Japan Defense Paper: चीन, रूस और नॉर्थ कोरिया से खतरा; जापान ने बनाई सैन्य ताकत बढ़ाने की योजना, डिफेंस पर खर्च बढ़ाने की तैयारी – जानिए क्या है मामला ?

Japan Defense Paper

जापान ने अपनी नई Defense White Paper 2026 में सैन्य ताकत बढ़ाने को सिर्फ देश की सुरक्षा से जोड़कर नहीं देखा है, बल्कि इसे आर्थिक विकास का जरिया भी बताया है। सरकार का तर्क है कि डिफेंस सेक्टर में निवेश से नई टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, हथियार निर्माण और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।

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प्रधानमंत्री साने ताकाइची की सरकार ऐसे समय में यह रणनीति आगे बढ़ा रही है, जब जापान चीन, रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंतित है। नई White Paper में चीन को जापान के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया गया है। जापान अब अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री को भी मजबूत करना चाहता है।

जापान अब डिफेंस सेक्टर को आर्थिक ग्रोथ से क्यों जोड़ रहा है?

जापान लंबे समय तक अपनी सैन्य गतिविधियों को लेकर युद्ध के बाद लागू संवैधानिक और राजनीतिक सीमाओं के भीतर रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा माहौल बदलने के साथ टोक्यो ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव शुरू किया है।

नई नीति में सरकार चाहती है कि रक्षा क्षेत्र में होने वाला निवेश सिर्फ मिसाइल, जहाज या हथियार खरीदने तक सीमित न रहे। इसके जरिए नई तकनीक विकसित हो, जापानी कंपनियां रक्षा उत्पादन में आएं, स्टार्टअप्स को फंडिंग मिले और सेना में इस्तेमाल होने वाली तकनीक का फायदा नागरिक अर्थव्यवस्था को भी मिले।

जापान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े दस्तावेज में यह संदेश दिया गया है कि रक्षा क्षेत्र में निवेश का फायदा व्यापक अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी तक पहुंच सकता है। यानी सरकार Defense Spending को Economic Investment की तरह पेश कर रही है।

इसका एक संकेत White Paper के कवर में भी दिखाई दिया। इस बार कवर पर सैनिकों और हथियारों के बजाय भविष्य के शहर और मुस्कुराते परिवार को दिखाया गया है। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, इसका उद्देश्य जापान के भविष्य की आधुनिक और तकनीकी छवि पेश करना था।

 

चीन को जापान ने सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया

जापान की नई सुरक्षा सोच के केंद्र में चीन है। White Paper में चीन की सैन्य गतिविधियों और उसके अन्य कदमों को जापान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता बताया गया है और चीन को जापान की greatest strategic challenge यानी सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती कहा गया है।

खास चिंता ताइवान को लेकर है। जापान के लिए ताइवान स्ट्रेट का संकट सिर्फ चीन और ताइवान का मामला नहीं माना जाता, क्योंकि ताइवान जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों और समुद्री मार्गों के बेहद करीब है।

ताकाइची सरकार ने पहले ही संकेत दिया है कि अगर ताइवान पर चीनी हमला जापान के अस्तित्व और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है तो जापान अपनी Self-Defense Forces के इस्तेमाल पर विचार कर सकता है। चीन ने इस तरह की टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक बताया था।

 

रूस और उत्तर कोरिया की वजह से भी बढ़ी जापान की चिंता

जापान की चिंता सिर्फ चीन तक सीमित नहीं है। रूस की यूक्रेन में जारी जंग और उसके सुदूर पूर्व में सैन्य गतिविधियों को भी टोक्यो सुरक्षा चुनौती मानता है।

जापान को विशेष चिंता रूस और चीन के बढ़ते रणनीतिक सहयोग तथा रूस-उत्तर कोरिया के सैन्य संबंधों से है। जापानी सरकार ने यह आशंका भी जताई है कि रूस से उत्तर कोरिया को सैन्य या मिसाइल तकनीक से जुड़ी मदद मिल सकती है।

उत्तर कोरिया पहले ही जापान के लिए मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम के कारण बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। इसी साल उत्तर कोरिया ने कई बार बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है।

 

जापान की सेना पर खर्च अब GDP के 2% तक पहुंचा

जापान ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा बजट तेजी से बढ़ाया है। सरकार ने 2027 तक रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए लगभग 43 ट्रिलियन येन के Defense Buildup Program की योजना बनाई थी। इसमें रक्षा बजट को GDP के करीब 2% के स्तर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया।

