Banking for Gen Z अब भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत बनता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और वित्तीय संस्थानों के साथ दो दिवसीय बैठक की। बैठक में युवाओं की जरूरतों के मुताबिक बैंकिंग सेवाओं को बदलने, जमा बढ़ाने और भविष्य के लिए बैंकिंग सुधारों पर चर्चा हुई। भारत की करीब 29% आबादी 15 से 29 वर्ष की उम्र के बीच है। ऐसे में सरकार का फोकस है कि बैंकिंग सिस्टम युवाओं की बदलती जरूरतों, डिजिटल आदतों और वित्तीय आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार हो।
Nirmala Sitharaman Banking for Gen Z पर क्यों दे रही हैं जोर?
वित्त मंत्री ने कहा कि देश में बैंकिंग सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए मौजूदा समय काफी अनुकूल है, क्योंकि बैंकों की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है और Non-Performing Assets (NPAs) अब ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर हैं। सीतारमण ने कहा कि भारत जब Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब बैंकिंग सेक्टर की भूमिका भी बदलनी होगी। उन्होंने बैंक अधिकारियों से बैठक के दौरान ऐसे सुझाव देने को कहा, जिन्हें वास्तव में लागू किया जा सके। सरकार ने इस साल के बजट में Banking for Viksit Bharat पर एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाने की घोषणा की थी। वित्त मंत्री के मुताबिक, इस कमेटी की घोषणा जल्द की जाएगी।

Banking for Gen Z में क्या बदल सकता है?
बैठक में युवाओं की शिक्षा से लेकर रोजगार, निवेश और क्रेडिट जरूरतों तक पर चर्चा हुई। बैंकिंग सेक्टर से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, युवाओं के लिए ऐसे उत्पाद विकसित करने पर विचार किया जा रहा है जो अधिक flexibility और बेहतर returns दे सकें।
बैठक में मुख्य रूप से सात विषयों पर चर्चा हुई:
- Deposit Mobilisation
- Banking for Youth
- Supporting the Investment Cycle
- Global Capability Centres (GCCs)
- Agriculture और Horticulture Value Chain Infrastructure
- Priority Sector Lending
- Re-imagining Credit Card Business
इसका सीधा मतलब है कि भविष्य की बैंकिंग केवल बचत खाते और लोन तक सीमित नहीं रहेगी। युवाओं की डिजिटल आदतों, निवेश की जरूरतों और क्रेडिट मांग को ध्यान में रखकर नए बैंकिंग प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं।
Banks के सामने Deposit Mobilisation की बड़ी चुनौती
बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा Deposit Mobilisation रहा। बैंकिंग सिस्टम के लिए जमा राशि बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी आधार पर बैंक ग्राहकों को लोन और दूसरे क्रेडिट उपलब्ध कराते हैं। बैंकिंग सेक्टर के अधिकारियों के मुताबिक, जमा आकर्षित करना आसान नहीं होगा। हालांकि, देश में कमाई करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने के साथ बचत का आधार भी बढ़ सकता है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि किस तरह के नए structured deposit products ग्राहकों को अधिक flexibility और बेहतर returns दे सकते हैं।
Household Debt ने बढ़ाई चिंता
Deposit growth की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारत में household debt को लेकर भी नियामकों की चिंता बढ़ी है। मार्च 2026 तक households के कुल borrowings में non-housing retail loans की हिस्सेदारी 58.4% हो गई थी, जो मार्च 2025 में 54.9% थी। इनमें बड़ी हिस्सेदारी consumption-based borrowing की है। यानी भारतीय परिवारों की उधारी में घर, खेती और कारोबार के अलावा व्यक्तिगत खपत से जुड़े कर्ज का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है। औसत outstanding debt per borrower भी मार्च 2018 के Rs.3.41 लाख से बढ़कर मार्च 2025 में Rs.4.78 लाख हो गया।
Gen Z के लिए Credit और Fintech Loans भी बड़ी चुनौती
