Ethanol Rice Scam: ग्रीन एनर्जी के नाम पर ₹1,160 करोड़ का खेल? बच्चों का पोषक चावल भी नहीं छोड़ा!

Ethanol Rice Scam

देशभर में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) का बड़ा विकल्प बताया जा रहा है। लेकिन इसी बीच Ethanol Rice Scam को लेकर मध्य प्रदेश से सामने आई एक जांच ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दैनिक भास्कर की जांच में दावा किया गया है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी फोर्टिफाइड चावल का बड़ा हिस्सा फैक्ट्रियों तक पहुंचने के बजाय कथित तौर पर दूसरे रास्तों से वापस सरकारी गोदामों में पहुंचा दिया गया। इस पूरे मामले की अनुमानित कीमत करीब ₹1,160 करोड़ बताई जा रही है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

Ethanol Rice Scam क्या है?

Ethanol Rice Scam में आरोप है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी पर दिए गए फोर्टिफाइड चावल का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के बजाय कथित तौर पर दूसरे कारोबार में किया गया। जांच में चावल की कथित हेराफेरी, सरकारी गोदामों में दोबारा जमा करने और कई पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

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Ethanol Rice Scam कैसे सामने आया?

पूरे मामले की शुरुआत 2 जून को हुई, जब बालाघाट के नवगांव गोदाम से तीन ट्रकों में सरकारी चावल छिंदवाड़ा स्थित एक इथेनॉल प्लांट के लिए भेजा गया। लेकिन जांच में सामने आया कि

  • एक ट्रक रास्ते में एक राइस मिल पहुंच गया।
  • बाकी दो ट्रक भी निर्धारित इथेनॉल प्लांट तक नहीं पहुंचे।
  • इसके बाद पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
  • जांच का दायरा अब कई जिलों तक बढ़ चुका है।

कथित घोटाले का पूरा तरीका क्या बताया जा रहा है?

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार

  1. इथेनॉल प्लांट ऑपरेटर

सरकार से लगभग ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर पर फोर्टिफाइड चावल प्राप्त किया जाता था। आरोप है कि इसे इथेनॉल बनाने के बजाय राइस मिलों को अधिक कीमत पर बेच दिया जाता था।

 

  1. राइस मिल संचालक

जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ राइस मिलें इस चावल को नए बोरों में भरकर फिर सरकारी गोदामों में कस्टम मिल्ड राइस के रूप में जमा करती थीं। इससे उन्हें मिलिंग लागत बचाने और अतिरिक्त लाभ कमाने का मौका मिलता था।

 

  1. FCI अधिकारियों पर सवाल

जांच में आरोप है कि नियमों के अनुसार पुराने स्टॉक (FIFO) के बजाय नया फोर्टिफाइड चावल आवंटित किया गया। कुछ अधिकारियों पर गोपनीय जानकारी पहले से साझा करने के भी आरोप लगे हैं। इन आरोपों की जांच जारी है।

 

  1. जिला प्रशासन

जांच में निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि नियमित निरीक्षण, बिजली खपत और श्रमिक रिकॉर्ड की प्रभावी जांच नहीं होने से कथित अनियमितताएं समय रहते पकड़ में नहीं आईं। अब तक जांच में क्या कार्रवाई हुई है?जांच एजेंसियों के अनुसार

  • 40 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।
  • 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
  • 12 ट्रक जब्त किए गए हैं।

जांच बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी से आगे अन्य जिलों तक बढ़ाई गई है।कई इथेनॉल प्लांट और चावल मिल जांच के दायरे में हैं।

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FCI और इथेनॉल उद्योग का क्या कहना है?

FCI का कहना है कि उसकी जिम्मेदारी केवल गोदाम से चावल जारी करने तक सीमित है। गोदाम से निकलने के बाद चावल की जवाबदेही संबंधित एजेंसियों की होती है।वहीं इथेनॉल प्लांट एसोसिएशन का कहना है कि यदि किसी ऑपरेटर ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे उद्योग को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

 

क्या इस मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल भी उठ रहे हैं?

जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि मामले में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मामला कई स्तरों तक फैला हो सकता है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

 

निष्कर्ष

Ethanol Rice Scam ने सरकारी योजनाओं, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा नीति—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल जांच जारी है और कई आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मध्य प्रदेश के सबसे बड़े कथित आर्थिक घोटालों में से एक साबित हो सकता है। अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

FAQs:

यह कथित मामला इथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी फोर्टिफाइड चावल के दुरुपयोग और हेराफेरी से जुड़ा है, जिसकी जांच जारी है।

सरकारी चावल को इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने के बजाय कथित रूप से दूसरे रास्तों से बेचे जाने और दोबारा सरकारी गोदामों में जमा कराने के आरोप लगे हैं।

मामले की जांच के लिए पुलिस द्वारा विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

जांच रिपोर्टों के अनुसार कथित घोटाले की अनुमानित कीमत लगभग ₹1,160 करोड़ बताई जा रही है।

अब तक 4 लोगों की गिरफ्तारी, 12 ट्रकों की जब्ती और कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच अभी जारी है।