Nirmal Purja Missing: ब्रॉड पीक पर मौत का कहर, दुनिया के दिग्गज पर्वतारोही निर्मल पुर्जा लापता – जानिए रेस्क्यू ऑपरेशन का पूरा अपडेट.. 

Nirmal Purja Missing

Pakistan Avalanche Nirmal Purja : नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (Nirmal Purja) पाकिस्तान के ब्रॉड पीक (Broad Peak) पर आए भीषण हिमस्खलन (Avalanche) के बाद लापता हो गए हैं। पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) क्षेत्र में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी पर शिखर अभियान (Summit Push) के दौरान यह हादसा हुआ। अभियान में शामिल 10 पर्वतारोहियों का दल लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर था, तभी अचानक बर्फ का विशाल हिस्सा टूटकर नीचे आ गया और कई पर्वतारोही उसकी चपेट में आ गए।

हादसे के बाद पाकिस्तान सेना के हेलीकॉप्टर, स्थानीय बचाव दल, ड्रोन और अनुभवी पर्वतारोहियों की मदद से लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि खराब मौसम, लगातार हिमस्खलन का खतरा और बेहद कठिन भूभाग राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। इस हादसे ने एक बार फिर दुनिया के सबसे जोखिम भरे पर्वत अभियानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, लेकिन हालात बेहद चुनौतीपूर्ण

हिमस्खलन की सूचना मिलते ही पाकिस्तान के पर्यटन विभाग, अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (Alpine Club of Pakistan) और सेना ने संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया। पाकिस्तान सेना के दो एविएशन हेलीकॉप्टरों को राहत कार्य में लगाया गया है, लेकिन खराब मौसम के कारण उनकी उड़ानें बार-बार प्रभावित हो रही हैं।

स्थानीय पर्वतारोहियों के साथ नेपाल से भी कई अनुभवी क्लाइंबर अपने अभियान रोककर बचाव कार्य में शामिल हो गए हैं। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि जिस इलाके में हादसा हुआ, वह ब्रॉड पीक का सबसे कठिन और दुर्गम हिस्सा माना जाता है। यहां तेज हवाएं, लगातार बर्फबारी और कम दृश्यता (Visibility) के कारण राहत अभियान बेहद धीमी गति से चल रहा है।

अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के महासचिव अयाज शिगरी ने बताया कि बचाव दलों को सबसे ज्यादा चिंता नए हिमस्खलन की है। ऐसे में प्रत्येक कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है।

 

अब तक कितने लोगों की मौत की पुष्टि हुई?

पाकिस्तान अल्पाइन क्लब के अनुसार अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर दो शवों की पहचान की पुष्टि पहले की गई थी।

पहचान किए गए मृतकों में ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हार्थी और नेपाल के पुर बहादुर गुरूंग शामिल हैं। बाद में अन्य रिपोर्टों में अमेरिकी पर्वतारोही मैलोरी गीस (Mallory Geis) के भी मृतकों में शामिल होने की जानकारी सामने आई। शेष एक शव की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के कारण सभी शवों को सुरक्षित नीचे लाने में समय लग सकता है।

निर्मल पुर्जा समेत कई पर्वतारोही अब भी लापता

रेस्क्यू अभियान का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा हैं, जो अभी तक लापता हैं।

उनके अलावा जिन पर्वतारोहियों की तलाश जारी है, उनमें नेपाल के किली पेम्बा शेरपा, नीमा शेरपा, नांवांग थिंदू शेरपा और ग्यालू शेरपा, पाकिस्तान के सोहैल सखी, चीन के वांग झोंग सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। विभिन्न एजेंसियों की शुरुआती सूची और बाद की आधिकारिक अपडेट में लापता पर्वतारोहियों की संख्या में कुछ अंतर रहा है, क्योंकि रेस्क्यू के दौरान लगातार नई जानकारी सामने आ रही है।

अभियान में नेपाल, पाकिस्तान, अमेरिका, चीन और ओमान सहित कई देशों के पर्वतारोही शामिल थे। इसी वजह से यह हादसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है।

 

ड्रोन और GPS से मिली अहम जानकारी

अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि हादसे से पहले मिले GPS डेटा के अनुसार हिमस्खलन पर्वतारोहियों को लगभग 1,000 मीटर नीचे तक बहाकर ले गया।

शुक्रवार को ड्रोन सर्वे के दौरान कुछ पर्वतारोहियों के दिखाई देने की सूचना भी मिली, लेकिन उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन फुटेज से यह पुष्टि नहीं हो पाई कि वे जीवित हैं या नहीं।

