कमाई 79 हजार करोड़, फिर भी रिकॉर्ड घाटा – जानें टाटा की एयर इंडिया में कहाँ हुई बड़ी चूक ?

टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया को लेकर उम्मीद थी कि कंपनी तेजी से मुनाफे की राह पर लौटेगी, लेकिन अब सामने आए आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया को करीब 2.8 अरब डॉलर यानी लगभग 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। यह 2022 में टाटा ग्रुप के नियंत्रण में आने के बाद कंपनी का सबसे बड़ा सालाना घाटा माना जा रहा है।

यह जानकारी एयर इंडिया में हिस्सेदारी रखने वाली सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) ने अपनी सालाना वित्तीय रिपोर्ट में दी। रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया को इस दौरान 3.56 अरब सिंगापुर डॉलर का नुकसान हुआ।

एयर इंडिया के सामने बढ़ती लागत, महंगा ईंधन, एयरस्पेस प्रतिबंध और सप्लाई चेन की दिक्कतें बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। इसी वजह से एयरलाइन ने अगस्त 2026 तक कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती और कुछ रूट्स को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला भी किया है।

 

टाटा ग्रुप के बाद सबसे बड़ा नुकसान

साल 2022 में टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया का नियंत्रण वापस लिया था। इसके बाद कंपनी ने बड़े बदलावों की शुरुआत की। नए विमान ऑर्डर किए गए, केबिन अपग्रेड की योजना बनी और सर्विस सुधारने पर जोर दिया गया। लेकिन इसके बावजूद एयर इंडिया अभी भी भारी आर्थिक दबाव में है।

सिंगापुर एयरलाइंस की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का घाटा अब तक का सबसे बड़ा रहा। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को मिलाकर कुल नुकसान 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रहने का अनुमान है।

एविएशन सेक्टर के जानकारों का कहना है कि एयर इंडिया अभी बड़े ट्रांसफॉर्मेशन दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारी निवेश, पुराने विमानों की मरम्मत और नेटवर्क विस्तार की वजह से लागत लगातार बढ़ रही है।

 

सिंगापुर एयरलाइंस ने क्या कहा

सिंगापुर एयरलाइंस एयर इंडिया ग्रुप में 25.1% हिस्सेदारी रखती है। नवंबर 2024 में विस्तारा और एयर इंडिया के मर्जर के बाद यह साझेदारी और मजबूत हुई थी।

कंपनी ने साफ कहा कि वह एयर इंडिया में अपने निवेश को लेकर अब भी प्रतिबद्ध है। SIA के मुताबिक भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में से एक है और एयर इंडिया इस रणनीति का अहम हिस्सा बनी रहेगी।

कंपनी ने कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एयर इंडिया के लंबे बदलाव कार्यक्रम पर काम कर रही है। इसमें बेड़े का आधुनिकीकरण, ग्राहक अनुभव बेहतर करना और संचालन मजबूत बनाना शामिल है।

 

एयर इंडिया को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा

रिपोर्ट में कई बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया गया है। इनमें सबसे बड़ा असर एयरस्पेस प्रतिबंधों और महंगे जेट फ्यूल का बताया गया।

पाकिस्तान और पश्चिम एशिया के एयरस्पेस में प्रतिबंधों की वजह से कई उड़ानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इससे ईंधन खर्च बढ़ गया है और उड़ानों का समय भी ज्यादा लग रहा है।

इसके अलावा एविएशन इंडस्ट्री में सप्लाई चेन संकट भी जारी है। नए विमान और स्पेयर पार्ट्स समय पर नहीं मिल पा रहे। इसका असर एयरलाइन के संचालन और रखरखाव पर पड़ रहा है।

कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर सीटों की मांग होने के बावजूद बढ़ती लागत की वजह से एयर इंडिया के लिए उन्हें लाभ में चलाना मुश्किल हो रहा है।

Tata Air India still record loss

लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती

एयर इंडिया ने हाल ही में अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में अस्थायी बदलाव का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा कि अगस्त 2026 तक कई विदेशी रूट्स पर उड़ानों की संख्या घटाई जाएगी।

कुछ रूट्स पर सेवाएं पूरी तरह अस्थायी रूप से बंद भी की जा रही हैं। इनमें दिल्ली-शिकागो रूट भी शामिल है।

एयरलाइन का कहना है कि यह कदम यात्रियों को अंतिम समय में होने वाली परेशानियों से बचाने और नेटवर्क को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है।

कंपनी के मुताबिक अगर अभी संचालन को संतुलित नहीं किया गया तो अचानक फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

 

सिंगापुर एयरलाइंस के मुनाफे पर भी असर

एयर इंडिया के घाटे का असर सिंगापुर एयरलाइंस के वित्तीय नतीजों पर भी पड़ा है। कंपनी का शुद्ध लाभ इस साल करीब 57% गिर गया।

सिंगापुर एयरलाइंस ने बताया कि पिछले साल विस्तारा-एयर इंडिया मर्जर के दौरान उसे एक बार का बड़ा अकाउंटिंग फायदा मिला था, जो इस बार नहीं मिला। दूसरी तरफ इस साल एयर इंडिया के पूरे साल के घाटे को रिकॉर्ड करना पड़ा।

कंपनी के अनुसार पिछले वर्ष उसे सहयोगी कंपनियों से मुनाफा मिला था, लेकिन इस बार एयर इंडिया के घाटे की वजह से स्थिति उलट गई।

 

क्या एयर इंडिया की हालत और बिगड़ सकती है?

फिलहाल एयर इंडिया के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे अपने पुराने सिस्टम को बदलना है, दूसरी तरफ बाजार में इंडिगो जैसी मजबूत प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ रहा है।

हालांकि कंपनी लगातार नए विमान जोड़ रही है और सर्विस सुधारने की कोशिश कर रही है। लेकिन एविएशन सेक्टर में मुनाफा कमाना आसान नहीं माना जाता। ईंधन कीमतों में थोड़ा सा बदलाव भी एयरलाइंस की कमाई पर बड़ा असर डालता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया को स्थिर मुनाफे तक पहुंचने में अभी कुछ और साल लग सकते हैं। कंपनी का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान लंबा है और इसके परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देंगे।

 

यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती का असर यात्रियों पर पड़ सकता है। कुछ रूट्स पर टिकट महंगे हो सकते हैं और सीटों की उपलब्धता कम हो सकती है।

लंबे एयरस्पेस रूट्स की वजह से यात्रा समय भी बढ़ सकता है। इसके अलावा जेट फ्यूल की ऊंची कीमतें एयरलाइंस के खर्च को बढ़ा रही हैं, जिसका असर किराए पर भी पड़ सकता है।

हालांकि एयर इंडिया का कहना है कि उसका मुख्य फोकस यात्रियों को बेहतर और स्थिर सेवा देना है।

 

आगे की राह क्या होगी

एयर इंडिया फिलहाल बदलाव के सबसे बड़े दौर से गुजर रही है। टाटा ग्रुप कंपनी को वैश्विक स्तर की एयरलाइन बनाने की कोशिश में लगा है। नए विमान, बेहतर केबिन, डिजिटल सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय विस्तार इसी योजना का हिस्सा हैं।