अगर आपके एडमिट कार्ड में अचानक 2,500 किलोमीटर दूर किसी दूसरे देश का परीक्षा केंद्र आ जाए तो?
यही सवाल इस समय पूरे देश में पूछा जा रहा है। NEET Exam Centre Abu Dhabi मामला सिर्फ एक छात्र की परेशानी नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठता बड़ा सवाल बन गया है।पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित हो रहे NEET 2026 Re-Exam से ठीक पहले नागपुर के छात्र अब्दुल्ला का एडमिट कार्ड आया। परिवार ने सोचा कि अब आखिरी तैयारी करनी है। लेकिन जैसे ही एडमिट कार्ड खुला, सबके पैरों तले जमीन खिसक गई।
NEET Exam Centre Abu Dhabi: आखिर नागपुर के छात्र को विदेश का सेंटर कैसे मिल गया?
अब्दुल्ला ने आवेदन भरते समय अपनी पसंद के परीक्षा शहरों में नागपुर, वर्धा और भंडारा चुना था। उसने पहले भी मूल परीक्षा नागपुर में ही दी थी। लेकिन री-एग्जाम के एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र अबूधाबी आवंटित कर दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि छात्र के पास पासपोर्ट तक नहीं है।
यानी अगर यह गलती समय रहते नहीं सुधरती, तो उसके पास परीक्षा देने का कोई रास्ता ही नहीं बचता। यही वजह है कि यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और NTA NEET Exam Centre आवंटन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे।

पूरा साल बर्बाद हो जाता,पिता ने सुनाई वो रात
अब्दुल्ला के पिता डॉ. मोहम्मद तालिब के मुताबिक वे 14 जून से लगातार एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तकनीकी दिक्कत आ रही थी। 19 जून को जब आखिरकार एडमिट कार्ड डाउनलोड हुआ तो उसमें अबूधाबी लिखा देखकर परिवार हैरान रह गया।
उन्होंने तुरंत NTA हेल्पलाइन पर फोन किया और ईमेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि उनके बेटे के पास न पासपोर्ट है और न विदेश जाकर परीक्षा देने की कोई व्यवस्था। अगर परीक्षा केंद्र नहीं बदला जाता, तो एक गलती की कीमत उसके पूरे साल को चुकानी पड़ती।
NTA ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद National Testing Agency (NTA) ने आधिकारिक बयान जारी किया।
NTA ने X पर लिखा –
"The grievance is being addressed and the candidate will be allocated a centre in Nagpur, after due verification, in the next few hours."
@NTA_Exams
यानी एजेंसी ने स्वीकार किया कि शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है और सत्यापन के बाद छात्र को नागपुर में नया परीक्षा केंद्र दिया जाएगा। हालांकि सवाल अब भी वही है – अगर यह मामला वायरल नहीं होता, तो क्या छात्र परीक्षा दे पाता?
राहुल गांधी ने कहा – “NTA बच्चों के धैर्य की परीक्षा ले रही है” इस घटना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नागपुर का यह छात्र पिछले एक महीने से NEET री-एग्जाम की तैयारी कर रहा था।लेकिन परीक्षा से ठीक पहले जब उसने एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसका परीक्षा केंद्र अबूधाबी निकला। राहुल गांधी ने लिखा कि परिवार के पास न पासपोर्ट था, न विदेश भेजने के लिए पैसे और न ही इतना समय।उन्होंने दावा किया कि छात्र पूरी रात रोता रहा और मानसिक तनाव में परीक्षा देने से भी इनकार कर दिया।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया –
"जो सिस्टम किसी बच्चे को उसके अपने शहर में परीक्षा केंद्र नहीं दे सकता लेकिन विदेश भेज सकता है, उसे परीक्षाएं कराने का अधिकार नहीं होना चाहिए।"
@ राहुल गांधी
उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य, समय, पैसे और मानसिक शांति के साथ खिलवाड़ है।
क्या यह सिर्फ एक गलती है या सिस्टम में बड़ी खामी?
यह पहली बार नहीं है जब NTA Controversy सुर्खियों में आई हो। पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा संचालन, रिजल्ट, पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर एजेंसी कई बार आलोचनाओं का सामना कर चुकी है।
इस घटना ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है –
- परीक्षा केंद्र आवंटन प्रक्रिया कितनी सुरक्षित है?
- क्या सभी छात्रों का डेटा सही तरीके से सत्यापित किया जाता है?
- अगर छात्र शिकायत न करता तो क्या होता?
यही सवाल अब लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के मन में हैं।
इस पूरे विवाद से सबसे बड़ा सबक क्या है?

देश में हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर Medical Entrance Exam देते हैं। ऐसे में एक छोटी-सी प्रशासनिक चूक भी किसी छात्र की वर्षों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है। राहत की बात यह है कि NTA ने छात्र को नागपुर में परीक्षा केंद्र देने का आश्वासन दिया है।
लेकिन NEET Exam Centre Abu Dhabi मामला यह याद दिलाता है कि परीक्षा एजेंसियों के लिए केवल परीक्षा कराना ही काफी नहीं, बल्कि हर छात्र का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
FAQs -
एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र आवंटन के दौरान हुई कथित त्रुटि के कारण छात्र को गलती से अबूधाबी केंद्र मिल गया। NTA ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
NTA ने कहा है कि शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है और सत्यापन के बाद छात्र को नागपुर में नया परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा।
सामान्य परिस्थितियों में परीक्षा केंद्र बदलना आसान नहीं होता, लेकिन विशेष मामलों में सत्यापन के बाद NTA बदलाव कर सकती है।
नहीं। छात्र के पिता के अनुसार उसके पास पासपोर्ट नहीं था, इसलिए विदेश जाकर परीक्षा देना संभव नहीं था।
राहुल गांधी ने कहा कि ऐसी घटनाएं छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव देती हैं और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