युवा वर्ग को बैंकिंग से जोड़ने के साथ-साथ उसके बढ़ते कर्ज को लेकर भी सावधानी जरूरी है। Rs.50,000 से कम के छोटे personal loan segment में fintech कंपनियों की हिस्सेदारी 56.8% तक पहुंच गई है। इस segment में credit growth 41.6% रही, जबकि पूरे segment की growth 20.1% थी। मार्च 2026 में इस segment की delinquencies 6.4% थीं। खास बात यह है कि fintech कंपनियों के loan books का करीब 70.5% हिस्सा unsecured है और इनमें लगभग आधे कर्ज 35 वर्ष से कम उम्र के borrowers को दिए गए हैं। यही वजह है कि Banking for Gen Z की चर्चा केवल बेहतर digital services तक सीमित नहीं है। इसमें responsible lending, financial literacy और युवाओं को सुरक्षित तरीके से credit उपलब्ध कराने की चुनौती भी शामिल है।
Viksit Bharat 2047 के लिए Banking Sector का नया रोडमैप
दो दिवसीय PSB Confluence 2026 में वित्त मंत्रालय, Department of Financial Services, public sector banks, public financial institutions, सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक में बैंकों की deposit base मजबूत करने, ग्राहकों से बेहतर engagement बढ़ाने और युवाओं की financial needs के अनुरूप banking propositions तैयार करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा investment cycle को support करने के लिए financing solutions विकसित करने और तेजी से बढ़ रहे Global Capability Centres (GCCs) ecosystem में बैंकों के लिए नए अवसर तलाशने पर भी चर्चा हुई। सीतारमण ने यह भी कहा कि Viksit Bharat 2047 अब बहुत दूर नहीं है। 2026 से देखें तो लक्ष्य तक पहुंचने के लिए दो दशक से भी कम समय बचा है। इसलिए बैंकिंग सेक्टर में किए जाने वाले सुधारों का असर आने वाले वर्षों में देश की economic growth पर भी पड़ेगा।
निष्कर्ष
Banking for Gen Z पर सरकार का जोर बताता है कि भारत का बैंकिंग सेक्टर अब नई पीढ़ी की जरूरतों के हिसाब से खुद को बदलने की तैयारी कर रहा है। युवाओं के लिए flexible products, बेहतर digital services और आसान financial access के साथ-साथ बढ़ते unsecured loans और household debt पर नियंत्रण भी उतना ही जरूरी होगा। वहीं Deposit Mobilisation की चुनौती यह तय करेगी कि बैंक बढ़ती credit demand को कितनी मजबूती से पूरा कर पाते हैं। आने वाले समय में Banking for Gen Z और Viksit Bharat 2047 का लक्ष्य भारतीय बैंकिंग सुधारों के दो महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।
FAQs
- Nirmala Sitharaman Banking for Gen Z पर क्या फोकस है?
फोकस युवाओं की financial needs के अनुरूप banking products, बेहतर customer engagement, digital services और flexible deposit तथा credit solutions विकसित करने पर है। - Nirmala Sitharaman ने Bankers के साथ Meeting क्यों की?
बैठक का उद्देश्य बैंकिंग सुधारों के लिए workable ideas जुटाना और Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य में बैंकों की भूमिका को मजबूत करना था। - Banking for Gen Z का क्या मतलब है?
इसका मतलब युवाओं की जरूरतों, डिजिटल व्यवहार, आय, बचत, निवेश और credit requirements के अनुरूप banking services और products तैयार करना है। - Deposit Mobilisation क्या है और यह Banks के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Deposit mobilisation का अर्थ ग्राहकों से अधिक जमा राशि जुटाना है। यह बैंकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि deposits के आधार पर वे loans और अन्य credit सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। - भारत में household debt को लेकर चिंता क्यों बढ़ी है?
क्योंकि household borrowings में non-housing retail और consumption loans की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है, जबकि unsecured personal loans में fintech कंपनियों की भूमिका भी मजबूत हुई है।