2026 के लिए जापान का रक्षा बजट 9 ट्रिलियन येन से ज्यादा हो चुका है और यह पिछले साल के मुकाबले करीब 9.4% की बढ़ोतरी है। इसमें लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन जैसी नई क्षमताओं पर बड़ा खर्च किया जा रहा है।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने लंबे समय तक अपेक्षाकृत सीमित सैन्य भूमिका बनाए रखी थी। अब वह अपनी Self-Defense Forces को ज्यादा आधुनिक, तकनीकी और लंबी दूरी की मारक क्षमता से लैस कर रहा है।

 

मिसाइलों के बाद अब ड्रोन पर बढ़ेगा जोर

जापान के नए रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा ऐसी मिसाइलों पर गया है जो 1,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य को निशाना बना सकती हैं। यह जापान की पारंपरिक रक्षात्मक सोच से आगे बढ़कर stand-off capability विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

Image: जुलाई 2024 में होक्काइडो के यासुबेत्सु ट्रेनिंग एरिया में 'ओरिएंट शील्ड 24' के उद्घाटन समारोह के दौरान, ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जवानों का एक ग्रुप एक जॉइंट स्टैटिक डिस्प्ले में ड्रोन ऑपरेशन और उनकी क्षमताओं के बारे में चर्चा कर रहा है। | U.S. ARMY

अब सरकार का ध्यान ड्रोन और दूसरे unmanned weapons पर भी बढ़ रहा है। यूक्रेन युद्ध ने दिखाया है कि अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन निगरानी से लेकर हमले तक में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

जापान में तेजी से बूढ़ी होती आबादी और सैन्य क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी भी एक वजह है कि सरकार unmanned systems और AI आधारित सैन्य तकनीक को ज्यादा महत्व दे रही है।

 

जापान हथियार बनाने वाली अपनी कंपनियों को भी मजबूत करेगा

नई नीति का एक अहम हिस्सा घरेलू defence industrial base को मजबूत करना है। जापान रक्षा उत्पादन में ज्यादा टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और commercial components को शामिल करना चाहता है।

सरकार का मानना है कि इससे रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी सप्लाई पर निर्भरता घट सकती है और जापानी कंपनियों को नए बाजार मिल सकते हैं। साथ ही AI, robotics, electronics, aerospace और unmanned technology जैसी इंडस्ट्री को भी फायदा हो सकता है।

जापान पहले ही रक्षा उपकरणों के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय संयुक्त विकास को लेकर अपने पुराने प्रतिबंधों में ढील दे चुका है। ब्रिटेन और इटली के साथ अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग इसी बड़े बदलाव का हिस्सा हैं।

 

चीन ने जापान की नई नीति पर जताई कड़ी नाराजगी

जापान की नई Defense White Paper पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने जापान पर चीन के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और ताइवान को लेकर अनुचित टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। बीजिंग ने जापान के सामने औपचारिक विरोध भी दर्ज कराया।

चीन के रक्षा मंत्रालय ने इससे पहले जापान के बढ़ते सैन्यीकरण को एशिया-प्रशांत के लिए खतरा बताया था और कहा था कि टोक्यो चीन के सैन्य खतरे की कहानी को बढ़ावा देकर क्षेत्र में तनाव पैदा कर रहा है।

इसका मतलब साफ है कि जापान का सैन्य विस्तार सिर्फ घरेलू नीति नहीं रह गया है। इसका सीधा असर China-Japan Relations और Indo-Pacific Security पर पड़ रहा है।

 

उत्तर कोरिया ने इसे ‘री-इनवेजन’ वाली नीति बताया

उत्तर कोरिया ने भी जापान की White Paper की कड़ी आलोचना की है। उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया KCNA में प्रकाशित टिप्पणी में इसे जापान की सैन्य विस्तारवादी नीति को वैध ठहराने वाला दस्तावेज बताया गया और इसे “re-invasion-minded” यानी दोबारा आक्रमण की मानसिकता वाला बताया गया।

प्योंगयांग का आरोप है कि जापान उत्तर कोरिया को खतरे के रूप में पेश करके अपने हथियारों के विस्तार को सही ठहरा रहा है।

यह विवाद उस समय और महत्वपूर्ण हो जाता है जब जापान ने अमेरिका से खरीदी गई Tomahawk cruise missiles का परीक्षण किया है और उत्तर कोरिया ने भी जापान के आसपास के समुद्री क्षेत्र की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।

