DMK Opposes Delimitation Bill: INDIA गठबंधन से बाहर होने के बाद भी सीमांकन विधेयक के मौजूदा स्वरूप के खिलाफ डटी DMK

 

भारत के राजनीतिक परिदृश्य में DMK Opposes Delimitation Bill एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। INDIA गठबंधन से अलग होने के बाद भी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने स्पष्ट किया है कि वह सीमांकन (Delimitation) से जुड़े प्रस्तावित विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध जारी रखेगी। पार्टी का कहना है कि वर्तमान जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय करेगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।

INDIA गठबंधन से अलग होने के बाद क्या बदला?

हाल ही में तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले, जब कांग्रेस ने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के साथ गठबंधन किया। इसके बाद DMK ने INDIA गठबंधन से दूरी बना ली।

हालांकि, DMK नेताओं ने साफ किया है कि गठबंधन से अलग होने का मतलब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाना नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, DMK अभी भी विपक्षी दलों के संपर्क में है और राज्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख कायम रखेगी।

 

DMK Opposes Delimitation Bill: पार्टी क्यों कर रही है विरोध?

DMK का मुख्य तर्क यह है कि प्रस्तावित Delimitation Bill India में लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को वर्तमान जनसंख्या आंकड़ों से जोड़ा जा रहा है। पार्टी का मानना है कि इससे उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने पिछले कई दशकों में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है।

 

DMK की मांगें हैं:

  • सीमांकन के लिए 1971 की जनगणना को आधार बनाया जाए।
  • सीटों पर लागू वर्तमान फ्रीज को अगले 25 वर्षों तक बढ़ाया जाए।
  • दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी न आने दी जाए।
  • राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे की रक्षा की जाए।

पार्टी का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को राजनीतिक रूप से दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

 

प्रस्तावित Delimitation Bill India में क्या है?

प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत लोकसभा की कुल सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करना बताया गया।

हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व का संतुलन भी बदल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया तो उत्तर भारत के अधिक आबादी वाले राज्यों को अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है।

Image Source: The Wire

 

Tamil Nadu Politics और दक्षिणी राज्यों की चिंता

Tamil Nadu Politics में सीमांकन का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। तमिलनाडु समेत कई दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।

यदि लोकसभा सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो इन राज्यों की संसद में हिस्सेदारी घट सकती है। इसी वजह से DMK, AIADMK समेत कई क्षेत्रीय दल इस विषय पर चिंता जता चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले वर्षों में दक्षिण भारत बनाम उत्तर भारत की राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

 

Parliamentary Delimitation पर विपक्ष की रणनीति

अप्रैल 2026 में विपक्षी दलों की एकजुटता के कारण केंद्र सरकार संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने में सफल नहीं हो पाई थी। उस समय कांग्रेस, DMK और अन्य विपक्षी दलों ने मिलकर विधेयक का विरोध किया था।

अब जबकि DMK INDIA गठबंधन से अलग हो चुकी है, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि सरकार भविष्य में संशोधित विधेयक लाती है तो पार्टी का रुख क्या होगा।

DMK सांसद ए. राजा के अनुसार, पार्टी मौजूदा स्वरूप में विधेयक का विरोध जारी रखेगी और नए प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।

 

राजनीतिक प्रभाव और आगे की राह

Indian Political Developments के संदर्भ में सीमांकन का मुद्दा केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर राज्यों के राजनीतिक प्रभाव, संसदीय प्रतिनिधित्व और केंद्र-राज्य संबंधों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार व्यापक सहमति के बिना सीमांकन प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है, तो दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक विरोध और तेज हो सकता है। वहीं, यदि राज्यों की चिंताओं को शामिल किया जाता है, तो राष्ट्रीय स्तर पर सहमति बनाना संभव हो सकता है।

TMC सांसदों के द्वारा किए गए हस्ताक्षर

 

निष्कर्ष

DMK Opposes Delimitation Bill का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है। INDIA गठबंधन से अलग होने के बावजूद DMK ने स्पष्ट किया है कि वह सीमांकन विधेयक के मौजूदा स्वरूप का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी का मानना है कि वर्तमान जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण दक्षिणी राज्यों के हितों को प्रभावित कर सकता है और इसलिए राज्यों के अधिकारों तथा संतुलित प्रतिनिधित्व की रक्षा आवश्यक है।

 

FAQs

Q1. Why is DMK opposing the Delimitation Bill?

DMK का मानना है कि वर्तमान जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर सीमांकन करने से दक्षिणी राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व घट सकता है, जबकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।

 

Q2. What is the Delimitation Bill?

यह एक प्रस्तावित विधेयक है जिसके तहत लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण और सीटों की संख्या में वृद्धि की जा सकती है ताकि जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

 

Q3. Has DMK left the INDIA alliance?

हाँ, कांग्रेस और TVK के गठबंधन के बाद DMK ने INDIA गठबंधन से अलग होने का फैसला किया है।

 

Q4. How could delimitation affect southern states?

वर्तमान जनसंख्या के आधार पर सीमांकन होने पर दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों का अनुपात कम हो सकता है, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव घट सकता है।

 

Q5. What are the political implications of the bill?

यह विधेयक संसद की संरचना, राज्यों के प्रतिनिधित्व और केंद्र-राज्य संबंधों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इसे लेकर व्यापक राजनीतिक बहस जारी है।