₹15 करोड़ की मशीन धूल खा रही, मरीज महीनों लाइन में! Delhi Cancer Hospital की हकीकत ने सबको चौंकाया

Delhi Cancer Hospital

दिल्ली का Delhi Cancer Hospital एक बार फिर सुर्खियों में है। राजधानी के एकमात्र सरकारी कैंसर अस्पताल Delhi State Cancer Institute (DSCI) में मरीजों को जांच और इलाज के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्पताल में करीब ₹15.42 करोड़ की PET Cyclotron मशीन वर्षों से बंद पड़े रहने पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे सार्वजनिक संसाधनों की भारी बर्बादी बताया। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह स्थिति बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

Delhi Cancer Hospital में मरीजों को लंबा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?

सीधा जवाब: अस्पताल में मशीनों के खराब होने, डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी तथा मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण CT Scan, PET-CT, Ultrasound और Radiotherapy जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए कई-कई महीनों की वेटिंग चल रही है। कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में हजारों रुपये खर्च करके जांच करानी पड़ रही है।

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Delhi Cancer Hospital में कौन-कौन सी सेवाएं प्रभावित हैं?

अस्पताल में कई जरूरी जांच और इलाज प्रभावित बताए जा रहे हैं।

  • CT Scan के लिए दो महीने या उससे अधिक की वेटिंग।
  • Ultrasound के लिए लगभग एक महीने का इंतजार।
  • PET-CT Scan में लंबी देरी।
  • Radiotherapy की कुछ तारीखें अगले वर्ष तक मिल रही हैं।
  • तीन Radiotherapy मशीनों में से केवल एक के चालू होने की जानकारी।
  • Biopsy और अन्य विशेष जांचों में भी देरी।

इन देरी के कारण कई मरीजों की बीमारी की सही समय पर निगरानी नहीं हो पा रही है।

₹15 करोड़ की PET Cyclotron मशीन क्यों बनी चिंता का विषय?

दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्पताल में करीब ₹15.42 करोड़ की PET Cyclotron मशीन वर्षों से बंद पड़े रहने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।अदालत ने इसे सार्वजनिक धन की बर्बादी बताते हुए कहा कि इतनी महंगी मेडिकल मशीन का उपयोग न होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। कोर्ट ने इस मामले में जवाब भी मांगा है।

अस्पताल में स्टाफ की कमी कितनी गंभीर है?

रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में स्वीकृत 814 पदों के मुकाबले लगभग 491 पद खाली हैं।इनमें डॉक्टर, विशेषज्ञ, तकनीशियन, नर्सिंग स्टाफ और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं। स्टाफ की कमी के कारण इलाज और जांच दोनों की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

 

गरीब मरीजों पर क्या असर पड़ रहा है?

अधिकांश मरीज ऐसे हैं जो निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते।कई मरीजों को CT Scan, PET-CT और अन्य जांचों के लिए 8,000 से 12,000 रुपये तक निजी लैब में खर्च करने पड़ रहे हैं। जिनके पास पैसे नहीं हैं, उन्हें सरकारी अस्पताल में महीनों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे इलाज में देरी हो सकती है।

 

Delhi State Cancer Institute की स्थापना क्यों की गई थी?

Delhi State Cancer Institute की स्थापना 2006 में एक अत्याधुनिक सरकारी कैंसर अस्पताल के रूप में की गई थी।इसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आधुनिक कैंसर इलाज, एडवांस डायग्नोस्टिक सुविधाएं, रिसर्च और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना था। शुरुआती वर्षों में अस्पताल को देश के अग्रणी सरकारी कैंसर संस्थानों में गिना जाता था, लेकिन अब इसकी कई सुविधाएं प्रभावित बताई जा रही हैं।

 

निष्कर्ष

Delhi Cancer Hospital की मौजूदा स्थिति सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। मशीनों के लंबे समय से बंद रहने, स्टाफ की भारी कमी और महीनों की वेटिंग ने हजारों कैंसर मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद अस्पताल और संबंधित विभाग कितनी जल्दी सुधारात्मक कदम उठाते हैं।

FAQs:

स्टाफ की कमी, मशीनों के खराब होने और मरीजों की अधिक संख्या के कारण जांच और इलाज में लंबी वेटिंग चल रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट के अनुसार लगभग ₹15.42 करोड़ की PET Cyclotron मशीन वर्षों से बंद पड़ी है। इसके कारणों पर जवाब मांगा गया है।

PET-CT, CT Scan, Ultrasound, Biopsy, Radiotherapy और अन्य कई जांच एवं उपचार सेवाएं प्रभावित हैं।

कुछ जांचों के लिए एक से दो महीने तक और Radiotherapy के लिए कई मामलों में अगले वर्ष तक की तारीख दी जा रही है।

इस मामले में अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा गया है। विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

फिलहाल इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। मामला अदालत के संज्ञान में है और आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों के जवाब पर निर्भर करेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, एक समय इस अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1,500 से अधिक मरीज आते थे।