FIFA 2026 ब्रॉडकास्टिंग संकट: दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला – क्या भारत में नहीं देख पाएंगे वर्ल्ड कप?

दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 की शुरुआत में अब मुश्किल से कुछ ही हफ्ते बचे हैं। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में 11 जून से 19 जुलाई 2026 तक होने वाले इस टूर्नामेंट को लेकर पूरी दुनिया में उत्साह है। लेकिन भारत में फुटबॉल प्रेमियों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है – आखिर इस बार वर्ल्ड कप देखा कहां जाएगा?

अब तक भारत में किसी भी टीवी चैनल या डिजिटल प्लेटफॉर्म ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स आधिकारिक तौर पर नहीं खरीदे हैं। यही वजह है कि मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें केंद्र सरकार और प्रसार भारती से यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि भारत में वर्ल्ड कप का प्रसारण हो, खासकर दूरदर्शन और डीडी स्पोर्ट्स जैसे फ्री प्लेटफॉर्म्स पर।

यह स्थिति इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल दर्शक बाजारों में से एक माना जाता है। भारत की टीम भले ही वर्ल्ड कप में नहीं खेल रही हो, लेकिन यहां करोड़ों लोग फुटबॉल देखते हैं और फीफा टूर्नामेंट को लेकर जबरदस्त उत्साह रहता है।

 

दिल्ली हाईकोर्ट क्यों पहुंचा मामला?

यह याचिका वकील अवधेश बैरवा ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल की है। सुनवाई के दौरान जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने केंद्र सरकार और Prasar Bharati को नोटिस जारी किया।

याचिका में कहा गया है कि फीफा वर्ल्ड कप को पहले ही “राष्ट्रीय महत्व का खेल आयोजन” माना जा चुका है। ऐसे में सरकार और सार्वजनिक प्रसारण संस्थाओं की जिम्मेदारी बनती है कि देश के लोगों तक इसका प्रसारण पहुंचे।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि अगर करोड़ों भारतीय फुटबॉल फैंस इस टूर्नामेंट को नहीं देख पाते, तो यह सूचना तक पहुंच के अधिकार पर असर डाल सकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि प्रसार भारती के पास पहले से ऐसी तकनीकी क्षमता मौजूद है जिससे डीडी स्पोर्ट्स, डीडी फ्री डिश और OTT प्लेटफॉर्म WAVES के जरिए टूर्नामेंट दिखाया जा सकता है।

 

आखिर कोई कंपनी राइट्स खरीद क्यों नहीं रही?

सबसे बड़ा कारण पैसे और कमाई का गणित माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फीफा ने शुरुआत में भारत के लिए 2026 और 2030 वर्ल्ड कप के मीडिया राइट्स की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर रखी थी। जब कंपनियों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई, तो कीमत घटाकर लगभग 35 मिलियन डॉलर कर दी गई। इसके बावजूद कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया।

भारत ही नहीं, चीन, श्रीलंका, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी अभी तक स्थिति साफ नहीं है। अगर यही हाल रहा, तो दुनिया के अरबों दर्शकों तक वर्ल्ड कप पहुंचने में दिक्कत हो सकती है।

 

भारतीय समय के हिसाब से मुश्किल में फंसा टूर्नामेंट

ब्रॉडकास्टर्स की सबसे बड़ी चिंता मैचों की टाइमिंग है। चूंकि टूर्नामेंट अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में खेला जाएगा, इसलिए ज्यादातर मुकाबले भारतीय समय के अनुसार देर रात या सुबह के समय होंगे।

104 मैचों वाले इस वर्ल्ड कप में सिर्फ कुछ मुकाबले ही भारतीय दर्शकों के लिए सुविधाजनक समय पर शुरू होंगे। फाइनल समेत कई बड़े मैच आधी रात के बाद खेले जाएंगे। कंपनियों को डर है कि इतनी देर रात दर्शकों की संख्या कम रहेगी, जिससे विज्ञापन से होने वाली कमाई भी घट सकती है।

भारत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग पूरी तरह विज्ञापन आधारित मॉडल पर चलती है। अगर दर्शक कम होंगे तो कंपनियों के लिए महंगे राइट्स खरीदना घाटे का सौदा बन सकता है।

FIFA 2026 broadcasting crisis

क्रिकेट का दबदबा भी बड़ी वजह

भारत में खेल बाजार पर क्रिकेट का जबरदस्त असर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के स्पोर्ट्स मार्केट का लगभग 89 प्रतिशत हिस्सा क्रिकेट के पास है। बाकी सभी खेलों के लिए सिर्फ 11 प्रतिशत बजट बचता है।

इस बार फीफा वर्ल्ड कप की टाइमिंग भी ऐसी है कि यह आईपीएल खत्म होने के तुरंत बाद शुरू हो रहा है। बड़ी कंपनियां पहले ही आईपीएल में भारी निवेश कर चुकी होती हैं। ऐसे में फुटबॉल के लिए अलग से सैकड़ों करोड़ खर्च करना कई ब्रॉडकास्टर्स को जोखिम भरा लग रहा है।

