गुजरात के कच्छ तट पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। भारतीय तटरक्षक बल और गुजरात एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में समुद्र के रास्ते लाई जा रही 118 किलो कोकीन जब्त की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1180 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
इस कार्रवाई में विदेशी नागरिकों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी समुद्र में कूदकर फरार हो गया। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आखिर इतनी बड़ी ड्रग्स खेप भारत में किस नेटवर्क तक पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
गुजरात डीजीपी डॉ. केएलएन राव ने बताया कि यह ऑपरेशन पहले से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया। इंडियन कोस्ट गार्ड और गुजरात एटीएस कई दिनों से मुंद्रा पोर्ट और आसपास के समुद्री इलाके में नजर बनाए हुए थे। इसी दौरान एक संदिग्ध कंटेनर जहाज भारतीय समुद्री सीमा के पास दिखाई दिया, जिसके बाद कार्रवाई शुरू की गई।
ब्राजील से शुरू हुआ सफर, कई देशों से होकर पहुंचा गुजरात
जांच में सामने आया है कि यह जहाज दक्षिण अमेरिका से चला था। जहाज पहले ब्राजील पहुंचा, फिर कई लैटिन अमेरिकी देशों, मेक्सिको, अमेरिका और कराची होते हुए गुजरात के समुद्री क्षेत्र तक आया।
एजेंसियों को शक है कि इस पूरे रूट का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी के लिए किया गया ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके।
बताया जा रहा है कि जहाज मुंद्रा तट से करीब 5 नॉटिकल मील यानी लगभग साढ़े 9 किलोमीटर दूर लंगर डाले खड़ा था। कोस्ट गार्ड ने कई घंटों तक इसकी गतिविधियों पर नजर रखी। इसी दौरान अधिकारियों ने देखा कि जहाज से कुछ बैग समुद्र में फेंके जा रहे हैं।
इसके बाद कोस्ट गार्ड और एटीएस की टीम ने रात में ही जहाज को चारों तरफ से घेर लिया और अपने कब्जे में ले लिया।
समुद्र में कूदकर भागा एक आरोपी
छापेमारी के दौरान जहाज पर दो संदिग्ध लोग मौजूद थे। कार्रवाई होते देख एक आरोपी समुद्र में कूद गया और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। उसकी तलाश जारी है।
दूसरे आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया। उसकी पहचान जुम्मा नासिर उमर के रूप में हुई है, जो नाइजीरिया का रहने वाला बताया जा रहा है। पूछताछ में उससे कई अहम जानकारी मिलीं।
बाद में जांच एजेंसियों ने दो और विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया। इनमें क्लैविन चुकवुमा और ब्यारुहांगा जेम्स शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से एक तंजानिया और दूसरा युगांडा का नागरिक है।
जांच में यह भी सामने आया कि ड्रग्स की यह खेप दिल्ली के द्वारका इलाके तक पहुंचाई जानी थी। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भारत में इसका रिसीवर कौन था और यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था।

कोकीन आखिर होती क्या है?
कोकीन दुनिया के सबसे खतरनाक और महंगे नशों में से एक मानी जाती है। यह दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले कोका पौधे की पत्तियों से तैयार की जाती है।
यह एक तेज असर करने वाला नशीला पदार्थ है, जो इंसान के दिमाग और शरीर दोनों पर असर डालता है। कुछ लोग इसे सूंघकर लेते हैं, कुछ इंजेक्शन के जरिए और कुछ धुएं के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
कोकीन लेने के बाद इंसान को कुछ समय के लिए ज्यादा ऊर्जा, आत्मविश्वास और खुशी महसूस होती है। लेकिन इसका असर बहुत कम समय तक रहता है। असर खत्म होने के बाद व्यक्ति फिर उसी एहसास को पाने के लिए दोबारा ड्रग्स लेने लगता है। यही वजह है कि यह बेहद तेजी से लत में बदल जाती है।
क्रैक कोकीन क्या होती है?
