Missing Link पर मचा बवाल: ‘कुत्ते भी नहीं पूछेंगे’ वाले बयान से घिरे देवेंद्र फडणवीस, आखिर क्या है पूरा विवाद?

Missing Link Row

Missing Link परियोजना को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पास हुए भूस्खलन (Landslide) के बाद विपक्ष लगातार Maharashtra Government पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने विधानसभा में आलोचकों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “Paid Trolls”, “हायर किए गए लोग” और ऐसा व्यक्ति बताया जिसे “कुत्ते भी नहीं पूछेंगे”। उनके इस बयान के बाद Missing Link Controversy अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

Missing Link Project क्या है?

Missing Link Project मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का लगभग ₹7,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसका उद्देश्य लोनावला-खंडाला घाट के कठिन और दुर्घटना-प्रवण हिस्से को बायपास करना है। इस परियोजना में शामिल हैं

  • भारत का सबसे चौड़ा Cable-Stayed Bridge
  • दो अत्याधुनिक Twin Tunnels
  • मुंबई से पुणे के बीच यात्रा समय में 20-30 मिनट की कमी
  • ट्रैफिक और दुर्घटनाओं में कमी लाने की योजना

सरकार इसे भारत के सबसे आधुनिक Infrastructure Project में से एक बता रही है।

Missing Link Controversy क्यों शुरू हुई?

परियोजना के शुरू होने के कुछ समय बाद ही भारी बारिश के दौरान टनल के पास भूस्खलन हो गया। इस घटना के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए कि

  • क्या परियोजना का उद्घाटन जल्दबाजी में किया गया?
  • क्या सुरक्षा मानकों से समझौता हुआ?
  • क्या निर्माण की गुणवत्ता खराब थी?
  • क्या करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार हुआ?
  • इसी को लेकर Opposition Attack लगातार तेज हो गया।

Devendra Fadnavis ने क्या कहा?

विधानसभा में जवाब देते हुए Devendra Fadnavis ने परियोजना का बचाव किया और कहा कि इतने बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में शुरुआती चुनौतियां आना सामान्य बात है। उन्होंने इसकी तुलना कोंकण रेलवे के शुरुआती दिनों से भी की। मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे गालियां दीजिए, मैं इसकी आदत डाल चुका हूं। I’m Abuse-Proof. लेकिन महाराष्ट्र को बदनाम मत कीजिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पैसे लेकर सोशल मीडिया और टीवी पर झूठ फैला रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे लोग “वे हैं जिन्हें कुत्ते भी नहीं पूछेंगे”, जिसके बाद उनके बयान पर विवाद और बढ़ गया।

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विपक्ष ने क्यों घेरा महाराष्ट्र सरकार को ?

Maharashtra Politics में इस बयान को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के पैसे से बने प्रोजेक्ट्स पर सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है। अगर परियोजना अच्छी है तो सरकार को तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहिए, आलोचकों को Paid Stooges” कहना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की बदनामी सवाल पूछने वालों से नहीं, बल्कि

  • खराब गुणवत्ता वाले निर्माण
  • अधूरी योजना
  • दुर्घटनाओं
  • भ्रष्टाचार के आरोप
  • जवाबदेही से बचने वाली सरकार की वजह से होती है।

 

संजय राउत का हमला

शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सांसद संजय राउत ने मुख्यमंत्री के बयान को “हताशा” और “अहंकार” बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को एक संस्कारी मुख्यमंत्री की जरूरत है और सरकार आलोचना को दबाने की कोशिश कर रही है।

 

भूस्खलन के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए?

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि परियोजना पूरी तरह सुरक्षित है और IIT विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं।सरकार का दावा है कि भारी बारिश के कारण आई प्राकृतिक चुनौती को देखते हुए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

क्या यह सिर्फ राजनीतिक विवाद है या सुरक्षा का भी सवाल?

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े Road Project में शुरुआती तकनीकी चुनौतियां आ सकती हैं। हालांकि यदि किसी परियोजना में भूस्खलन जैसी घटनाएं होती हैं, तो स्वतंत्र तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट कराना आवश्यक माना जाता है।यही कारण है कि विपक्ष व्यापक जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार इसे प्राकृतिक परिस्थिति और इंजीनियरिंग प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।

 

निष्कर्ष

Missing Link परियोजना महाराष्ट्र के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है, लेकिन हालिया भूस्खलन और उसके बाद मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis के बयान ने इसे राजनीतिक विवाद में बदल दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुरक्षा ऑडिट, तकनीकी जांच और सरकार की अगली कार्रवाई इस Missing Link Controversy को किस दिशा में ले जाती है।

FAQs:

Missing Link Project मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का लगभग ₹7,000 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य लोनावला-खंडाला घाट सेक्शन को बायपास कर यात्रा समय कम करना है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि व्यक्तिगत आलोचना उन्हें स्वीकार है, लेकिन महाराष्ट्र को बदनाम करने के लिए झूठ फैलाना स्वीकार नहीं होगा।

विपक्ष ने निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों, जल्दबाजी में उद्घाटन और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट की मांग की है।

परियोजना के उद्घाटन के बाद भारी बारिश के दौरान टनल के पास भूस्खलन हुआ, जिसके बाद सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे।

इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹7,000 करोड़ है।