क्लब ने कहा कि पर्वतारोहियों से अब तक कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। इसके बावजूद बचाव दल उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं और लगातार खोज अभियान जारी है।

 

नेपाल और चीन भी लगातार कर रहे हैं निगरानी

इस हादसे के बाद नेपाल सरकार भी सक्रिय हो गई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि लापता पर्वतारोहियों में कई नेपाली नागरिक शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने भरोसा दिलाया है कि बचाव अभियान में उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।

चीन ने भी अपने नागरिक की स्थिति की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान की सहायता करने की बात कही है।

इसी बीच निर्मल पुर्जा के करीबी सहयोगी और बिजनेस पार्टनर मिंगमा डेविड शेरपा भी पाकिस्तान रवाना हो गए हैं ताकि रेस्क्यू अभियान में समन्वय स्थापित किया जा सके और परिवारों को सही जानकारी मिलती रहे।

 

निर्मल पुर्जा ने कैसे रचा था इतिहास

नेपाल में जन्मे निर्मल पुर्जा (Nirmal Purja), जिन्हें दुनिया “निम्स दाई (Nims Dai)” के नाम से भी जानती है, आधुनिक दौर के सबसे सफल हाई-एल्टीट्यूड (High Altitude) पर्वतारोहियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने साहस, गति और रिकॉर्डतोड़ अभियानों से पर्वतारोहण की दुनिया में अलग पहचान बनाई है।

निर्मल पुर्जा ने वर्ष 2003 में ब्रिटिश सेना (British Army) की ब्रिगेड ऑफ गोरखा (Brigade of Gurkhas) जॉइन की थी। इसके बाद 2009 में उन्हें ब्रिटेन की रॉयल नेवी की स्पेशल फोर्स स्पेशल बोट सर्विस (Special Boat Service-SBS) में शामिल किया गया, जिसे दुनिया की सबसे कठिन सैन्य इकाइयों में गिना जाता है।

सैन्य सेवा के दौरान ही उन्होंने पर्वतारोहण में रुचि विकसित की। वर्ष 2012 में उन्होंने नेपाल के लोबुचे ईस्ट (Lobuche East) पर्वत पर पहली बार सफल चढ़ाई की और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 

‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ ने बनाया दुनिया का सबसे चर्चित पर्वतारोही

निर्मल पुर्जा को वैश्विक पहचान वर्ष 2019 में मिली, जब उन्होंने Project Possible के तहत दुनिया की सभी 14 आठ-हजार मीटर (8,000 मीटर) से ऊंची चोटियों पर केवल 6 महीने और 6 दिन में चढ़ाई पूरी कर दी।

इससे पहले यह रिकॉर्ड लगभग आठ वर्षों का था। पुर्जा ने उसे तोड़कर पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय लिख दिया।

उनकी इस उपलब्धि पर वर्ष 2021 में नेटफ्लिक्स की चर्चित डॉक्यूमेंट्री “14 Peaks: Nothing Is Impossible” भी बनाई गई, जिसने उन्हें दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया।

निर्मल पुर्जा कई बड़े रेस्क्यू मिशनों में भी शामिल रहे हैं और कठिन परिस्थितियों में पर्वतारोहियों की जान बचाने के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उनके लापता होने की खबर ने पूरी पर्वतारोहण दुनिया को झकझोर दिया है।

अभियान में शामिल दूसरे पर्वतारोही भी अनुभवी थे

हादसे का शिकार बना दल केवल सामान्य पर्वतारोहियों का समूह नहीं था, बल्कि इसमें दुनिया के कई अनुभवी क्लाइंबर शामिल थे।

नेपाल के पुर बहादुर गुरूंग (Pur Bahadur Gurung) अंतरराष्ट्रीय पर्वत गाइड महासंघ (IFMGA) से प्रमाणित गाइड थे और 14 आठ-हजार मीटर चोटियों का अभियान पूरा करने के करीब पहुंच चुके थे।

किली पेम्बा शेरपा अब तक 15 बार माउंट एवरेस्ट फतह कर चुके हैं। वर्ष 2021 में वे सर्दियों में पहली बार K2 फतह करने वाली ऐतिहासिक नेपाली टीम का भी हिस्सा रहे थे, जिसमें निर्मल पुर्जा भी शामिल थे।

अमेरिका की मैलोरी गीस (Mallory Geis) ने कुछ सप्ताह पहले ही सोशल मीडिया पर पाकिस्तान अभियान को लेकर उत्साह जताया था और इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा पर्वतारोहण अभियान बताया था।

 

ब्रॉड पीक को दुनिया की सबसे खतरनाक चोटियों में क्यों गिना जाता है?