कोकीन का एक और खतरनाक रूप “क्रैक कोकीन” कहलाता है। इसे प्रोसेस करके छोटे पत्थर जैसे टुकड़ों में तैयार किया जाता है।
जब इसे गर्म किया जाता है तो इसमें से “क्रैक” जैसी आवाज आती है, इसलिए इसे क्रैक कोकीन कहा जाता है। लोग इसे पाइप में जलाकर पीते हैं या तंबाकू और गांजे के साथ मिलाकर इस्तेमाल करते हैं।
इसका नशा बहुत तेज होता है लेकिन असर केवल कुछ मिनट तक ही रहता है। यही वजह है कि लोग बार-बार इसका इस्तेमाल करने लगते हैं।
कोकीन शरीर पर क्या असर डालती है?
डॉक्टरों के मुताबिक कोकीन सीधे दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती है, जो खुशी और उत्साह से जुड़ा होता है।
इसे लेने के बाद शरीर में डोपामिन नाम का केमिकल तेजी से बढ़ता है। इससे इंसान को अस्थायी खुशी महसूस होती है। लेकिन धीरे-धीरे दिमाग इसकी आदत डाल लेता है और फिर ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ने लगती है।
इसके कारण इंसान का व्यवहार बदलने लगता है। कई लोग गुस्सैल, बेचैन या शक करने वाले हो जाते हैं। कुछ मामलों में मानसिक संतुलन भी बिगड़ जाता है।
कोकीन के खतरनाक दुष्प्रभाव
कोकीन केवल नशा नहीं बल्कि जानलेवा खतरा भी है। इसका असर दिल, दिमाग और शरीर के कई हिस्सों पर पड़ता है।
इसके इस्तेमाल से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और सांस रुकने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। ज्यादा मात्रा लेने पर इंसान की मौत भी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके लंबे इस्तेमाल से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जैसे-
- दिल की बीमारी
- स्ट्रोक
- फेफड़ों का संक्रमण
- मानसिक तनाव और डिप्रेशन
- याददाश्त कमजोर होना
- लगातार सिरदर्द और थकान
कुछ मामलों में लोग भ्रम और हिंसक व्यवहार का शिकार भी हो जाते हैं।
भारत में क्यों बढ़ रही है समुद्री रास्ते से ड्रग्स तस्करी?
पिछले कुछ वर्षों में गुजरात का समुद्री इलाका ड्रग्स तस्करों के निशाने पर रहा है। खासकर कच्छ और पोरबंदर के समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल तस्करी के लिए करने की कोशिशें बढ़ी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर के जरिए अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क भारत तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। समुद्र के रास्ते बड़ी मात्रा में नशा छिपाकर लाना आसान माना जाता है।
इसी वजह से भारतीय एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। ड्रोन, समुद्री रडार और कोस्ट गार्ड की पेट्रोलिंग के जरिए संदिग्ध जहाजों पर नजर रखी जा रही है।
पिछले साल भी पकड़ी गई थी बड़ी खेप
यह पहला मामला नहीं है जब गुजरात के समुद्र में इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी गई हो। इससे पहले अप्रैल 2025 में पोरबंदर के पास करीब 300 किलो ड्रग्स जब्त की गई थी, जिसकी कीमत करीब 1800 करोड़ रुपए बताई गई थी।
उस समय भी गुजरात एटीएस और कोस्ट गार्ड ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया था। तस्करों ने पीछा होने पर ड्रग्स के पैकेट समुद्र में फेंक दिए थे और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार भाग निकले थे।
इन लगातार मामलों से साफ है कि भारत के पश्चिमी समुद्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय तस्कर बड़े ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं।
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी ड्रग्स खेप भारत में किस नेटवर्क तक पहुंचनी थी। जांच एजेंसियां दिल्ली समेत कई राज्यों में संभावित लिंक खंगाल रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय है, जिसके तार अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया तक फैले हो सकते हैं।
फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क का संबंध पहले पकड़ी गई ड्रग्स खेपों से भी जुड़ा हुआ है।
भारत में लगातार बढ़ती ड्रग्स तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में गुजरात में हुई यह कार्रवाई न केवल बड़ी सफलता मानी जा रही है, बल्कि इससे यह भी साफ हुआ है कि समुद्री रास्तों पर निगरानी और सख्त करने की जरूरत है।

