यूरोप घूमने का सपना पड़ रहा महंगा: 1.81 लाख भारतीयों को नहीं मिला शेंगेन वीजा, इन देशों ने सबसे ज्यादा आवेदन किए खारिज

यूरोप की यात्रा करने का सपना देखने वाले लाखों भारतीयों के लिए एक नई रिपोर्ट चौंकाने वाली साबित हो सकती है। यूरोपीय आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 11.5 लाख से अधिक भारतीयों ने शेंगेन वीजा के लिए आवेदन किया, लेकिन इनमें से 1.81 लाख से ज्यादा लोगों को वीजा नहीं मिला। यानी लगभग हर छह में से एक भारतीय आवेदक को निराशा हाथ लगी।

हालांकि भारत दुनिया में शेंगेन वीजा के लिए आवेदन करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना हुआ है, लेकिन अलग-अलग यूरोपीय देशों में वीजा मंजूरी की दर में बड़ा अंतर देखने को मिला। कुछ देशों ने भारतीय आवेदनों को बड़ी संख्या में मंजूरी दी, जबकि कुछ देशों में वीजा न मिलने की दर 30% से भी ज्यादा रही।

Indians have not received Schengen visas

शेंगेन वीज़ा क्या है?

शेंगेन वीज़ा (Schengen Visa) एक शॉर्ट-टर्म वीज़ा है, जो यात्रियों को यूरोप के 27 शेंगेन देशों में यात्रा करने की अनुमति देता है। इस वीज़ा का उपयोग पर्यटन, व्यावसायिक यात्रा, परिवार या मित्रों से मिलने और ट्रांजिट जैसे उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इसके तहत कोई व्यक्ति 180 दिनों की अवधि में अधिकतम 90 दिन तक शेंगेन क्षेत्र में रह सकता है।

भारतीयों को शेंगेन वीज़ा की आवश्यकता क्यों होती है?

भारतीय पासपोर्ट धारकों को शेंगेन क्षेत्र में वीज़ा-फ्री प्रवेश की सुविधा नहीं है। इसलिए यूरोप के शेंगेन देशों की यात्रा करने के लिए उन्हें पहले शेंगेन वीज़ा प्राप्त करना पड़ता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही वीज़ा के जरिए यात्री सभी शेंगेन सदस्य देशों में घूम सकते हैं, जिससे एक ही यात्रा में कई यूरोपीय देशों का दौरा करना आसान हो जाता है।

 

शेंगेन वीज़ा और नेशनल वीज़ा में अंतर

  • शेंगेन वीज़ा (Type C): अल्पकालिक (Short-Term) यात्रा के लिए जारी किया जाता है और आमतौर पर 90 दिनों तक की अनुमति देता है।
  • नेशनल वीज़ा (Type D): दीर्घकालिक (Long-Term) उद्देश्यों जैसे नौकरी, उच्च शिक्षा, शोध या स्थायी निवास के लिए जारी किया जाता है और संबंधित देश में लंबे समय तक रहने की अनुमति देता है।

 

11.5 लाख से ज्यादा भारतीयों ने किया आवेदन

यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के दौरान भारतीय नागरिकों ने कुल 11,53,748 शेंगेन वीजा आवेदन जमा किए।

इनमें से 1,81,111 आवेदन ऐसे रहे जिन पर वीजा जारी नहीं किया गया। इस तरह भारतीय आवेदकों के लिए कुल गैर-मंजूरी दर (Non-Issuance Rate) 15.8% रही।

सरल शब्दों में कहें तो हर 100 भारतीय आवेदनों में लगभग 16 लोगों को शेंगेन वीजा नहीं मिला।

 

कौन सा देश रहा सबसे सख्त?

 

स्लोवेनिया में सबसे ज्यादा भारतीयों को नहीं मिला वीजा

वीजा जारी न करने के मामले में स्लोवेनिया सबसे ऊपर रहा। यहां लगभग आधे भारतीय आवेदकों को वीजा नहीं मिल सका।

देश

वीजा न मिलने की दर

स्लोवेनिया

46.1%

बुल्गारिया

37.0%

ग्रीस

33.0%

माल्टा

31.7%

एस्टोनिया

30.1%

क्रोएशिया

27.1%

ऑस्ट्रिया

21.6%

नीदरलैंड

20.6%

स्लोवेनिया में लगभग हर दो में से एक आवेदन को मंजूरी नहीं मिली। यह सभी शेंगेन देशों में सबसे ऊंची दर रही।

 

ग्रीस ने भी बढ़ाई यात्रियों की मुश्किलें

हाल के वर्षों में ग्रीस भारतीय पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। लेकिन वीजा आंकड़े बताते हैं कि वहां वीजा प्राप्त करना आसान नहीं रहा।

नई दिल्ली स्थित ग्रीक दूतावास को भारत से 41,009 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 13,532 लोगों को वीजा नहीं मिला।

इसका मतलब है कि ग्रीस के लिए आवेदन करने वाले लगभग हर तीन लोगों में से एक व्यक्ति को वीजा नहीं मिला।

