Rebeca Grynspan: क्या गुटेरेस के बाद पहली बार किसी महिला को मिलेगी UN की कमान ? पहली वोटिंग ने बदल दिए पूरे समीकरण – जानिए कैसे होता है महासचिव का चुनाव ?

Rebeca Grynspan

Rebeca Grynspan UN Secretary : संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के अगले महासचिव (Secretary-General) के चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है और पहली अनौपचारिक वोटिंग में कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रेबेका ग्रिन्सपैन (Rebeca Grynspan) सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की पहली ‘स्ट्रॉ पोल’ (Straw Poll) में उन्हें सबसे अधिक समर्थन मिला है। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) का दूसरा और अंतिम कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी बहुपक्षीय संस्था को नया नेतृत्व मिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यदि आगे की वोटिंग में भी ग्रिन्सपैन अपनी बढ़त बनाए रखती हैं, तो संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला के महासचिव बनने का रास्ता खुल सकता है।

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पहली वोटिंग में रेबेका ग्रिन्सपैन को सबसे ज्यादा समर्थन मिला

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यीय परिषद ने बंद कमरे में पहली गैर-बाध्यकारी (Non-binding) स्ट्रॉ पोल आयोजित की। इसका उद्देश्य यह जानना था कि महासचिव पद की दौड़ में किस उम्मीदवार को शुरुआती स्तर पर सबसे अधिक समर्थन मिल रहा है।

Image : रेबेका ग्रिन्सपैन

सूत्रों के अनुसार रेबेका ग्रिन्सपैन को 10 ‘Encourage’, 1 ‘Discourage’ और 4 ‘No Opinion’ वोट मिले। शुरुआती चरण में इसे बेहद मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।

Image : कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट

दूसरे स्थान पर गुयाना की संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट (Carolyn Rodrigues-Birkett) रहीं। उन्हें 9 समर्थन, 2 विरोध और 4 तटस्थ वोट प्राप्त हुए।

Image : राफेल ग्रॉसी

तीसरे स्थान पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी (Rafael Grossi) रहे। उन्हें 7 समर्थन, 2 विरोध और 6 ‘नो ओपिनियन’ वोट मिले।

इसके अलावा पूर्व चिली राष्ट्रपति मिशेल बाशेलेट (Michelle Bachelet), इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री एवं संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, संयुक्त राष्ट्र की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी वर्जीनिया गाम्बा, सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी साल और युगांडा के वरिष्ठ राजनयिक ओलारा ओटुनू भी इस चुनावी दौड़ में शामिल हैं।

बाद में सामने आए विस्तृत मतदान आंकड़ों के अनुसार मिशेल बाशेलेट को 6 समर्थन और 5 विरोध, मैकी साल को 6 समर्थन और 7 विरोध, मारिया एस्पिनोसा को 5 समर्थन, जबकि ओलारा ओटुनू को केवल 2 समर्थन वोट मिले। इन परिणामों से स्पष्ट है कि शुरुआती दौर में रेबेका ग्रिन्सपैन अन्य सभी उम्मीदवारों से आगे चल रही हैं।

 

गुटेरेस का कार्यकाल खत्म होने के बाद नया नेतृत्व क्यों अहम होगा

पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री एंटोनियो गुटेरेस जनवरी 2017 से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हैं। उनका दूसरा लगातार पांच वर्षीय कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होगा। संयुक्त राष्ट्र की परंपरा के अनुसार दो कार्यकाल पूरे होने के बाद नया महासचिव चुना जाता है।

नए महासचिव के सामने कई बड़ी वैश्विक चुनौतियां होंगी। रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का तेजी से बढ़ता प्रभाव, मानवीय संकट और संयुक्त राष्ट्र में सुधार की बढ़ती मांग जैसे मुद्दे आने वाले महासचिव के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होंगे।

इसके अलावा कई सदस्य देशों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पहले की तुलना में अधिक जटिल और खर्चीली हो गई है। ऐसे में नए प्रमुख से अपेक्षा की जा रही है कि वह संगठन को अधिक प्रभावी, आधुनिक और परिणाम-केंद्रित बनाए।

