पाकिस्तान ने चीन में जारी किया ‘पांडा बॉन्ड’, जुटाए 25 करोड़ डॉलर -जानें क्या है पांडा बॉन्ड का पूरा खेल ?

पाकिस्तान ने पहली बार चीन के घरेलू बॉन्ड बाजार में “पांडा बॉन्ड” जारी कर बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। इसके जरिए पाकिस्तान ने 25 करोड़ डॉलर यानी करीब 1.75 अरब युआन जुटाए हैं। खास बात यह है कि ऐसा करने वाला पाकिस्तान दक्षिण एशिया का पहला देश बन गया है। पाकिस्तान सरकार इसे अपनी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि बता रही है।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने बीजिंग में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में कहा कि यह सिर्फ एक बॉन्ड जारी करना नहीं, बल्कि चीन के साथ लंबे समय की आर्थिक साझेदारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।

 

आखिर क्या होता है पांडा बॉन्ड?

पांडा बॉन्ड ऐसे बॉन्ड होते हैं जिन्हें कोई विदेशी सरकार या संस्था चीन के घरेलू बाजार में चीनी मुद्रा युआन में जारी करती है। आसान भाषा में समझें तो पाकिस्तान ने चीन के निवेशकों से चीन की मुद्रा में पैसा उधार लिया है।

पिछले दो वर्षों से पाकिस्तान इस योजना पर काम कर रहा था। चीन के रेगुलेटर, वित्तीय संस्थानों और विकास एजेंसियों के साथ बातचीत के बाद अब जाकर यह पहला बॉन्ड जारी किया गया।

पाकिस्तान ने कुल 7.2 अरब युआन यानी लगभग 1 अरब डॉलर के पांडा बॉन्ड कार्यक्रम की शुरुआत की है। अभी इसका पहला हिस्सा जारी किया गया है, जिसकी रकम 25 करोड़ डॉलर के बराबर है।

 

निवेशकों ने उम्मीद से ज्यादा पैसा लगाने की इच्छा दिखाई

पाकिस्तान सरकार के अनुसार इस बॉन्ड को निवेशकों की ओर से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। पाकिस्तान के वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने बताया कि इस बॉन्ड के लिए 8.8 अरब युआन से ज्यादा की मांग आई।

यानी जितना बॉन्ड पाकिस्तान ने जारी किया, उससे पांच गुना ज्यादा निवेशकों ने पैसा लगाने की इच्छा जताई। इसे ओवरसब्सक्रिप्शन कहा जाता है।

सरकार का कहना है कि यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में बढ़ते भरोसे का संकेत है। निवेशकों ने पाकिस्तान के आर्थिक सुधारों और कर्ज चुकाने की क्षमता पर विश्वास दिखाया है।

 

कितनी ब्याज दर पर मिला पैसा?

पाकिस्तान ने यह बॉन्ड 2.5 प्रतिशत ब्याज दर पर जारी किया है और इसकी अवधि तीन साल रखी गई है। यह पाकिस्तान का पहला युआन आधारित सरकारी बॉन्ड है।

विशेषज्ञों के मुताबिक 2.5 प्रतिशत की ब्याज दर को काफी प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। पाकिस्तान इस समय आर्थिक दबाव से गुजर रहा है, ऐसे में कम ब्याज दर पर फंड जुटाना उसके लिए राहत की बात मानी जा रही है।

 

पैसे का इस्तेमाल कहां होगा?

पाकिस्तान सरकार ने बताया कि यह उसका पहला “सस्टेनेबल पांडा बॉन्ड” है। इसका मतलब है कि जुटाई गई रकम का उपयोग पानी, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों की परियोजनाओं में किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि वह इस पैसे का इस्तेमाल ऐसे कामों में करना चाहती है जिनसे आम लोगों को फायदा मिले और लंबे समय तक आर्थिक विकास मजबूत हो।

Pakistan issues Panda Bonds in China

चीन के साथ बढ़ती आर्थिक साझेदारी

पाकिस्तान लंबे समय से चीन को अपना सबसे करीबी आर्थिक साझेदार मानता है। चीन पहले से ही पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC इसका बड़ा उदाहरण है।

अब पांडा बॉन्ड के जरिए दोनों देशों के बीच वित्तीय सहयोग और मजबूत होता दिख रहा है।

सिंगापुर, अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय पाकिस्तान अब चीन के घरेलू पूंजी बाजार तक पहुंच बनाना चाहता है। इससे उसे भविष्य में और फंड जुटाने का रास्ता मिल सकता है।

 

IMF कार्यक्रम का भी किया जिक्र

वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के सुधार कार्यक्रम पर काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक सुधारों की वजह से देश में स्थिरता आई है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और बढ़ते कर्ज से जूझ रहा है। ऐसे में IMF कार्यक्रम उसके लिए काफी अहम माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि अब वह सिर्फ संकट संभालने की स्थिति से आगे बढ़कर लंबे समय की आर्थिक रणनीति पर काम कर रही है।

 

पाकिस्तान क्यों मान रहा इसे बड़ी उपलब्धि?

पाकिस्तान इस बॉन्ड को कई कारणों से बड़ी सफलता बता रहा है।

पहला कारण यह है कि उसे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े पूंजी बाजार यानी चीन के घरेलू बाजार तक पहुंच मिली है।

दूसरा, निवेशकों की भारी मांग ने यह संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पाकिस्तान को लेकर थोड़ा भरोसा दिखा रहे हैं।

तीसरा, पाकिस्तान अब डॉलर आधारित कर्ज पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। युआन में बॉन्ड जारी करना उसकी फंडिंग के विकल्प बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

 

क्या इससे पाकिस्तान की आर्थिक हालत सुधर जाएगी?

हालांकि पाकिस्तान सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एक बॉन्ड जारी होने से आर्थिक संकट खत्म नहीं होगा।

देश पर पहले से भारी विदेशी कर्ज है और उसे लगातार नए फंड की जरूरत पड़ रही है। महंगाई, कमजोर मुद्रा और व्यापार घाटा अब भी पाकिस्तान की बड़ी समस्याएं हैं।

लेकिन यह जरूर माना जा रहा है कि चीन के बाजार में सफल एंट्री से पाकिस्तान को भविष्य में और निवेश जुटाने में मदद मिल सकती है।

 

एशियाई संस्थानों का भी मिला समर्थन

इस पांडा बॉन्ड कार्यक्रम को एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) का भी समर्थन मिला है। इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थोड़ी विश्वसनीयता मिली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान आर्थिक सुधारों को सही तरीके से लागू करता है, तो भविष्य में वह चीन के बाजार से और ज्यादा फंड जुटा सकता है।

 

आगे क्या होगा?

पाकिस्तान सरकार अब इसे सिर्फ शुरुआत बता रही है। उसका कहना है कि आने वाले समय में और बॉन्ड जारी किए जा सकते हैं। सरकार की कोशिश है कि विदेशी निवेशकों के बीच भरोसा बढ़े और देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे स्थिर हो।