभालकर रखनी होगी और जब गणनाकर्मी घर आएंगे, तब उन्हें यह आईडी दिखानी होगी।

 

घर-घर जाकर भी होगा डेटा संग्रह

हालांकि डिजिटल सुविधा दी गई है, लेकिन सरकार ने पारंपरिक घर-घर जाकर डेटा जुटाने की प्रक्रिया को भी बरकरार रखा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार छूट न जाए।

गणनाकर्मी एक खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करेंगे, जिसमें वे सभी जानकारी सीधे डिजिटल रूप में दर्ज करेंगे। इससे डेटा की सटीकता बढ़ेगी और प्रोसेसिंग भी तेजी से होगी।

 

क्या-क्या जानकारी ली जाएगी?

हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के दौरान कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। ये सवाल घर और परिवार से जुड़े कई पहलुओं को कवर करेंगे। जैसे –

  • घर की स्थिति (पक्का या कच्चा)
  • पानी और बिजली की सुविधा
  • शौचालय की उपलब्धता
  • परिवार के सदस्यों की संख्या
  • घर में मौजूद संपत्ति जैसे टीवी, वाहन आदि

यह जानकारी आगे चलकर देश की योजनाओं और नीतियों को तय करने में मदद करेगी।

 

आगे क्या होगा?

यह पहला चरण भविष्य में होने वाली जनसंख्या गणना (Population Enumeration) की नींव तैयार करेगा। यानी पहले घरों और सुविधाओं का डेटा इकट्ठा किया जाएगा, फिर लोगों की संख्या और अन्य जानकारी जुटाई जाएगी।

इस तरह जनगणना 2027 को दो बड़े हिस्सों में बांटा गया है ताकि हर जानकारी सही और पूरी तरह से जुटाई जा सके।

 

अन्य क्षेत्रों में भी चल रहा काम

देश के कई अन्य हिस्सों में भी यह प्रक्रिया पहले से चल रही है। जैसे –

  • अंडमान और निकोबार द्वीप
  • दादरा और नगर हवेली
  • दमन और दीव
  • गोवा
  • कर्नाटक
  • लक्षद्वीप
  • मिजोरम
  • ओडिशा
  • सिक्किम
  • उत्तराखंड

इसके अलावा दिल्ली के कुछ खास क्षेत्रों जैसे एनडीएमसी और कैंटोनमेंट बोर्ड में भी यह काम जारी है।

 

डेटा की सुरक्षा कितनी है?

सरकार ने साफ कहा है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। यह डेटा केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और विकास योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी सार्वजनिक न हो।

 

क्यों जरूरी है जनगणना?

जनगणना सिर्फ आंकड़े जुटाने का काम नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसके जरिए सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि –

  • किस क्षेत्र में कितनी आबादी है
  • लोगों की आर्थिक स्थिति क्या है
  • किन इलाकों में सुविधाओं की कमी है

इसी आधार पर सरकार योजनाएं बनाती है और संसाधनों का सही इस्तेमाल करती है।

 

लोगों की भागीदारी क्यों जरूरी?

इस पूरी प्रक्रिया की सफलता लोगों के सहयोग पर निर्भर करती है। अगर लोग सही जानकारी देंगे और गणनाकर्मियों का सहयोग करेंगे, तभी सटीक डेटा मिल पाएगा।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और जानकारी देने में कोई हिचकिचाहट न रखें।

 

क्या बदल सकता है इस बार?

इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है –

  • पहली बार डिजिटल और पारंपरिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल
  • मोबाइल ऐप के जरिए डेटा संग्रह
  • लोगों को खुद जानकारी भरने की सुविधा
  • तेजी से डेटा प्रोसेसिंग

ये सभी बदलाव आने वाले समय में जनगणना की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल सकते हैं।

 

निष्कर्ष:

जनगणना 2027 भारत के लिए सिर्फ एक नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से यह काम ज्यादा तेज, आसान और सटीक बनने की उम्मीद है।

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