India ASEAN Cooperation: दुनिया में बढ़ती उथल-पुथल के बीच जयशंकर का बड़ा संदेश, क्यों कहा- ‘अब अकेला कोई देश नहीं लड़ सकता?’

India ASEAN Cooperation

बदलते वैश्विक परिदृश्य और बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने India ASEAN Cooperation को और मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया “अत्यधिक अशांत” (Extremely Turbulent) दौर से गुजर रही है, जहां कोई भी देश या समूह अकेले वैश्विक चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित ASEAN Post-Ministerial Conference with India 2026 को संबोधित करते हुए जयशंकर ने भारत और ASEAN देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को भविष्य की वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

जयशंकर ने दुनिया को 'अत्यधिक अशांत' क्यों बताया?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें शामिल हैं:

  • वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं
  • ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां
  • खाद्य सुरक्षा पर बढ़ता दबाव
  • स्वास्थ्य सुरक्षा के नए खतरे
  • समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा
  • भू-राजनीतिक अस्थिरता

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में कोई भी देश अकेले समाधान नहीं खोज सकता। ऐसे समय में क्षेत्रीय और रणनीतिक सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

India ASEAN Cooperation क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

India ASEAN Cooperation केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जयशंकर के अनुसार भारत और ASEAN को निम्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहिए:

  • व्यापार और निवेश
  • प्रौद्योगिकी और डिजिटल नवाचार
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)
  • ग्रीन ग्रोथ और सतत विकास
  • समुद्री सहयोग
  • कनेक्टिविटी परियोजनाएं
  • प्रतिभा और कौशल का आदान-प्रदान

उन्होंने कहा कि भारत और ASEAN मिलकर लगभग 2 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए दोनों की जिम्मेदारी केवल अपने देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता से जुड़ी हुई है।

Image Source: PTI

सप्लाई चेन और समुद्री व्यापार पर क्यों बढ़ी चिंता?

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि आज अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार (Maritime Trade) पर निर्भर है। ऐसे में किसी भी प्रकार का वैश्विक तनाव या संघर्ष सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि: ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को अब स्वाभाविक रूप से सुरक्षित नहीं माना जा सकता।”

उन्होंने समुद्री कानूनों के सम्मान और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशेष बात यह है कि वर्ष 2026 को ASEAN-India Year of Maritime Cooperation के रूप में भी देखा जा रहा है।

 

भारत-ASEAN संबंध किन क्षेत्रों में मजबूत हो रहे हैं?

भारत और ASEAN देशों के बीच संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। वर्तमान में दोनों पक्ष निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं:

 

प्रमुख सहयोग क्षेत्र:

  • India ASEAN Strategic Partnership
  • Digital Economy
  • Indo-Pacific Cooperation
  • Green Energy Initiatives
  • Trade and Investment
  • Technology Collaboration
  • Supply Chain Resilience
  • Sustainable Development
  • Regional Connectivity Projects

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-अमेरिका तनाव और बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों के बीच भारत और ASEAN की साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गई है।

 

भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में ASEAN की क्या भूमिका है?

भारत की Indo-Pacific नीति में ASEAN केंद्रीय भूमिका निभाता है। भारत लंबे समय से ASEAN Centrality का समर्थन करता रहा है। ASEAN के सदस्य देश:

  • इंडोनेशिया
  • मलेशिया
  • सिंगापुर
  • थाईलैंड
  • फिलीपींस
  • वियतनाम
  • ब्रुनेई
  • कंबोडिया
  • लाओस
  • म्यांमार

इन देशों के साथ भारत का सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और समुद्री स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

निष्कर्ष

India ASEAN Cooperation आने वाले वर्षों में केवल कूटनीतिक साझेदारी नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह संदेश स्पष्ट करता है कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सहयोग, विश्वास और साझा रणनीति के माध्यम से ही संभव है। दुनिया के इस बदलते दौर में भारत और ASEAN की मजबूत साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

FAQs:

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए भारत और ASEAN देशों को सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहिए।

दोनों मिलकर लगभग 2 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता तथा आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ASEAN में कुल 10 सदस्य देश हैं, जिनमें इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस और वियतनाम सहित अन्य देश शामिल हैं।

व्यापार, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्री सहयोग, ग्रीन ग्रोथ, सप्लाई चेन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन संकट, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की।

ASEAN भारत की इंडो-पैसिफिक नीति का एक प्रमुख स्तंभ है और क्षेत्रीय स्थिरता एवं समुद्री सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।