Adani US Court Case में अमेरिकी जज ने DOJ के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिसमें गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला वापस लेने की मांग की गई थी। जानिए पूरा मामला, कोर्ट ने क्या कहा और आगे क्या हो सकता है। भारत के उद्योगपति गौतम अदाणी एक बार फिर अमेरिकी अदालत में चल रहे मामले को लेकर सुर्खियों में हैं। Adani US Court Case में नया मोड़ तब आया जब अमेरिकी संघीय न्यायाधीश निकोलस गराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) से सवाल किया कि क्या उसने अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला वापस लेने की असली और पूरी वजह अदालत को बताई है।जज ने कहा कि अदाणी के वकीलों द्वारा दाखिल नए दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि DOJ ने कोर्ट को जो जानकारी दी थी, वह संभवतः पूरी नहीं थी। ऐसे में अदालत ने अब अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला से शपथपत्र के जरिए स्पष्टीकरण मांगा है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
नवंबर 2024 में अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और अन्य लोगों के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। आरोप था कि भारतीय राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) परियोजनाओं के लिए लगभग 250 मिलियन डॉलर की कथित रिश्वत देने की योजना बनाई गई और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया गया।इसके समानांतर, अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने भी निवेशकों को गलत जानकारी देने के आरोप लगाए थे। हालांकि, मई 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग ने अचानक अदालत से आपराधिक मामला वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि वह इस मामले में आगे संसाधन खर्च नहीं करना चाहता।

Adani US Court Case: अमेरिकी जज को किस बात पर हुआ शक?
अमेरिकी जज निकोलस गराउफिस ने कहा कि DOJ के वरिष्ठ अधिकारी आर. ट्रेंट मैककॉट्टर ने अदालत को बताया था कि मामले को वापस लेने का फैसला उन्होंने अकेले लिया था और वे इस मामले के “Final and Sole Decision Maker” थे। लेकिन गौतम अदाणी के वकील रॉबर्ट जिफ्रा जूनियर द्वारा दाखिल किए गए दस्तावेज कुछ और संकेत देते हैं।इन दस्तावेजों में एक ईमेल शामिल है, जिसे अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला ने मई 2026 में अदाणी पक्ष के वकीलों को भेजा था। इस ईमेल से पता चलता है कि मामले को सुलझाने के संभावित विकल्पों पर DOJ के अन्य अधिकारी भी चर्चा कर रहे थे।इसी वजह से जज ने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में मामला वापस लेने का फैसला केवल एक अधिकारी ने लिया था या इसमें अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
10 बिलियन डॉलर के निवेश प्रस्ताव का क्या है मामला?
अदाणी समूह के वकीलों ने बातचीत के दौरान अमेरिका में लगभग 10 बिलियन डॉलर निवेश करने का प्रस्ताव रखा था।हालांकि, अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला ने ईमेल के जरिए स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले को खत्म करने के बदले इस निवेश प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।लेकिन उसी ईमेल में यह भी लिखा गया कि मामले के समाधान के लिए अन्य संभावित विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।यही बात अब अदालत के लिए महत्वपूर्ण बन गई है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि DOJ के भीतर कई स्तरों पर बातचीत चल रही थी।
अदालत ने DOJ और US Attorney से क्या जवाब मांगा है?
जज गराउफिस ने अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र दाखिल करके इन सवालों के जवाब दें–
- क्या वे DOJ द्वारा मामला वापस लेने के लिए बताए गए सभी कारणों से सहमत हैं?
- क्या मामला वापस लेने के पीछे कोई अतिरिक्त कारण भी थे?
- क्या DOJ ने अदालत को पूरी और सटीक जानकारी दी है?
इसके अलावा, अदालत ने उस ईमेल का पूरा रिकॉर्ड भी मंगाया, जिसे अदाणी के वकीलों ने अपने दस्तावेजों में उद्धृत किया था।
क्या अदाणी ने किसी समझौते की बात स्वीकार की है?
गौतम अदाणी ने अपने शपथपत्र में कहा है कि उन्हें किसी ऐसे समझौते की जानकारी नहीं है, जिसके तहत मामला वापस लेने के बदले कोई सौदा हुआ हो।उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनके वकीलों ने अमेरिका में निवेश के प्रस्ताव का उल्लेख किया था, लेकिन यह तभी किया गया था यदि अमेरिकी एजेंसियां उसे किसी संभावित समाधान का हिस्सा मानना चाहतीं।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामला वापस लेने के लिए कोई प्रत्यक्ष समझौता नहीं हुआ था।
अदाणी समूह के कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है?
फिलहाल अदालत केवल DOJ द्वारा मामले को वापस लेने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि गौतम अदाणी के खिलाफ आरोप सिद्ध हो चुके हैं या मामला फिर से शुरू हो गया है।हालांकि, अमेरिकी अदालत की इस अतिरिक्त जांच से निवेशकों और वैश्विक बाजार की नजरें एक बार फिर अदाणी समूह पर टिक गई हैं। यदि अदालत को DOJ की दलीलों में कोई विसंगति मिलती है, तो कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
निष्कर्ष
Adani US Court Case अब केवल अदाणी समूह के खिलाफ लगे आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले लेने की प्रक्रिया भी अदालत की जांच के दायरे में आ गई है। अमेरिकी जज यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मामला वापस लेने के पीछे बताए गए कारण वास्तविक और पूरी तरह पारदर्शी हों। आने वाले दिनों में अमेरिकी अटॉर्नी के शपथपत्र के बाद इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
FAQs:
अमेरिकी जज ने DOJ से पूछा है कि क्या उसने अदाणी के खिलाफ मामला वापस लेने की पूरी और वास्तविक वजह अदालत को बताई है।
DOJ ने कहा था कि उसने अभियोजन पर आगे संसाधन खर्च न करने का फैसला लिया है, लेकिन अदालत अब इस फैसले के पीछे के कारणों की जांच कर रही है।
अदालत ने अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला से शपथपत्र के जरिए यह स्पष्ट करने को कहा है कि मामला वापस लेने के सभी कारण क्या थे और क्या कोई अतिरिक्त कारण भी मौजूद थे।
मामला कथित रिश्वतखोरी, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े अनुबंध और अमेरिकी निवेशकों को कथित रूप से गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा है।
फिलहाल कानूनी प्रक्रिया जारी है। यदि मामला लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव निवेशकों की धारणा और बाजार की प्रतिक्रिया पर पड़ सकता है।

