Cancer Causing Chemicals in Food: यूरोप में बैन, लेकिन भारत की थाली तक कैसे पहुंच रहे हैं ये खतरनाक केमिकल?

Cancer Causing Chemicals in Food

भारत में Cancer Causing Chemicals in Food को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) ने भारतीय कृषि उत्पादों की कई खेपों को कीटनाशकों और भारी धातुओं के अवशेष मिलने के कारण अस्वीकार किया। इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि जिन रसायनों को कई देशों में प्रतिबंधित या सख्त नियंत्रण में रखा गया है, वे अब भी भारतीय खेतों में क्यों इस्तेमाल हो रहे हैं और क्या इनका असर हमारी थाली तक पहुंच रहा है? हालांकि यह समझना जरूरी है कि कैंसर एक बहुकारक (multifactorial) बीमारी है किसी एक कीटनाशक या रसायन को सीधे कैंसर का कारण नहीं माना जा सकता। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC ने कुछ रसायनों को संभावित या संभवतः कैंसरकारी श्रेणी में रखा है, जिससे इनके लंबे समय तक संपर्क को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

 

Cancer Causing Chemicals in Food: कौनकौन से रसायन चर्चा में हैं?

सबसे अधिक चर्चा पैराक्वाट (Paraquat), ग्लाइफोसेट (Glyphosate), 2,4-D और डाइमेथोएट (Dimethoate) जैसे रसायनों की हो रही है। पैराक्वाट दुनिया के कई देशों में प्रतिबंधित है क्योंकि इसे अत्यधिक विषैला माना जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके संपर्क को फेफड़ों की गंभीर क्षति और पार्किंसन रोग के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। ग्लाइफोसेट दुनिया का सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला खरपतवारनाशक है। 2015 में WHO की IARC ने इसे Probable Carcinogen यानी संभावित कैंसरकारी श्रेणी में रखा था। हालांकि अमेरिका और कुछ अन्य नियामक एजेंसियां उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर इसे अलग तरह से आंकती हैं। यही कारण है कि इसे लेकर वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक और कानूनी बहस जारी है। वहीं 2,4-D को IARC ने Possibly Carcinogenic श्रेणी में रखा है। यह वही रसायन है जिसकी चर्चा वियतनाम युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए Agent Orange के संदर्भ में भी होती रही है।

Cancer Causing Chemicals in Food

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भारत में इन रसायनों पर विवाद क्यों?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में किसानों के लिए ये रसायन अपेक्षाकृत सस्ते और प्रभावी हैं। इसलिए इनका उपयोग लंबे समय से होता रहा है। दूसरी ओर, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिन रसायनों पर दुनिया के कई देशों में सवाल उठ चुके हैं, उनके इस्तेमाल की समयसमय पर वैज्ञानिक समीक्षा होनी चाहिए। यूरोपीय संघ द्वारा भारतीय कृषि उत्पादों में कीटनाशक अवशेष मिलने पर जताई गई आपत्तियों ने भी Food Safety India और Food Safety Standards पर बहस को तेज कर दिया है।

 

क्या भारत का खाना असुरक्षित है?

हर खाद्य पदार्थ में कीटनाशक अवशेष होना यह साबित नहीं करता कि वह कैंसर पैदा करेगा। किसी भी रसायन का जोखिम उसकी मात्रा, संपर्क की अवधि और सुरक्षा मानकों पर निर्भर करता है। इसलिए विशेषज्ञ घबराने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की सलाह देते हैं। हालांकि यह भी सच है कि सुरक्षित कृषि पद्धतियों, बेहतर निगरानी और कम विषैले विकल्पों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे।

 

निष्कर्ष 

Cancer Causing Chemicals in Food पर जारी बहस केवल कृषि की नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा से भी जुड़ी है। भारत को किसानों की जरूरतों और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर नीतियां तैयार करनी होंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को भी फल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर, संतुलित आहार अपनाकर और विश्वसनीय स्रोतों से खाद्य सामग्री खरीदकर जोखिम कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

 

FAQs

Q1. कौन से केमिकल यूरोप में प्रतिबंधित हैं?
कुछ देशों में Paraquat सहित कई रसायनों पर प्रतिबंध या कड़े प्रतिबंध हैं, जबकि अलगअलग देशों के नियम अलग हो सकते हैं।

 

Q2. क्या ये केमिकल भारत में इस्तेमाल किए जाते हैं?
हाँ, इनमें से कुछ रसायनों का भारत में नियामकीय अनुमति के तहत सीमित या निर्धारित उपयोग होता है।

 

Q3. क्या इनसे कैंसर होता है?
किसी एक रसायन को सीधे कैंसर का कारण नहीं माना जा सकता। WHO की IARC ने कुछ रसायनों को संभावित या संभवतः कैंसरकारी श्रेणी में रखा है, लेकिन जोखिम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।

 

Q4. उपभोक्ता खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?
फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोएँ, संतुलित आहार लें और विश्वसनीय स्रोतों से खाद्य सामग्री खरीदें।