यात्रा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग और दस्तावेजों की कड़ी जांच इसकी एक वजह हो सकती है।

 

नीदरलैंड और ऑस्ट्रिया में भी चुनौती

नीदरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे लोकप्रिय यूरोपीय देशों में भी भारतीयों के लिए वीजा मंजूरी दर अपेक्षाकृत कम रही।

नीदरलैंड को भारत से 97,650 आवेदन मिले और वहां गैर-मंजूरी दर 20.6% रही।

वहीं ऑस्ट्रिया ने 48,761 आवेदन प्राप्त किए, जिनमें से 21.6% मामलों में वीजा जारी नहीं किया गया। दोनों देशों की दर भारत के औसत 15.8% से काफी अधिक रही।

 

जर्मनी, स्विट्जरलैंड और इटली बने बेहतर विकल्प

जहां कुछ देशों ने सख्ती दिखाई, वहीं कई लोकप्रिय यूरोपीय देशों में भारतीयों के लिए वीजा मिलने की संभावना बेहतर रही।

देश

वीजा न मिलने की दर

डेनमार्क

6.9%

बेल्जियम

7.7%

जर्मनी

10.5%

स्वीडन

11.4%

इटली

12.7%

स्विट्जरलैंड

13.6%

जर्मनी को भारत से 1.53 लाख से ज्यादा आवेदन मिले, लेकिन वहां केवल 10.5% मामलों में वीजा जारी नहीं हुआ।

इसी तरह स्विट्जरलैंड, जो 2025 में भारतीयों की सबसे पसंदीदा शेंगेन मंजिल रहा, वहां गैर-मंजूरी दर 13.6% रही, जो औसत से कम है।

इटली में भी भारतीयों के लिए वीजा मिलने की संभावना अपेक्षाकृत बेहतर रही।

 

सबसे आसान साबित हुए डेनमार्क और बेल्जियम

अगर वीजा मंजूरी के आंकड़ों को देखा जाए तो डेनमार्क और बेल्जियम भारतीय यात्रियों के लिए सबसे अनुकूल देशों में शामिल रहे।

डेनमार्क में केवल 6.9% आवेदन ऐसे रहे जिन्हें वीजा नहीं मिला।

वहीं बेल्जियम में यह आंकड़ा 7.7% रहा।

इससे संकेत मिलता है कि सभी शेंगेन देश एक ही वीजा प्रणाली का हिस्सा होने के बावजूद उनकी जांच प्रक्रिया और मंजूरी दरों में काफी अंतर हो सकता है।

 

सबसे ज्यादा आवेदन खारिज किन देशों में हुए?

 

बड़ी संख्या में आवेदन आने वाले देशों में भी हजारों लोगों को निराशा

कुल संख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा वीजा न मिलने वाले आवेदन उन्हीं देशों में रहे जहां भारतीयों की संख्या सबसे अधिक थी।

मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • स्विट्जरलैंड : लगभग 30,700 आवेदन
  • फ्रांस : लगभग 29,500 आवेदन
  • नीदरलैंड : लगभग 20,100 आवेदन
  • जर्मनी : लगभग 16,000 आवेदन
  • ग्रीस : लगभग 13,500 आवेदन

हालांकि इन देशों में आवेदन भी बहुत अधिक संख्या में आए थे, इसलिए केवल कुल संख्या देखकर वीजा मंजूरी की वास्तविक तस्वीर नहीं समझी जा सकती।

 

आखिर क्यों बदलते हैं वीजा के नतीजे?

विशेषज्ञों के अनुसार, शेंगेन वीजा जारी करने में कई बातों पर ध्यान दिया जाता है। इनमें यात्रा का उद्देश्य, वित्तीय स्थिति, होटल और फ्लाइट बुकिंग, पिछले यात्रा रिकॉर्ड, यात्रा बीमा और दस्तावेजों की सटीकता शामिल होती है।

यदि आवेदन में कोई जानकारी अधूरी हो या यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट न हो, तो वीजा मिलने की संभावना कम हो सकती है।

इसके अलावा हर देश अपने स्तर पर आवेदन की जांच करता है, इसलिए अलग-अलग देशों में मंजूरी दर भी अलग दिखाई देती है।

 

भारतीय यात्रियों के लिए क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?

ताजा आंकड़े बताते हैं कि यूरोप यात्रा की योजना बनाते समय केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि वीजा मंजूरी दरों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

जहां स्लोवेनिया, बुल्गारिया और ग्रीस जैसे देशों में भारतीय आवेदकों को अपेक्षाकृत अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, वहीं जर्मनी, स्विट्जरलैंड, इटली, बेल्जियम और डेनमार्क जैसे देशों में वीजा मिलने की संभावना बेहतर रही।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी देश की मंजूरी दर चाहे जो हो, सही दस्तावेज, स्पष्ट यात्रा योजना और मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड होने पर वीजा मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

यानी यूरोप जाने का सपना अभी भी लाखों भारतीयों के लिए खुला है, लेकिन सही तैयारी के बिना यह सपना अधूरा भी रह सकता है