इस साल का Independence Day Invitation सिर्फ एक आम निमंत्रण कार्ड नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करने वाली एक खास कलाकृति है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में ‘At Home’ रिसेप्शन आयोजित करेंगी। इस खास आयोजन के लिए तैयार किए गए Invitation Kit को करीब 130 कारीगरों ने तीन महीने की मेहनत से तैयार किया है। इस किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प, संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को अलग-अलग कलाकृतियों के जरिए दर्शाया गया है।
Independence Day Invitation Kit में क्या है खास?
इस वर्ष के Rashtrapati Bhavan Invitation Kit को राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों और अहमदाबाद स्थित National Institute of Design (NID) की टीम ने मिलकर तैयार किया है। एनआईडी के निदेशक अशोक मंडल के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में करीब 130 लोग शामिल रहे। इनमें छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के लगभग 50 कारीगर भी शामिल हैं। इन कारीगरों ने NID के शिक्षकों, डिजाइनरों और छात्रों के साथ मिलकर तीन महीने से अधिक समय तक काम किया। किट का उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक कला को एक आधुनिक और आकर्षक रूप में सामने लाना है।

बस्तर के Dhokra और Pitwa शिल्प ने बढ़ाई खूबसूरती
किट में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक Dhokra कला को प्रमुखता दी गई है। यह भारत की सबसे पुरानी धातु ढलाई परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसमें पवित्र उपवनों और प्रकृति के संरक्षण की सामुदायिक परंपरा को दर्शाया गया है। इसके अलावा बस्तर की Pitwa लौह कला को भी किट में शामिल किया गया है। इस शिल्प में पुराने और बेकार लोहे को दोबारा इस्तेमाल कर सजावटी वस्तुएं और रोजमर्रा के उपयोग की चीजें बनाई जाती हैं। किट के एड्रेस स्लिप के साथ लगाया गया लोहे का घंटा भी बस्तर के आदिवासी लोहारों ने पुराने स्क्रैप लोहे से हाथ से तैयार किया है।
Goa की Khazan भूमि से लेकर Maharashtra की Warli Art तक
Invitation Kit में गोवा की प्रसिद्ध Azulejo टाइल पेंटिंग के जरिए Khazan भूमि को दिखाया गया है। यह समुद्र तटीय आर्द्रभूमि है, जिसे मैंग्रोव और दलदली क्षेत्रों से विकसित किया गया है और स्थानीय समुदायों द्वारा प्रबंधित किया जाता है। Khazan भूमि में धान की खेती, मछली पालन और नमक उत्पादन जैसी गतिविधियां होती हैं। यह क्षेत्र तटीय इलाकों को प्राकृतिक सुरक्षा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महाराष्ट्र की Warli Painting के जरिए छत्रपति संभाजीनगर में Kham नदी के पुनर्जीवन की कहानी दिखाई गई है। इसमें कचरा प्रबंधन, पानी की सफाई, स्थानीय पौधों के रोपण और सार्वजनिक स्थानों के सुधार के जरिए नदी क्षेत्र को दोबारा बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने की प्रक्रिया को दर्शाया गया है।
Madhya Pradesh की Bhil Painting में दिखी Seed Saving की परंपरा
मध्य प्रदेश की Bhil Painting भी इस खास किट का हिस्सा है। इसके जरिए स्थानीय समुदायों की पारंपरिक बीज संरक्षण की परंपरा को सामने लाया गया है। इस परंपरा के तहत स्थानीय जलवायु और खाद्य जरूरतों के अनुकूल अनाज, दालों और सब्जियों की स्थानीय किस्मों के बीजों को संरक्षित किया जाता है। भील चित्रकला अपनी बारीक बिंदु वाली आकृतियों के लिए जानी जाती है। इसमें प्रकृति, पौराणिक पात्रों और रोजमर्रा के जीवन को रंगीन पैटर्न के माध्यम से दर्शाया जाता है। पारंपरिक रूप से इन चित्रों को बनाने के लिए नीम की टहनियों का भी इस्तेमाल किया जाता है।
मेहमानों को मिलेगा चार राज्यों की कला से सजा Maheshwari Stole
इस वर्ष राष्ट्रपति भवन पहुंचने वाले मेहमानों के स्वागत क्षेत्र में उन्हें खास तौर पर डिजाइन की गई Maheshwari Stole भी दी जाएगी। इस स्टोल में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की अलग-अलग बुनाई परंपराओं को एक ही कपड़े में जोड़ा गया है। इसे मध्य प्रदेश के महेश्वर में पारंपरिक double-weaving technique से हाथ से बुना गया है। इसमें रेशम और सूती धागों का इस्तेमाल किया गया है। स्टोल के डिजाइन में महाराष्ट्र की Karvat Kathi Saree की बॉर्डर पट्टी, गोवा की Kunbi Saree का Rudraksh पैटर्न, महेश्वरी बुनाई का Kangra डिजाइन और छत्तीसगढ़ की Panika परंपरा का Chinta Chowk डिजाइन शामिल किया गया है।
15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में होगा ‘At Home’ Reception
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 15 अगस्त को शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन में ‘At Home’ Reception आयोजित करेंगी। इस अवसर के लिए तैयार किया गया Invitation Kit समारोह की औपचारिकता के साथ-साथ भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करता है। इस किट में शामिल कलाकृतियां यह दिखाती हैं कि देश की पारंपरिक कला सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आज भी स्थानीय समुदायों की पहचान, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका से जुड़ी हुई है।
निष्कर्ष:
इस साल का Independence Day Invitation भारत की विविधता और स्थानीय कारीगरों की कला को सम्मान देने का एक अनोखा प्रयास है। करीब 130 कारीगरों की तीन महीने की मेहनत से तैयार यह किट छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की कला, शिल्प और संरक्षण परंपराओं को एक साथ जोड़ती है। खास बात यह है कि इसमें बस्तर के करीब 50 कारीगरों की भागीदारी ने इस निमंत्रण को सिर्फ एक औपचारिक कार्ड नहीं, बल्कि भारत की लोककला और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करने वाली खास कलाकृति बना दिया है।
FAQs:
- Rashtrapati Bhavan Independence Day Reception Invitation Kit क्या है?
यह 15 अगस्त के ‘At Home’ Reception के लिए तैयार किया गया विशेष निमंत्रण किट है, जिसमें चार राज्यों की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है। - Independence Day Reception 2026 का आयोजन कहां किया जाएगा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 15 अगस्त को शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन में ‘At Home’ Reception आयोजित करेंगी। - Invitation Kit को किसने तैयार किया है?
राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों और अहमदाबाद स्थित National Institute of Design की टीम ने करीब 130 कारीगरों, डिजाइनरों, शिक्षकों और छात्रों के साथ मिलकर इसे तैयार किया है। - किट में किन राज्यों की कला शामिल है?
किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की कला, शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं को शामिल किया गया है।
5. Independence Day Invitation Kit की खासियत क्या है?
इसमें Dhokra, Pitwa, Azulejo, Warli और Bhil कला के साथ चार राज्यों की बुनाई परंपराओं को एक खास Maheshwari Stole में जोड़ा गया है।