 

रेबेका ग्रिन्सपैन कौन हैं, जिन पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है

रेबेका ग्रिन्सपैन (Rebeca Grynspan) कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रह चुकी हैं और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (United Nations Conference on Trade and Development-UNCTAD) की महासचिव हैं। वह पेशे से अर्थशास्त्री हैं और पिछले कई दशकों से वैश्विक आर्थिक नीतियों, विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वित्तीय सुधार और सतत विकास (Sustainable Development) जैसे विषयों पर काम कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में उनका लंबा प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव उन्हें इस दौड़ का मजबूत उम्मीदवार बनाता है। विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों, वैश्विक व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग को लेकर उनकी विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सम्मान मिलता है।

रेबेका का जन्म एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान यूरोप में हुए होलोकॉस्ट (Holocaust) से बचकर कोस्टा रिका पहुंचे थे। यदि वह महासचिव चुनी जाती हैं तो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली महिला और यहूदी पृष्ठभूमि से आने वाली पहली महासचिव भी होंगी।

 

स्ट्रॉ पोल आखिर होती क्या है, जिससे तय होती है शुरुआती तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव सीधे मतदान से नहीं होता। सबसे पहले सुरक्षा परिषद कई चरणों में स्ट्रॉ पोल कराती है। यह औपचारिक चुनाव नहीं बल्कि एक गोपनीय प्रक्रिया होती है, जिसके जरिए यह परखा जाता है कि किस उम्मीदवार को सबसे अधिक स्वीकार्यता मिल रही है।

इस मतदान में परिषद के सदस्य तीन विकल्पों में से एक चुनते हैं – Encourage, Discourage या No Opinion। इससे यह संकेत मिलता है कि कौन-सा उम्मीदवार आगे बढ़ने की सबसे मजबूत स्थिति में है।

पहले चरण की स्ट्रॉ पोल में सभी सदस्य एक जैसे मतपत्र का उपयोग करते हैं। इसलिए यह पता नहीं चलता कि विरोध का वोट किसी सामान्य सदस्य ने दिया है या सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से किसी ने।

यही कारण है कि शुरुआती दौर में सबसे ज्यादा समर्थन मिलने के बावजूद किसी भी उम्मीदवार की जीत तय नहीं मानी जाती।

 

महासचिव का चुनाव कैसे होता है, आखिर किसके हाथ में है अंतिम फैसला

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव दो चरणों में पूरा होता है। सबसे पहले 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) उम्मीदवारों पर विचार करती है और कई दौर की स्ट्रॉ पोल कराती है।

इन शुरुआती दौरों में सभी सदस्य समान मतपत्र का उपयोग करते हैं, जिससे यह पता नहीं चलता कि विरोध का वोट किस देश ने दिया है। बाद के चरणों में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य (P5) अलग रंग के मतपत्र का इस्तेमाल करते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं।

यदि इन पांच देशों में से कोई भी किसी उम्मीदवार का विरोध करता है, तो वह अपनी वीटो शक्ति (Veto Power) के जरिए उसकी दावेदारी रोक सकता है। इसलिए केवल ज्यादा समर्थन मिलना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि स्थायी सदस्यों का भरोसा भी हासिल करना जरूरी होता है।

जब सुरक्षा परिषद किसी एक नाम पर सहमत हो जाती है, तब वह उम्मीदवार का नाम 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) को भेजती है। महासभा अंतिम मंजूरी देती है, जिसे आमतौर पर औपचारिक प्रक्रिया माना जाता है।

 

अभी रेबेका की बढ़त मजबूत है, लेकिन जीत अभी तय नहीं

कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि पहली स्ट्रॉ पोल में रेबेका ग्रिन्सपैन का प्रदर्शन उत्साहजनक जरूर है, लेकिन इससे उनकी जीत सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।

विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उन्हें मिला एक ‘Discourage’ वोट कहीं किसी स्थायी सदस्य (P5) की ओर से तो नहीं आया। यदि ऐसा नहीं है, तो आगे के दौर में उनकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।