ब्रॉड पीक (Broad Peak) पाकिस्तान के काराकोरम (Karakoram) पर्वत श्रृंखला में K2 के पास स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग 8,051 मीटर (कुछ स्रोत 8,047 मीटर भी बताते हैं) है और यह दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है।

पहली सफल चढ़ाई वर्ष 1957 में ऑस्ट्रिया के पर्वतारोहियों ने की थी। इसके बाद सैकड़ों पर्वतारोही यहां पहुंचे, लेकिन यह पर्वत आज भी दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में शामिल है।

ब्रॉड पीक पर अचानक मौसम बदलना, तेज हवाएं, बर्फीले तूफान, हिमस्खलन और ऑक्सीजन की बेहद कमी इसे अत्यंत जोखिम भरा बनाते हैं। पाकिस्तान का जून से अगस्त तक चलने वाला पर्वतारोहण सीजन भी अक्सर ऐसे प्राकृतिक खतरों से प्रभावित होता रहता है।

वर्ष 2013 ब्रॉड पीक के इतिहास का सबसे दुखद वर्षों में गिना जाता है, जब यहां कम से कम छह पर्वतारोहियों की मौत हुई थी।

बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि 7,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर किसी भी रेस्क्यू अभियान को अंजाम देना बेहद कठिन होता है। यहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है, तापमान कई बार -30 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और मौसम कुछ ही मिनटों में पूरी तरह बदल सकता है।

अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के अनुसार बचाव दलों को इस बात का भी खतरा है कि यदि जल्दबाजी की गई तो दूसरा हिमस्खलन राहतकर्मियों की जान भी खतरे में डाल सकता है।

ड्रोन, GPS डेटा और हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, लेकिन खराब मौसम के कारण इनका उपयोग सीमित हो गया है। सैन्य हेलीकॉप्टर मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्र में प्रभावी तरीके से खोज अभियान चलाया जा सके।

अभी आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि मौसम में सुधार होता है तो खोज अभियान तेज किया जा सकता है। वहीं यदि खराब मौसम जारी रहा तो राहत कार्य और कठिन हो जाएगा।

नेपाल, पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों के अधिकारी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। पर्वतारोहियों के परिवारों को नियमित अपडेट दिए जा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस अभियान पर नजर रखी जा रही है।

निर्मल पुर्जा जैसे दिग्गज पर्वतारोही के लापता होने से पूरी पर्वतारोहण बिरादरी उम्मीद और चिंता के बीच खड़ी है। दुनिया भर की निगाहें अब पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर चल रहे रेस्क्यू अभियान पर टिकी हैं, जहां हर गुजरता घंटा बेहद अहम माना जा रहा है।

 

FAQ

  1. पाकिस्तान में हिमस्खलन कहाँ हुआ?
    हिमस्खलन पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक (Broad Peak) पर लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर हुआ।
  2. निर्मल पुर्जा कौन हैं?
    निर्मल पुर्जा नेपाल के विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही हैं। उन्होंने 2019 में दुनिया की सभी 14 आठ-हजार मीटर से ऊंची चोटियों पर केवल 6 महीने 6 दिन में चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
  3. इस अभियान में कितने पर्वतारोही शामिल थे?
    शिखर अभियान में कुल 10 पर्वतारोहियों का दल शामिल था, जिसमें नेपाल, पाकिस्तान, अमेरिका, चीन और ओमान के सदस्य थे।
  4. अब तक कितने शव बरामद किए गए हैं?
    पाकिस्तान के अधिकारियों के अनुसार अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं, हालांकि सभी की पहचान आधिकारिक रूप से पूरी नहीं हुई है।
  5. बचाव अभियान में किन एजेंसियों की मदद ली जा रही है?
    पाकिस्तान सेना, अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान, स्थानीय पर्वतारोहियों, ड्रोन टीमों और सैन्य हेलीकॉप्टरों की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।
  6. हिमस्खलन का कारण क्या माना जा रहा है?
    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऊंचाई वाले क्षेत्र में अचानक बर्फ खिसकने और खराब मौसम के कारण हिमस्खलन हुआ। हालांकि अंतिम कारण की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।