Dimagi Naxal Party: ‘दिमागी नक्सल’ बोलते ही सोशल मीडिया पर बनी नई पार्टी, Instagram पर 2.29 लाख फॉलोअर्स; जानिए PM मोदी के बयान से शुरू हुआ पूरा विवाद

Dimagi Naxal Party

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘दिमागी नक्सल’ अब राजनीतिक बयान से आगे बढ़कर सोशल मीडिया ट्रेंड बन गया है। पीएम मोदी के बयान के अगले ही दिन ‘Dimagi Naxal Party’ नाम से एक सोशल मीडिया अकाउंट सामने आया, जिसने बेहद कम समय में बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटा लिए।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस नाम के Instagram अकाउंट ने 24 घंटे के भीतर करीब 1.6 लाख फॉलोअर्स जुटा लिए थे, जबकि 17 अगस्त की शाम 4.15 PM तक इसके फोलोअर्स 2.29 लाख पहुच गए।

इसका X अकाउंट ‘Dimagi Naxal Janta Party’ (@DNJP_India) नाम से है। अकाउंट की प्रोफाइल में इसका स्लोगन “Think | Research | Resist” यानी ‘सोचो, रिसर्च करो और विरोध करो’ लिखा है। इसके Instagram और X प्रोफाइल में खुद को एक राजनीतिक-सटायरिक यानी व्यंग्यात्मक पहल के तौर पर पेश किया गया है।

Dimagi Naxal Party

PM मोदी ने 15 अगस्त को क्या कहा था

इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस भाषण से हुई। लाल किले से देश को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ने जंगलों में सक्रिय हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन उनके मुताबिक नक्सली विचारधारा का प्रभाव अभी भी एक चुनौती है।

इसी संदर्भ में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की बात कही, जिन्हें सरकार नक्सली या माओवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने वाला मानती है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि दशकों तक नक्सली हिंसा ने देश के कई हिस्सों में लोगों और युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया। उनके मुताबिक अब हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन विचारधारा के स्तर पर मौजूद खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यही ‘दिमागी नक्सल’ शब्द बाद में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

 

‘दिमागी नक्सल’ का मतलब क्या है

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘दिमागी नक्सल’ कोई आधिकारिक कानूनी शब्द या अलग से परिभाषित अपराध नहीं है।

नक्सलवाद या माओवादी उग्रवाद का संबंध भारत में सशस्त्र माओवादी आंदोलन और उससे जुड़े संगठनों से है। इसके विपरीत ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल मौजूदा राजनीतिक बहस में उन लोगों के लिए किया जा रहा है, जिन्हें सरकार नक्सली या माओवादी विचारधारा से प्रभावित या उसका समर्थक मानती है।

इसलिए किसी व्यक्ति को सिर्फ ‘दिमागी नक्सल’ कह दिए जाने से यह कानूनी रूप से साबित नहीं होता कि वह किसी प्रतिबंधित माओवादी संगठन का सदस्य है या उसने कोई अपराध किया है। किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया और सबूत जरूरी होंगे।

 

विपक्ष ने कहा- नया नाम देकर आलोचना नहीं रोक सकते

PM मोदी के बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने इस शब्द को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि वह “दिमागी नक्सल होने पर गर्व” करते हैं। उनका बयान प्रधानमंत्री के इस्तेमाल किए गए शब्द पर राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर सामने आया।

कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी आरोप लगाया कि सरकार आलोचना करने वाले लोगों और राजनीतिक विरोधियों को अलग-अलग नामों से निशाना बना रही है। दूसरी ओर बीजेपी ने चिदंबरम के बयान को माओवादी विचारधारा के प्रति नरमी के तौर पर पेश करते हुए पलटवार किया।

यानी विवाद सिर्फ एक शब्द का नहीं रहा, बल्कि यह सरकार बनाम विपक्ष की वैचारिक और राजनीतिक बहस में बदल गया।

 

किरेन रिजिजू ने बताया- PM का इशारा किन लोगों की ओर था

विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के बयान को लेकर स्पष्टीकरण दिया।

रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। उनके मुताबिक यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को अस्वीकार करते हैं, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं या अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं और भारत के उत्तर-पूर्व को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने की बात करते हैं।

हालांकि, रिजिजू की यह व्याख्या राजनीतिक स्पष्टीकरण है। इसे ‘दिमागी नक्सल’ की कोई अलग कानूनी परिभाषा नहीं माना जा सकता।

 

इसी विवाद के बीच Instagram पर आई ‘Dimagi Naxal Party’

PM मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस शब्द को ही अपने व्यंग्य और राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया।

इसी माहौल में ‘Dimagi Naxal Party’ नाम का Instagram अकाउंट सामने आया। इस अकाउंट ने बेहद तेजी से फॉलोअर्स जुटाए। Northeast Today ने 17 अगस्त को रिपोर्ट किया कि अकाउंट ने एक दिन में करीब 1.6 लाख फॉलोअर्स हासिल किए थे, जबकि जबकि 17 अगस्त की शाम 4.15 PM तक इसके फोलोअर्स 2.29 लाख पहुच गए।

इसके X अकाउंट का नाम ‘Dimagi Naxal Janta Party’ है और इसका हैंडल @DNJP_India बताया गया है। पार्टी के सोशल मीडिया बायो में “Think | Research | Resist” लिखा है।