कुछ राजनयिकों ने यह भी कहा कि गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि उनके खिलाफ पड़े दो विरोधी वोट स्थायी सदस्यों के नहीं हुए, तो वह भी आगे की दौड़ में मजबूत चुनौती पेश कर सकती हैं।

हालांकि अन्य कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि पहली वोटिंग से अभी किसी एक उम्मीदवार पर सर्वसम्मति बनती नहीं दिख रही। इसलिए आने वाले कई दौर की वोटिंग में तस्वीर बदल भी सकती है।

 

संयुक्त राष्ट्र में सुधार सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है

अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज (Mike Waltz) ने मतदान के बाद कहा कि सुरक्षा परिषद आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और दुनिया को ऐसे महासचिव की जरूरत है जो संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार कर सके।

Image : माइक वाल्ट्ज

उन्होंने कहा कि संगठन को अधिक प्रभावी, कम खर्चीला और उद्देश्य के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों में दोहराव कम करने और मुख्यालय के बजाय जमीनी स्तर पर काम करने वाली इकाइयों को अधिक संसाधन देने की भी वकालत की।

सुरक्षा परिषद के जुलाई महीने के अध्यक्ष और कांगो के स्थायी प्रतिनिधि जेनॉन मुकोंगो नगाय (Zenon Mukongo Ngay) ने कहा कि स्ट्रॉ पोल के परिणाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उम्मीदवारों को उनके नामांकन करने वाले देशों के माध्यम से परिणामों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि अगली स्ट्रॉ पोल कब होगी, इसका फैसला अगस्त में डेनमार्क की अध्यक्षता के दौरान किया जाएगा।

 

क्या संयुक्त राष्ट्र को पहली महिला महासचिव मिलने वाली है?

संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्ष के इतिहास में आज तक किसी महिला को महासचिव बनने का अवसर नहीं मिला है। यही कारण है कि इस बार का चुनाव पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर सदस्य देशों से अपील की थी कि वे महासचिव पद के लिए महिला उम्मीदवारों के नाम भी प्रमुखता से भेजें। इसके बाद पहली बार कई मजबूत महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी हैं, जिनमें रेबेका ग्रिन्सपैन, मिशेल बाशेलेट, कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट और मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा शामिल हैं।

रेबेका ग्रिन्सपैन को पहली स्ट्रॉ पोल में सबसे अधिक समर्थन मिलने के बाद यह संभावना और मजबूत हुई है कि इस बार संयुक्त राष्ट्र की कमान पहली बार किसी महिला के हाथ में जा सकती है। हालांकि अंतिम फैसला अभी कई चरणों की वोटिंग और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की सहमति पर निर्भर करेगा।

 

अमेरिका और चीन दोनों महिला महासचिव के पक्ष में

दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां अमेरिका और चीन सार्वजनिक रूप से यह कह चुकी हैं कि वे संयुक्त राष्ट्र की अगली महासचिव के रूप में किसी महिला का समर्थन करने के पक्ष में हैं।

हालांकि दोनों देशों ने किसी एक उम्मीदवार के नाम का समर्थन नहीं किया है, लेकिन महिला नेतृत्व को लेकर उनका सकारात्मक रुख रेबेका ग्रिन्सपैन समेत अन्य महिला उम्मीदवारों के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

वहीं कुछ देशों का यह भी मानना है कि इस बार महासचिव का चयन लैटिन अमेरिका से होना चाहिए, क्योंकि लंबे समय से इस क्षेत्र को यह जिम्मेदारी नहीं मिली है। रेबेका ग्रिन्सपैन इसी क्षेत्र से आती हैं, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।

 

इजराइल ने क्या आपत्ति जताई है?

