क्या ASML के साथ Tata की डील भारत को सेमीकंडक्टर सुपरपावर बना पाएगी?

भारत अब सिर्फ मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि दुनिया के लिए चिप बनाने वाला बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कोशिश को नई ताकत मिली है Tata Electronics और डच कंपनी ASML के बीच हुए बड़े समझौते से।

16 मई को हुई इस साझेदारी को प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीदरलैंड यात्रा के दौरान अंतिम रूप दिया गया। इस समझौते का मकसद गुजरात के धोलेरा में बन रही भारत की पहली कमर्शियल 300 mm सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट को मजबूत तकनीकी सहायता देना है।

यह सिर्फ एक कारोबारी डील नहीं मानी जा रही, बल्कि भारत के “चिप मिशन” के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। क्योंकि ASML दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है जिनकी मशीनों के बिना आधुनिक सेमीकंडक्टर बनाना लगभग नामुमकिन माना जाता है।

 

आखिर यह साझेदारी इतनी खास क्यों है?

आज दुनिया की लगभग हर आधुनिक तकनीक  –  स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कार, AI सिस्टम, डेटा सेंटर और रक्षा उपकरण  –  सेमीकंडक्टर चिप्स पर निर्भर हैं। लेकिन इन चिप्स के निर्माण में सबसे मुश्किल और महंगी प्रक्रिया होती है “लिथोग्राफी”।

यहीं ASML की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। यह कंपनी दुनिया की सबसे एडवांस लिथोग्राफी मशीनें बनाती है और इस क्षेत्र में उसका लगभग एकाधिकार माना जाता है। अमेरिका, ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसी बड़ी टेक अर्थव्यवस्थाएं भी ASML की तकनीक पर निर्भर हैं।

अब यही कंपनी भारत में Tata Electronics के साथ मिलकर काम करेगी। समझौते के तहत ASML अपनी एडवांस लिथोग्राफी तकनीक और समाधान धोलेरा प्लांट में लगाएगी ताकि फैक्ट्री बिना रुकावट और अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता के साथ काम कर सके।

 

धोलेरा में क्या बनने जा रहा है?

गुजरात के धोलेरा में Tata Electronics लगभग 91,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। यह भारत का पहला बड़ा 300 mm वेफर फैब्रिकेशन प्लांट होगा।

यहां बनने वाली चिप्स का इस्तेमाल कई बड़े सेक्टरों में किया जाएगा, जैसे:

  • ऑटोमोबाइल
  • मोबाइल फोन
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स
  • हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग

भारत अभी अपनी जरूरत का अधिकांश सेमीकंडक्टर विदेशों से आयात करता है। ऐसे में यह प्लांट देश की आयात निर्भरता कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Tata deal with ASML make India a semiconductor superpower

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर देश के युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा करेगा और सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र को और तेजी से आगे बढ़ाएगी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि Tata और ASML की साझेदारी भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और भविष्य की तकनीकों में सहयोग बढ़ाएगी।

यह समझौता पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन की मौजूदगी में हुआ। यह भारत और यूरोप के बीच बढ़ते टेक्नोलॉजी सहयोग का भी संकेत माना जा रहा है।

 

सिर्फ फैक्ट्री नहीं, स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर

इस साझेदारी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों को ट्रेनिंग देना भी है।

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में काम करने के लिए बहुत विशेष तकनीकी ज्ञान की जरूरत होती है। इसलिए Tata Electronics और ASML मिलकर भारत में नई स्किल्स विकसित करने, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर भी काम करेंगे।

Tata Electronics के CEO और MD Randhir Thakur ने कहा कि ASML की विशेषज्ञता धोलेरा फैब को तेजी से शुरू करने और भारत में भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन तैयार करने में मदद करेगी।

वहीं ASML के CEO Christophe Fouquet ने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता सेमीकंडक्टर बाजार लंबे समय के सहयोग के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है और Tata Electronics अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की मजबूत स्थिति में है।

 

भारत के लिए यह डील कितनी अहम है?

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने चिप की भारी कमी देखी। कोरोना महामारी और वैश्विक तनावों के दौरान सप्लाई चेन टूटने से ऑटोमोबाइल से लेकर मोबाइल उद्योग तक प्रभावित हुए।

इसके बाद कई देशों ने फैसला किया कि उन्हें अपनी घरेलू चिप मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी। भारत भी इसी रणनीति पर काम कर रहा है।

सरकार का लक्ष्य 2032 तक भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। Tata-ASML समझौता उसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इससे भारत को तीन बड़े फायदे मिल सकते हैं:

  1. विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी
  2. लाखों नई हाई-टेक नौकरियां पैदा हो सकती हैं
  3. भारत वैश्विक टेक सप्लाई चेन में मजबूत जगह बना सकता है

 

PSMC के साथ भी कर चुकी है साझेदारी

Tata Electronics इससे पहले ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation (PSMC) के साथ भी समझौता कर चुकी है।

इस साझेदारी के जरिए कंपनी को 28nm, 40nm, 55nm, 90nm और 110nm प्रोसेस नोड टेक्नोलॉजी तक पहुंच मिलेगी। इसका मतलब है कि भारत में अलग-अलग जरूरतों के लिए कई तरह की चिप्स बनाई जा सकेंगी।

 

ASML को क्या फायदा होगा?

यह साझेदारी सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, ASML के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अभी कंपनी के बड़े बाजार ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन हैं। भारत में बढ़ती सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री उसे नया बड़ा बाजार दे सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का बड़ा केंद्र बन सकता है। ऐसे में ASML जैसी कंपनियां अभी से भारत में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाना चाहती हैं।

 

क्या भारत सच में चिप निर्माण की दुनिया में बड़ी ताकत बन पाएगा?

भारत के पास बड़ा बाजार है, युवा इंजीनियर हैं और सरकार का मजबूत समर्थन भी है। लेकिन सेमीकंडक्टर निर्माण बेहद कठिन और महंगा क्षेत्र माना जाता है। इसमें लगातार निवेश, उच्च तकनीक, स्थिर बिजली-पानी सप्लाई और कुशल मानव संसाधन की जरूरत होती है।

फिर भी Tata Electronics और ASML की यह साझेदारी दिखाती है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अब भारत को गंभीरता से देखने लगी हैं।