प्रोफाइल में संस्थापक को मजाकिया अंदाज में “A Dimagi Indian” बताया गया है, जबकि को-फाउंडर के तौर पर “56 Inch ka” लिखा गया है। यह साफ तौर पर व्यंग्यात्मक राजनीतिक शैली का हिस्सा नजर आता है।

 

पार्टी खुद को भगत सिंह की विचारधारा से जोड़ रही

इस सोशल मीडिया समूह की पोस्ट में खुद को भगत सिंह के विचारों का फॉलोअर बताया गया है।

एक पोस्ट में कहा गया कि अगर उनके अकाउंट को सस्पेंड करने की कोशिश की जाती है या उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ कहा जाता है, तो इसे भगत सिंह का अपमान माना जाएगा।

यहां भी ध्यान रखना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर किसी अकाउंट का खुद को किसी विचारधारा या ऐतिहासिक व्यक्ति से जोड़ना उसके औपचारिक राजनीतिक संगठन या चुनावी पार्टी होने का प्रमाण नहीं है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ‘Dimagi Naxal Party’ को एक सोशल मीडिया आधारित व्यंग्यात्मक राजनीतिक पहल के रूप में देखना ज्यादा उचित है, न कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में।

 

अकाउंट पर साइबर अटैक का भी दावा

सोमवार को इस अकाउंट की ओर से यह दावा भी किया गया कि उसके Instagram अकाउंट पर साइबर अटैक की कोशिश हुई है।

इसके X अकाउंट से पोस्ट कर कहा गया कि Instagram पर साइबर अटैक शुरू हो गया है और देखा जाएगा कि क्या इससे उनकी आवाज दबाई जा सकती है।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल अकाउंट की ओर से किया गया दावा ही माना जाना चाहिए।

 

क्या ‘Dimagi Naxal Party’ सच में राजनीतिक पार्टी है?

अभी ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे इसे भारत की मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी कहा जा सके।

यह नाम फिलहाल सोशल मीडिया पर एक सटायरिक यानी व्यंग्यात्मक राजनीतिक पहचान के तौर पर सामने आया है। इसका तेजी से वायरल होना इस बात को दिखाता है कि राजनीतिक बयान में इस्तेमाल किया गया कोई शब्द किस तरह इंटरनेट पर मीम, पहचान या अभियान का रूप ले सकता है।

सोशल मीडिया फॉलोअर्स को सीधे राजनीतिक समर्थन या वोट में बदलकर नहीं देखा जा सकता। किसी Instagram या X अकाउंट के फॉलोअर्स की संख्या यह साबित नहीं करती कि उतने ही लोग उसके राजनीतिक विचारों का समर्थन करते हैं।

 

विवाद अब सिर्फ एक शब्द का नहीं रहा

‘दिमागी नक्सल’ विवाद में एक तरफ सरकार का तर्क है कि हथियारबंद नक्सलवाद के कमजोर होने के बावजूद माओवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है। दूसरी तरफ विपक्ष और आलोचकों का कहना है कि इस तरह के लेबल का इस्तेमाल राजनीतिक असहमति और आलोचना को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए।

इसी राजनीतिक खींचतान के बीच पी. चिदंबरम की प्रतिक्रिया, बीजेपी का पलटवार और अब सोशल मीडिया पर ‘Dimagi Naxal Party’ का उभरना इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना रहा है।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है, जहां प्रधानमंत्री के भाषण का एक राजनीतिक शब्द खुद ही एक डिजिटल पहचान में बदल गया है।

 

FAQ

1. ‘Dimagi Naxal Party’ Instagram Page क्या है?

यह ‘Dimagi Naxal Party’ नाम का एक सोशल मीडिया अकाउंट है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान के बाद तेजी से चर्चा में आया। इसे फिलहाल एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक सोशल मीडिया पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

 

2. Dimagi Naxal Party के Instagram Followers कितने हैं?

17 अगस्त की रिपोर्टों में इसके फॉलोअर्स करीब 1.6 लाख से 1.7 लाख से ज्यादा बताए गए। उपलब्ध ताजा जानकारी में यह संख्या करीब 1.81 लाख बताई जा रही है।

 

3. Dimagi Naxal Party का Motto क्या है?

इसके Instagram और X प्रोफाइल में “Think | Research | Resist” लिखा है।

 

4. क्या ‘दिमागी नक्सल’ कोई कानूनी शब्द है?

नहीं। ‘दिमागी नक्सल’ कोई अलग कानूनी श्रेणी या अपराध की आधिकारिक परिभाषा नहीं है। यह मौजूदा राजनीतिक बहस में इस्तेमाल किया गया शब्द है।

 

5. PM मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ किसे कहा?

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी व्यक्ति या विपक्षी नेता का नाम लेकर उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा। बाद में किरेन रिजिजू ने इसे माओवादियों और अलगाववादियों का समर्थन करने तथा संविधान को अस्वीकार करने जैसी विचारधाराओं से जोड़कर समझाया।

 

6. क्या Dimagi Naxal Party भारत की मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है?

उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई आधार नहीं है। फिलहाल यह सोशल मीडिया पर सामने आया एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक अकाउंट/पहल है।