2022 वर्ल्ड कप के दौरान वायकॉम18 ने राइट्स खरीदे थे और मैच मुफ्त में दिखाए गए थे। उससे पहले सोनी जैसे नेटवर्क भी फीफा टूर्नामेंट पर बड़ा निवेश कर चुके हैं। लेकिन अब बाजार बदल चुका है। मीडिया कंपनियां खर्च को लेकर पहले से ज्यादा सावधान हो गई हैं।

 

क्या भारत में फ्री में मैच देखने की आदत भी समस्या है?

एक और बड़ी वजह भारत का सब्सक्रिप्शन मॉडल माना जा रहा है। भारत में बड़ी संख्या में लोग खेल देखने के लिए अलग से पैसे खर्च नहीं करना चाहते। मुफ्त स्ट्रीमिंग की आदत ने कंपनियों के लिए कमाई का मॉडल कमजोर कर दिया है।

2022 में कई लोगों ने फीफा वर्ल्ड कप बिना किसी सब्सक्रिप्शन फीस के देखा था। अब अगर कोई कंपनी करोड़ों डॉलर खर्च करके राइट्स खरीदती है, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वह निवेश की भरपाई कैसे करेगी।

यही कारण है कि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनियां आखिरी समय तक इंतजार कर रही हैं ताकि फीफा कीमत और घटाए।

 

अगर कोई राइट्स नहीं खरीदे तो क्या होगा?

अगर भारत में कोई कंपनी आधिकारिक प्रसारण अधिकार नहीं खरीदती, तो फीफा के सामने कुछ विकल्प बचेंगे। पहला विकल्प यह है कि फीफा अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म FIFA+ पर मैचों की स्ट्रीमिंग करे।

दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि सरकार हस्तक्षेप करे और दूरदर्शन के जरिए टूर्नामेंट दिखाने का रास्ता निकाले। हालांकि इसके लिए भी तकनीकी और व्यावसायिक साझेदारी की जरूरत पड़ सकती है।

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि आखिरी समय में कोई बड़ा मीडिया समूह कम कीमत पर डील कर सकता है। क्योंकि भारत जैसे बड़े बाजार को पूरी तरह छोड़ देना फीफा और ब्रॉडकास्टर्स दोनों के लिए नुकसानदायक होगा।

 

भारत में फुटबॉल का क्रेज कितना बड़ा है?

हालांकि भारत फीफा वर्ल्ड कप में खेलने वाली टीमों में शामिल नहीं है, लेकिन यहां फुटबॉल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। खासकर पश्चिम बंगाल, केरल, गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में फुटबॉल का जबरदस्त जुनून देखने को मिलता है।

2022 कतर वर्ल्ड कप के दौरान भारत फीफा के सबसे बड़े डिजिटल एंगेजमेंट मार्केट्स में शामिल था। बड़ी संख्या में भारतीय दर्शकों ने ऑनलाइन मैच देखे, सोशल मीडिया पर हिस्सा लिया और स्टेडियम तक पहुंचे।

All India Football Federation यानी AIFF के अधिकारियों का भी कहना है कि भारत जैसे विशाल बाजार को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। उनका मानना है कि आखिरी समय में कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा।

 

क्या सरकार हस्तक्षेप कर सकती है?

भारत में कुछ खेल आयोजनों को राष्ट्रीय महत्व का माना जाता है। ऐसे मामलों में सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि आम लोगों तक मैचों का प्रसारण पहुंचे। इसी आधार पर अदालत में भी दलील दी गई है।

अगर केंद्र सरकार और प्रसार भारती चाहें, तो डीडी स्पोर्ट्स या डीडी फ्री डिश जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों दर्शकों तक वर्ल्ड कप पहुंचाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए फीफा और किसी प्रसारण साझेदार के बीच समझौता जरूरी होगा।

 

क्या भारतीय फैंस आखिरी समय तक इंतजार करते रहेंगे?

फिलहाल यही सबसे बड़ा सवाल है। टूर्नामेंट शुरू होने में बहुत कम समय बचा है, लेकिन भारत में अब तक न टीवी ब्रॉडकास्टर तय हुआ है और न ही कोई आधिकारिक डिजिटल पार्टनर सामने आया है।

इस अनिश्चितता ने करोड़ों फुटबॉल प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर लगातार लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इस बार फीफा वर्ल्ड कप देखा कहां जाएगा।

एक तरफ अदालत में सुनवाई चल रही है, दूसरी तरफ ब्रॉडकास्टर्स और फीफा के बीच बातचीत की उम्मीद भी बनी हुई है। लेकिन अगर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान भारत जैसे बड़े बाजार में अजीब स्थिति पैदा हो सकती है।