 

जापान के सामने सबसे बड़ी मुश्किल पैसा जुटाना है

सैन्य क्षमता बढ़ाने की योजना जितनी बड़ी है, उसे वित्तीय रूप से संभालना उतना ही मुश्किल है। जापान पहले से ही भारी सरकारी कर्ज और कमजोर सार्वजनिक वित्त की चुनौती का सामना कर रहा है।

सरकार ने एक तरफ रक्षा खर्च बढ़ाया है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई और ऊर्जा की ऊंची कीमतों से परिवारों और कारोबारियों को राहत देने के लिए अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ा है। इसलिए आगे रक्षा बजट बढ़ाने के लिए पैसा कहां से आएगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

यही वजह है कि Japan Defense Paper 2026 में रक्षा और आर्थिक विकास को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश महत्वपूर्ण है। सरकार चाहती है कि सैन्य क्षेत्र पर खर्च सिर्फ सरकारी खर्च न दिखाई दे, बल्कि उससे टेक्नोलॉजी, उद्योग, स्टार्टअप और रोजगार को भी बढ़ावा मिले।

 

जापान की बदली रणनीति का मतलब सिर्फ हथियार खरीदना नहीं है

जापान की मौजूदा रणनीति को केवल “military buildup” कहना अधूरा होगा। इसके तीन बड़े हिस्से दिखाई देते हैं। पहला, चीन, रूस और उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाना। दूसरा, मिसाइल, ड्रोन, AI और अन्य आधुनिक तकनीकों पर जोर देना। तीसरा, रक्षा उद्योग को घरेलू आर्थिक विकास और तकनीकी innovation से जोड़ना।

जापान सरकार इस बदलाव को अपनी सुरक्षा जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी बता रही है। लेकिन चीन और उत्तर कोरिया इसे जापान के सैन्यीकरण की दिशा में कदम मान रहे हैं।

इसलिए आने वाले समय में जापान की नई रक्षा नीति का असर सिर्फ उसके सैन्य बजट पर नहीं, बल्कि East Asia की सुरक्षा व्यवस्था, China-Japan Relations, Taiwan Strait और पूरे Indo-Pacific पर दिखाई दे सकता है।

 

FAQ

1. Japan Defense White Paper 2026 क्या है?

यह जापान के रक्षा मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट है, जिसमें देश के आसपास के सुरक्षा माहौल, संभावित खतरों, सैन्य क्षमता और भविष्य की रक्षा नीति का आकलन किया जाता है। जापान का रक्षा मंत्रालय White Paper को आम लोगों को देश की रक्षा स्थिति और चुनौतियों की जानकारी देने वाला दस्तावेज बताता है।

 

2. जापान के Defense Paper में चीन को लेकर क्या कहा गया है?

जापान ने चीन की सैन्य गतिविधियों और अन्य कदमों को गंभीर चिंता बताया है और चीन को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती माना है।

 

3. जापान अपनी सैन्य ताकत क्यों बढ़ा रहा है?

जापान चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता, उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम तथा रूस की सैन्य गतिविधियों को अपनी सुरक्षा के लिए बढ़ती चुनौती मानता है। इसी आधार पर वह लंबी दूरी की मिसाइल, ड्रोन, AI और दूसरी आधुनिक रक्षा तकनीकों में निवेश बढ़ा रहा है।

 

4. जापान का रक्षा खर्च कितना है?

जापान ने रक्षा खर्च को GDP के करीब 2% के स्तर तक पहुंचाने की नीति अपनाई है। 2026 का रक्षा बजट 9 ट्रिलियन येन से अधिक है।

 

5. North Korea ने Japan Defense Paper को क्या कहा?

उत्तर कोरिया ने इसे “re-invasion-minded” यानी दोबारा आक्रमण की मानसिकता वाला दस्तावेज बताया और आरोप लगाया कि जापान अपने सैन्य विस्तार को सही ठहराने के लिए उत्तर कोरिया के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

 

6. क्या जापान अब अपनी डिफेंस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा दे रहा है?

हां। जापान रक्षा उत्पादन में स्टार्टअप्स, नई तकनीक और commercial components के इस्तेमाल को बढ़ाना चाहता है। इसका उद्देश्य सैन्य क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू टेक्नोलॉजी और उद्योग को मजबूत करना भी है।