अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सीनेट ने डोनाल्ड ट्रंप की पसंद के उम्मीदवार केविन वॉर्श को नए फेडरल रिजर्व चेयरमैन के तौर पर मंजूरी दे दी है। सीनेट में हुए मतदान में वॉर्श को 54 वोट मिले, जबकि 45 सांसदों ने उनके खिलाफ मतदान किया।
वॉर्श अब जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल शुक्रवार को खत्म हो रहा है। पॉवेल और ट्रंप के बीच ब्याज दरों को लेकर कई बार खुला टकराव देखने को मिला था। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या केविन वॉर्श ट्रंप की आर्थिक सोच के मुताबिक काम करेंगे या फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता बनाए रखेंगे?
बहुत कम अंतर से मिली मंजूरी
केविन वॉर्श की नियुक्ति को अमेरिकी राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है। 1977 के बाद यह सबसे कम अंतर वाला वोट रहा, जिसमें किसी फेड चेयर को मंजूरी मिली हो।
दिलचस्प बात यह रही कि लगभग पूरा मतदान पार्टी लाइन पर हुआ। ज्यादातर रिपब्लिकन सांसदों ने वॉर्श का समर्थन किया, जबकि डेमोक्रेट सांसद उनके खिलाफ रहे। केवल पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने वॉर्श के पक्ष में वोट दिया।
इस नतीजे ने यह भी दिखा दिया कि अमेरिका में आर्थिक संस्थाओं की नियुक्तियां अब पहले से ज्यादा राजनीतिक होती जा रही हैं।
मुश्किल समय में संभालेंगे जिम्मेदारी
वॉर्श ऐसे समय में फेडरल रिजर्व की कमान संभाल रहे हैं जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है।
एक तरफ अमेरिका-ईरान और पश्चिम एशिया के तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में महंगाई भी लगातार ऊपर जा रही है। अप्रैल में महंगाई दर 3.8% तक पहुंच गई, जो मई 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
तेल की कीमतों में उछाल का बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना माना जा रहा है। इसी रास्ते से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई करता है। सप्लाई प्रभावित होने से ऊर्जा की कीमतें बढ़ीं और इसका असर आम लोगों के खर्च पर भी दिखाई देने लगा।
ट्रंप क्या चाहते हैं?
डोनाल्ड ट्रंप लगातार चाहते रहे हैं कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करे। उनका मानना है कि कम ब्याज दरों से कारोबार बढ़ेगा, निवेश आएगा और अर्थव्यवस्था को तेजी मिलेगी।
लेकिन फेडरल रिजर्व का काम सिर्फ विकास को बढ़ावा देना नहीं होता। उसे महंगाई को भी नियंत्रित रखना पड़ता है। आमतौर पर जब महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें घटाने के बजाय स्थिर रखता है या बढ़ा देता है, ताकि बाजार में पैसा कम जाए और कीमतों पर दबाव घटे।
इसी वजह से कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अभी ब्याज दरों में कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है।
क्या वॉर्श ट्रंप की बात मानेंगे?
सीनेट में सुनवाई के दौरान केविन वॉर्श से यही सबसे बड़ा सवाल पूछा गया। उनसे पूछा गया कि क्या वे ट्रंप के दबाव में फैसले लेंगे?
इस पर वॉर्श ने कहा कि वे किसी के “कठपुतली” नहीं बनेंगे और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता की रक्षा करेंगे।
हालांकि डेमोक्रेट नेताओं को उनकी बात पर भरोसा नहीं है। सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा कि वॉर्श इस पद के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं और उन्हें सिर्फ ट्रंप की नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए चुना गया है।

पहले भी रह चुके हैं फेड में
केविन वॉर्श इससे पहले भी फेडरल रिजर्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में काम कर चुके हैं। वे 2006 से 2011 तक इस संस्था का हिस्सा रहे थे।
उनका अनुभव मजबूत माना जाता है, लेकिन उनके हाल के बयानों ने बहस छेड़ दी है। दिलचस्प बात यह है कि 2024 में जब जो बाइडेन राष्ट्रपति थे, तब वॉर्श ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में थे। लेकिन ट्रंप के सत्ता में आने के बाद उन्होंने दरें घटाने की वकालत शुरू कर दी।
आलोचकों का कहना है कि उनके रुख में आया यह बदलाव राजनीतिक दबाव की तरफ इशारा करता है।
फेड की स्वतंत्रता पर बढ़ती चिंता
अमेरिका में फेडरल रिजर्व को एक स्वतंत्र संस्था माना जाता है। इसका मतलब यह है कि सरकार सीधे उसके फैसलों में दखल नहीं देती।
लेकिन पिछले एक साल में ट्रंप प्रशासन और फेड के बीच तनाव बढ़ा है। ट्रंप पहले भी जेरोम पॉवेल को कई बार सार्वजनिक रूप से निशाना बना चुके हैं। उन्होंने पॉवेल को “अयोग्य” तक कहा था क्योंकि वे ब्याज दरें तेजी से कम नहीं कर रहे थे।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने फेड गवर्नर लिसा कुक को हटाने की कोशिश भी की थी। पॉवेल के खिलाफ न्याय विभाग से जांच भी करवाई गई थी। इन घटनाओं ने फेड की स्वतंत्रता को लेकर चिंता और बढ़ा दी।
अब आगे क्या होगा?
फेडरल रिजर्व की अगली बैठक 16-17 जून को होगी और यह पहली बैठक होगी जिसकी अध्यक्षता केविन वॉर्श करेंगे।
फिलहाल ज्यादातर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ब्याज दरों में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा। बाजार पर नजर रखने वाले CME FedWatch के मुताबिक अगली बैठक में दरें स्थिर रहने की संभावना करीब 97% है।
अभी अमेरिका में ब्याज दरें 3.50% से 3.75% के बीच हैं और माना जा रहा है कि 2026 के बाकी समय में भी यही स्तर बना रह सकता है।
महंगाई क्यों बढ़ रही है?
अमेरिका में महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी है। तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, बिजली और रोजमर्रा के सामान की लागत बढ़ जाती है।
इसके अलावा:
- खाने-पीने की चीजें महंगी हुई हैं
- घरों का किराया बढ़ा है
- हवाई यात्रा का खर्च बढ़ा है
इन सबका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
वॉर्श के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि वॉर्श के लिए सबसे कठिन काम महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना होगा।
अगर वे ब्याज दरें घटाते हैं तो महंगाई और बढ़ सकती है। लेकिन अगर दरें ऊंची रखते हैं तो ट्रंप नाराज हो सकते हैं और अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
यही वजह है कि कई विश्लेषक इसे “मिशन इम्पॉसिबल” जैसा काम बता रहे हैं।
अंतिम मंजूरी बाकी
सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब केविन वॉर्श की नियुक्ति अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाएगी। इसके बाद वे आधिकारिक तौर पर फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन बन जाएंगे।

