Same-Sex Couple Tax Benefits: आखिर क्या है पूरा मामला?
क्या भारत में एक विवाहित पति-पत्नी एक-दूसरे को करोड़ों रुपये का उपहार (Gift) दें तो उस पर Gift Tax या आयकर नहीं लगता, लेकिन यदि वही उपहार एक समलैंगिक (Same-Sex) जोड़ा अपने साथी को दे, तो उस पर टैक्स लग सकता है? यही सवाल इन दिनों Bombay High Court में पहुंचा है। एक Same-Sex Couple ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया है कि मौजूदा आयकर कानून उनके साथ भेदभाव करता है, क्योंकि भारतीय कानून उन्हें “पति-पत्नी (Spouse)” के रूप में मान्यता नहीं देता। दूसरी ओर, Income Tax Department का कहना है कि आयकर कानून केवल उन्हीं रिश्तों को टैक्स छूट देता है, जिन्हें भारतीय कानून में विवाह के रूप में मान्यता प्राप्त है। आइए समझते हैं कि Same-Sex Couple Tax Benefits in India को लेकर पूरा विवाद क्या है और यह मामला क्यों चर्चा में है।

आखिर यह मामला अभी चर्चा में क्यों है?
यह मामला इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि हाल ही में Income Tax Department ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस याचिका का विरोध करते हुए अपना जवाब दाखिल किया है। विभाग ने अदालत से याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) के तहत मिलने वाली छूट केवल उन रिश्तों पर लागू होती है, जिन्हें भारतीय कानून में वैध विवाह के रूप में मान्यता प्राप्त है। वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रावधान समानता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है। इसी कारण यह मामला अब केवल Gift Tax तक सीमित न रहकर समानता, विवाह की कानूनी मान्यता और कर व्यवस्था से जुड़ी बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।
Same-Sex Couple Tax Benefits को लेकर क्या है पूरा मामला?

मुंबई हाई कोर्ट में एक समलैंगिक (Same-Sex) जोड़े ने आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) को चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह प्रावधान उन्हें उन Spouse Tax Benefits से वंचित करता है, जो विवाहित पति-पत्नी को मिलते हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि एक पति अपनी पत्नी या पत्नी अपने पति को कोई महंगा उपहार देती है, तो उस पर Gift Tax या आयकर नहीं लगता। लेकिन यदि वही उपहार एक समलैंगिक साथी अपने पार्टनर को देता है, तो उस पर टैक्स लग सकता है, क्योंकि भारतीय कानून उन्हें “Spouse” नहीं मानता।इसी आधार पर उन्होंने अदालत से इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करने की मांग की है।
आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) क्या है?
Income Tax Act की धारा 56(2)(x) के तहत यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी प्रतिफल (Consideration) के निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य का उपहार मिलता है, तो वह सामान्यतः कर योग्य माना जाता है। हालांकि, इस धारा में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पति-पत्नी (Spouses) के बीच दिए गए उपहार पर आयकर नहीं लगाया जाता। हालांकि, यह छूट केवल उन रिश्तों पर लागू होती है जिन्हें भारतीय कानून में वैध विवाह के रूप में मान्यता प्राप्त है। यही प्रावधान इस पूरे Same-Sex Couple Income Tax विवाद का केंद्र है।
समलैंगिक जोड़े की दलील क्या है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि—
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उनका कहना है कि यह मामला केवल टैक्स का नहीं, बल्कि समानता, गरिमा और समान कानूनी अधिकारों का भी है।
आयकर विभाग ने याचिका का विरोध क्यों किया?
Income Tax Department ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
विभाग की मुख्य दलीलें हैं—
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इसी आधार पर विभाग ने अदालत से याचिका खारिज करने की मांग की है।
क्या यह मामला केवल टैक्स तक सीमित है?
नहीं। यह मामला Same-Sex Marriage Tax Benefits, Marriage Equality India और LGBTQ Rights India जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। यदि अदालत इस मामले में कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी या निर्णय देती है, तो उसका प्रभाव भविष्य में उत्तराधिकार (Inheritance), बीमा लाभ, पेंशन, नामांकन (Nomination), बैंकिंग अधिकार और अन्य वित्तीय एवं कानूनी अधिकारों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इसका क्या संबंध है?

अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने Same-Sex Marriage Legal Status पर फैसला सुनाते हुए समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार किया था। अदालत ने कहा था कि इस विषय पर कानून बनाना संसद का अधिकार क्षेत्र है। इसी फैसले के बाद समलैंगिक जोड़े विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर अलग-अलग अदालतों का रुख कर रहे हैं। वर्तमान मामला भी उसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है।
यदि भविष्य में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलती है तो क्या बदल सकता है?
यदि भविष्य में संसद या सक्षम न्यायालय समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देता है, तो कई कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता पड़ सकती है।
इनमें शामिल हो सकते हैं—
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हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई कानूनी बदलाव लागू नहीं हुआ है।
इस मामले का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल इस मामले का सीधा असर उन समलैंगिक जोड़ों पर पड़ता है जो अपने रिश्ते से जुड़े वित्तीय और कर संबंधी अधिकारों की मांग कर रहे हैं। हालांकि, यदि भविष्य में अदालत या संसद इस विषय पर कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेती है, तो भारत में Same-Sex Couple Tax Benefits, LGBTQ Tax Benefits India और विवाह से जुड़े अन्य कानूनी अधिकारों की दिशा बदल सकती है।
निष्कर्ष
Bombay High Court Same-Sex Tax Case केवल Gift Tax या आयकर छूट का मामला नहीं है, बल्कि यह समानता, विवाह की कानूनी मान्यता और कर व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों को सामने लाता है। एक ओर Income Tax Department का कहना है कि मौजूदा कानून केवल कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त विवाह पर आधारित है, जबकि दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि समान परिस्थितियों में समान अधिकार मिलना संविधान की मूल भावना है। अब सभी की नजर बॉम्बे हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर है। अदालत का आगे का रुख यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि भविष्य में समलैंगिक जोड़ों से जुड़े कर संबंधी अधिकारों और अन्य वैवाहिक लाभों पर कानूनी बहस किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
FAQs
- समलैंगिक (Same-Sex) जोड़ों को पति-पत्नी जैसी टैक्स छूट क्यों नहीं मिलती?
मौजूदा आयकर कानून में पति-पत्नी के बीच दिए गए उपहार पर टैक्स छूट का प्रावधान है। चूंकि भारत में समलैंगिक विवाह को अभी कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए ऐसे जोड़ों को फिलहाल वही टैक्स लाभ नहीं मिलते।
- बॉम्बे हाई कोर्ट में यह मामला किस मुद्दे पर पहुंचा है?
मामला इस बात को लेकर है कि क्या आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) समलैंगिक जोड़ों के साथ भेदभाव करती है और क्या उन्हें भी पति-पत्नी के समान टैक्स छूट मिलनी चाहिए।
- आयकर विभाग ने समलैंगिक जोड़ों की याचिका का विरोध क्यों किया?
विभाग का कहना है कि आयकर कानून केवल उन्हीं रिश्तों को टैक्स छूट देता है जिन्हें भारतीय कानून विवाह के रूप में मान्यता देता है। चूंकि समलैंगिक विवाह को अभी कानूनी मान्यता नहीं है, इसलिए यह छूट लागू नहीं हो सकती।
- आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) क्या है?
यह धारा बिना प्रतिफल प्राप्त कुछ उपहारों पर टैक्स लगाने से संबंधित है। हालांकि, इसमें पति-पत्नी सहित कुछ रिश्तों के बीच दिए गए उपहारों को कर से छूट दी गई है।
- पति-पत्नी को गिफ्ट पर टैक्स छूट कैसे मिलती है?
आयकर अधिनियम के अनुसार पति और पत्नी के बीच दिए गए उपहार को धारा 56(2)(x) के तहत कर योग्य नहीं माना जाता।
- क्या भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता प्राप्त है?
नहीं। वर्तमान में भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस विषय पर कानून बनाना संसद का कार्य है।
- यदि समलैंगिक विवाह को मान्यता मिलती है तो टैक्स नियमों पर क्या असर पड़ेगा?
यदि भविष्य में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलती है, तो टैक्स, उत्तराधिकार, बीमा, पेंशन, बैंकिंग और अन्य वैवाहिक अधिकारों से जुड़े कई कानूनों की समीक्षा और आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं।

