पाकिस्तान में एयरपोर्ट सुरक्षा और यात्रियों की जांच व्यवस्था को आधुनिक बनाने को लेकर एक नया प्रस्ताव चर्चा में है। अमेरिका की ओर से पाकिस्तान में कार्यरत वरिष्ठ राजनयिक नताली ए. बेकर ने एक ऐसी योजना का समर्थन किया है, जिसमें एडवांस्ड पैसेंजर इन्फॉर्मेशन (API) और पैसेंजर नेम रिकॉर्ड (PNR) सिस्टम लागू करने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कंपनी Securiport द्वारा दिया गया है।
इस प्रस्ताव का मकसद पाकिस्तान के बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम को और मजबूत बनाना है, ताकि यात्रियों की जानकारी पहले से मिल सके और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
क्या है यह नया प्रस्ताव?
Securiport नाम की कंपनी ने पाकिस्तान सरकार को एक ऐसा सिस्टम देने का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत एयरलाइंस से यात्रियों की जानकारी सीधे सरकार तक पहुंचेगी। इसमें यात्रियों का नाम, यात्रा से जुड़ी जानकारी और अन्य जरूरी डेटा शामिल होगा।
कंपनी का कहना है कि इस सिस्टम में डेटा का पूरा नियंत्रण पाकिस्तान सरकार के पास रहेगा। साथ ही 24 घंटे तकनीकी सहायता और कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
अगर यह योजना लागू होती है, तो पाकिस्तान में एयरपोर्ट सुरक्षा का स्तर काफी बढ़ सकता है और यात्रियों की जांच प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।
कितना बड़ा निवेश है?
इस प्रस्ताव के तहत Securiport करीब 2.4 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। यह निवेश 25 साल के अनुबंध के दौरान किया जाएगा। खास बात यह है कि कंपनी शुरुआती खर्च खुद उठाएगी और बाद में इसे सरकार की मंजूरी से यात्रियों पर लगाए जाने वाले सुरक्षा शुल्क के जरिए वसूलेगी।
इसके अलावा कंपनी पाकिस्तान में अपनी एक स्थानीय शाखा भी खोलना चाहती है, जहां 1000 से ज्यादा लोगों को इस तकनीक से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी।
अमेरिका का समर्थन क्यों?
अमेरिकी राजनयिक नताली बेकर ने पाकिस्तान के अधिकारियों से इस प्रस्ताव पर विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सिस्टम से यात्रा ज्यादा सुरक्षित और सुचारु हो सकती है।
हालांकि, अमेरिका के दूतावास ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा टिप्पणी नहीं की और कहा कि यह पाकिस्तान सरकार का आंतरिक मामला है।

पाकिस्तान में पहले से चल रही योजना
पाकिस्तान पहले से ही एयरपोर्ट पर ई-गेट सिस्टम लागू करने की योजना बना रहा है। इस सिस्टम के जरिए यात्रियों की जांच तेजी से की जा सकेगी।
सरकार का दावा है कि इस तकनीक के आने से इमिग्रेशन प्रक्रिया का समय 3-5 मिनट से घटकर 45 सेकंड से भी कम हो जाएगा। इसमें बायोमेट्रिक पासपोर्ट स्कैनर और फेस रिकग्निशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
इस प्रस्तावित सिस्टम को पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) संचालित करेगी। यह एक एकीकृत बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम होगा, जिसमें बायोमेट्रिक डेटा का भी उपयोग किया जाएगा।
यह सिस्टम कई डेटाबेस से जुड़ा होगा, जैसे –
- एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ECL)
- इंटरपोल डेटाबेस
- पैसेंजर नेम रिकॉर्ड (PNR)
इन सबकी मदद से किसी भी संदिग्ध यात्री की पहचान तुरंत की जा सकेगी।
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
हालांकि यह योजना सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद मानी जा रही है, लेकिन इसके कार्यान्वयन को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। पाकिस्तान की सीनेट की रक्षा समिति ने इस परियोजना में पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है।
समिति का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। खासकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी नियमों के अनुसार सही तरीके से टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं।
IMF की भी आपत्ति
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी इस तरह के सीधे अनुबंध (Direct Contracting) पर चिंता जताई है। IMF का कहना है कि सरकारी कंपनियों को बिना प्रतिस्पर्धा के ठेका देना सही नहीं है और इससे पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है।
इसलिए IMF ने पाकिस्तान से ऐसे नियमों को वापस लेने को कहा है, जो सीधे अनुबंध की अनुमति देते हैं।
पहले भी हो चुकी है कोशिश
पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) ने 2020 में इस तरह के सिस्टम के लिए वैश्विक स्तर पर प्रस्ताव मांगे थे। इसके बाद 2024 में भी एक नई प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन दोनों ही प्रयास आगे नहीं बढ़ पाए।
अब Securiport का यह नया प्रस्ताव एक बार फिर इस योजना को गति दे सकता है, लेकिन अंतिम फैसला पाकिस्तान सरकार को ही लेना है।
क्या होगा आगे?
फिलहाल पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि सरकार इस योजना को मंजूरी देती है या नहीं।
अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो पाकिस्तान में एयरपोर्ट सुरक्षा और यात्रा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन इसके साथ ही पारदर्शिता और नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी होगा।
निष्कर्ष:
यह प्रस्ताव पाकिस्तान के लिए एक बड़ा तकनीकी और सुरक्षा सुधार साबित हो सकता है। इससे न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों को भी तेज और आसान सुविधा मिलेगी।
लेकिन इसके साथ जुड़े सवाल – जैसे पारदर्शिता, नियमों का पालन और अंतरराष्ट्रीय दबाव – भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

