अचानक मोबाइल में सायरन और मैसेज क्यों आया – क्या यह किसी खतरे का संकेत था या सिर्फ एक टेस्ट?

शनिवार की सुबह करीब 11:45 बजे देशभर में लाखों लोगों के मोबाइल फोन अचानक बज उठे। फोन से तेज सायरन जैसी आवाज आई, स्क्रीन पर एक मैसेज फ्लैश हुआ और उसके बाद वही मैसेज ऑडियो के रूप में भी सुनाई दिया। इस अचानक अलर्ट ने कई लोगों को चौंका दिया। कुछ लोग घबरा गए, तो कई लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर यह क्या हो रहा है।

siren and message suddenly appear on the mobile

हालांकि थोड़ी ही देर में सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया कि यह किसी खतरे की चेतावनी नहीं, बल्कि एक टेस्ट था। यह अलर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किए जा रहे इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट सिस्टम के परीक्षण का हिस्सा था।

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क्या हुआ था उस समय?

शनिवार को एक तय समय पर देश के कई बड़े शहरों और राज्यों की राजधानियों में मोबाइल फोन पर एक साथ अलर्ट भेजा गया। इस अलर्ट के दौरान –

  • पहले मोबाइल में तीन बार तेज बीप या सायरन जैसी आवाज आई
  • उसके बाद स्क्रीन पर एक मैसेज दिखाई दिया
  • फिर उसी मैसेज को ऑडियो के रूप में भी सुनाया गया
  • मैसेज हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में भी था
  • यह मैसेज फोन के इनबॉक्स में सेव नहीं हुआ, बल्कि एक फ्लैश अलर्ट था

इस तरह का अलर्ट आम SMS से अलग होता है, इसलिए लोगों को यह थोड़ा अलग और असामान्य लगा।

 

क्यों किया गया यह टेस्ट?

सरकार ने बताया कि यह एक ट्रायल था, जिसका मकसद यह जांचना था कि किसी आपात स्थिति में लोगों तक तुरंत सूचना पहुंचाई जा सकती है या नहीं। इस सिस्टम के जरिए भविष्य में भूकंप, बाढ़, चक्रवात या किसी अन्य आपदा के समय लोगों को तुरंत चेतावनी दी जा सकेगी।

सरकार ने इससे पहले ही लोगों को सूचना दे दी थी कि ऐसा टेस्ट होने वाला है और घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी अचानक अलर्ट आने से कई लोग असहज महसूस कर बैठे।

 

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

यह अलर्ट सिस्टम एक खास तकनीक पर आधारित है, जिसे सेल ब्रॉडकास्ट (Cell Broadcast) कहा जाता है। इसमें किसी एक-एक नंबर पर मैसेज भेजने की बजाय, एक पूरे इलाके के सभी मोबाइल फोन पर एक साथ मैसेज भेजा जाता है।

इस तकनीक की खास बातें हैं –

  • एक साथ लाखों लोगों तक संदेश पहुंच सकता है
  • इंटरनेट की जरूरत नहीं होती
  • नेटवर्क कवरेज में मौजूद सभी फोन पर अलर्ट पहुंचता है
  • यह सामान्य SMS से तेज और ज्यादा असरदार होता है

यही वजह है कि आपदा के समय यह सिस्टम बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।

 

SACHET सिस्टम क्या है?

भारत में इस तरह के अलर्ट भेजने के लिए ‘SACHET’ नाम का एक खास सिस्टम तैयार किया गया है। इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) ने विकसित किया है। यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है।

इसका मकसद है कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को रियल टाइम यानी तुरंत सूचना दी जा सके। यह सिस्टम अब देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा चुका है।

 

पहले भी भेजे जा चुके हैं अलर्ट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिस्टम का इस्तेमाल पहले भी कई बार किया जा चुका है। खासकर मौसम से जुड़ी चेतावनियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान इसका उपयोग हुआ है।

अब तक इस सिस्टम के जरिए 19 से ज्यादा भाषाओं में 134 अरब से अधिक अलर्ट मैसेज भेजे जा चुके हैं। इससे पता चलता है कि यह सिस्टम पहले से ही बड़े स्तर पर काम कर रहा है।

 

लोगों को क्यों लगा अजीब?

इस बार का अलर्ट थोड़ा अलग था क्योंकि इसमें सिर्फ मैसेज ही नहीं, बल्कि सायरन और ऑडियो भी शामिल था। आमतौर पर लोग ऐसे अलर्ट के आदी नहीं हैं, इसलिए अचानक आवाज और मैसेज देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है।

इसके अलावा, यह मैसेज फोन के इनबॉक्स में सेव नहीं हुआ, जिससे कई लोगों को लगा कि यह कोई तकनीकी गड़बड़ी है या कोई खतरे का संकेत है।

 

क्या भविष्य में ऐसे अलर्ट मिलेंगे?

सरकार का कहना है कि ऐसे टेस्ट आगे भी किए जा सकते हैं, ताकि सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके। साथ ही, अगर भविष्य में कोई बड़ी आपदा आती है, तो इसी सिस्टम के जरिए लोगों को तुरंत चेतावनी दी जाएगी।

इसलिए अगर आगे कभी ऐसा अलर्ट आए, तो घबराने की बजाय मैसेज को ध्यान से पढ़ना और समझना ज्यादा जरूरी होगा।

 

निष्कर्ष:

शनिवार को आया मोबाइल अलर्ट किसी खतरे का संकेत नहीं था, बल्कि एक जरूरी अभ्यास था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपात स्थिति में देश के हर नागरिक तक सही समय पर जानकारी पहुंच सके।

आज के समय में जब प्राकृतिक आपदाएं अचानक आ सकती हैं, ऐसे सिस्टम लोगों की जान बचाने में बहुत अहम भूमिका निभा सकते हैं।