इजराइल के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि डैनी डैनन (Danny Danon) ने चुनाव प्रक्रिया के बीच कहा कि अगला महासचिव ऐसा होना चाहिए जो सभी सदस्य देशों के साथ समान व्यवहार करे।

Image : डैनी डैनन

उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र की कुछ संस्थाओं में इजराइल के प्रति पक्षपात और संस्थागत यहूदी-विरोध (Institutional Antisemitism) देखने को मिला है। डैनन ने कहा कि नए महासचिव को इस स्थिति को बदलने की दिशा में काम करना होगा।

हालांकि उन्होंने किसी उम्मीदवार का नाम लेकर विरोध नहीं किया, लेकिन यह बयान बताता है कि चुनाव केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि वैश्विक राजनीतिक संतुलन का भी विषय बन चुका है।

 

अभी कई दौर की वोटिंग बाकी, इसलिए तस्वीर बदल भी सकती है

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ रिचर्ड गोवन (Richard Gowan) का कहना है कि पहली स्ट्रॉ पोल के बाद किसी भी उम्मीदवार की जीत तय मानना जल्दबाजी होगी।

ऐतिहासिक अनुभव बताता है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव में कई दौर की स्ट्रॉ पोल होती हैं। आमतौर पर अंतिम सहमति सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत तक बनती है। यदि किसी उम्मीदवार पर सहमति नहीं बनती, तो यह प्रक्रिया और लंबी भी खिंच सकती है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में नए उम्मीदवार भी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में शुरुआती बढ़त मिलने के बावजूद रेबेका ग्रिन्सपैन को अभी कई राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा।

 

क्या रेबेका ग्रिन्सपैन की राह आसान है?

पहली वोटिंग ने जरूर यह संकेत दिया है कि रेबेका ग्रिन्सपैन इस समय सबसे मजबूत उम्मीदवार हैं। उनका संयुक्त राष्ट्र में लंबा अनुभव, आर्थिक मामलों की विशेषज्ञता, लैटिन अमेरिकी पृष्ठभूमि और महिला उम्मीदवार होने का लाभ उन्हें अन्य दावेदारों से आगे रखता है।

फिर भी महासचिव बनने की असली परीक्षा अभी बाकी है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों का समर्थन, संभावित वीटो से बचना और कई दौर की गोपनीय वोटिंग में अपनी बढ़त बनाए रखना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

यदि वह इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार कर लेती हैं, तो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली महिला महासचिव बनने का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो सकता है।

 

FAQ

  1. रेबेका ग्रिन्सपैन कौन हैं?
    रेबेका ग्रिन्सपैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की महासचिव हैं। वह पेशे से अर्थशास्त्री हैं और अंतरराष्ट्रीय विकास व आर्थिक नीतियों की विशेषज्ञ मानी जाती हैं।
  2. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव का चुनाव कैसे होता है?
    पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कई चरणों में स्ट्रॉ पोल कर उम्मीदवारों का समर्थन परखती है। इसके बाद सुरक्षा परिषद एक नाम की सिफारिश संयुक्त राष्ट्र महासभा को भेजती है, जहां अंतिम नियुक्ति होती है।
  3. क्या रेबेका ग्रिन्सपैन पहली महिला महासचिव बन सकती हैं?
    हाँ। पहली स्ट्रॉ पोल में उन्हें सबसे अधिक समर्थन मिला है। यदि आगे के मतदान में भी उनका समर्थन बना रहता है और किसी स्थायी सदस्य का वीटो नहीं आता, तो वह संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला महासचिव बन सकती हैं।
  4. एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल कब समाप्त होगा?
    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का दूसरा और अंतिम पांच वर्षीय कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होगा।
  5. महासचिव बनने के लिए किन देशों का समर्थन सबसे महत्वपूर्ण होता है?
    सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस सबसे महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके पास वीटो का अधिकार है।
  6. संयुक्त राष्ट्र महासचिव की मुख्य जिम्मेदारियाँ क्या हैं?
    महासचिव संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। उनकी जिम्मेदारियों में अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखना, सदस्य देशों के बीच संवाद बढ़ाना, मानवीय सहायता कार्यक्रमों का समन्वय करना, वैश्विक संकटों पर नेतृत्व देना और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार लागू करना शामिल है।
  7. रेबेका ग्रिन्सपैन का वर्तमान पद क्या है?
    वह वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की महासचिव हैं।